आजादी के 78 सालों बाद भी जयपुर व बीकानेर के लिए सीधी ट्रेन सेवा से वंचित हैं सुजानगढ़, लाडनूं डीडवाना व छोटी खाटू रेलवे स्टेशन,
प्रवासी लाडनूंवासी अनिल कुमार खटेड़ ने फिर खटखटाया रेलवे अधिकारियों का दरवाजा
लाडनूं (kalamkala.in)। आजादी के 78 सालों बाद भी रेलवे के रतनगढ़-डेगाना सेक्शन पर स्थित पड़िहारा, ताल छापर, सुजानगढ़, लाडनूं, डीडवाना, छोटी खाटू जैसे बड़े शहर व स्टेशन राजस्थान की राजधानी जयपुर तथा संभाग मुख्यालयों बीकानेर या अजमेर जाने के लिए सीधी ट्रेन सेवा के लिए केवल राह ही तक रहे हैं। दूसरी तरफ रेल मंत्री व रेलवे विभाग के अधिकारीगण रेलवे के विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन इस सेक्शन के लिए विकास केवल दिवास्वप्न ही बन कर रह गया है। इस सेक्शन पर आने वाले सांसदों की भी उपेक्षा के साथ रेलवे अधिकारियों द्वारा लगातार भेदभाव किया जा रहा है।उत्तर-पश्चिम रेलवे को हर ट्रेन जयपुर मुख्यालय पर चाहिए, लेकिन उनकी नजर में लगता है कि डेगाना-रतनगढ़ सेक्शन का कोई अस्तित्व ही नहीं है।
गेज परिवर्तन के बाद की गई क्षेत्र की पूरी उपेक्षा
सर्वविदित ही है कि पूर्व में मीटरगेज के समय मेड़ता रोड़ से बीकानेर के मध्य वाया डेगाना, छोटी खाटू, खुनखुना, डीडवाना, लाडनूं, सुजानगढ़, रतनगढ़, राजलदेसर, श्री डूंगरगढ़ के लिए एक सवारी गाड़ी संचालित हुआ करती थी, जो यात्रियों के लिए सुविधाजनक थी, लेकिन ब्रॉडगेज बन जाने के बाद इस मार्ग के लिए यह गाड़ी बन्द कर दी गई। इससे इन स्टेशनों के यात्रियों के लिए अपने संभाग मुख्यालय बीकानेर के लिए कोई भी सीधी रेल सेवा उपलब्ध नहीं रही है। जानकारी मिली है कि गेज परिवर्तन से पूर्व जो रेल गाड़ियां संचालित होती थी, उनको गेज परिवर्तन के बाद रेलवे को नियमानुसार संचालित करना जरूरी होता है।
लम्बी दूरी की ट्रैनों से कनेक्टिविटी के लिए सुविधा जरूरी है
बीकानेर, रतनगढ़, मेड़ता रोड से उनके लिए मेल एक्सप्रेस ट्रेन भारत के अलग-अलग शहरों को जाती है, अगर बीकानेर से मेड़ता रोड नई ट्रैन वाया रतनगढ़, सुजानगढ़, लाडनूं, डीडवाना, छोटी खाटू, डेगाना होकर चलाई जाए तथा बीकानेर से जयपुर नई ट्रैन वाया रतनगढ़, सुजानगढ़, लाडनूं, डीडवाना, छोटी खाटू, डेगाना, कुचामन सिटी, मकराना, फुलेरा होकर ट्रैन उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा चला दी जाती है तो सुजानगढ़, पड़िहारा, तालछापर, लाडनूं, डीडवाना, खुनखुना, छोटी खाटू व खाटू, राजलदेसर सहित अनेक शहरों व इनके आस पास के गावों के लोगों को आवागमन की सुविधा मिलेगी और वे इन जगहों से लम्बी दूरी की मेल एक्सप्रेस सुपरफास्ट व दुरंतो जैसी ट्रेनों को आसानी से पकड़ सकते हैं।
धार्मिक व शैक्षिक पर्यटकों को मिलेगा बढ़ावा
रेलवे के वर्तमान आंकड़ों से इन सभी स्टेशनों पर पर्याप्त संख्या में यात्री भार उपलब्ध है और बहुत से धार्मिक स्थल आपस में जुड़ जायेंगे, जिनमें प्रमुख रूप से देशनोक का करणी माता का मंदिर, सुजानगढ़ के पास स्थित सालासर बालाजी धाम, तालछापर का स्थित कृष्णमृग अभ्यारण, लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती व जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय एवं अति प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर, रेण के पास स्थित सुप्रसिद्ध बुटाटी धाम आदि इस तरह के अनेक प्रमुख स्थान व इन शहरों व गांवो के ऐसे स्थान आपस में जुड़ सकेगें। यह धार्मिक पर्यटन के लिए भी लाभदायक सिद्ध होगा।
मंजूरी को नौ साल बीते, अब तो ध्यान दें
सन् 2016 की अंतर रेलवे समय सारणी में इस ट्रैन को रेलवे बोर्ड द्वारा मंजूरी दी गयी थी, लेकिन 9 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक इस ट्रैन का संचालन नहीं हुआ, जबकि इस ट्रैन का पूरा रूट उत्तर-पश्चिम रेलवे के अधिकार वाले जोधपुर व बीकानेर डिवीज़न के तहत है। इस कारण इसके लिए किसी दूसरे जोन की कोई स्वीकृति की भी आवश्यकता नहीं है। केवल उत्तर-पश्चिम रेलवे की ट्रैन चलाने की मंशा पर ही सब कुछ निर्भर है।
रेलवे अधिकारी बीकानेर से जयपुर नई ट्रेन चलाएं
यह सब विवरण उत्तर पश्चिम रेलवे सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार खटेड़ (लाडनूं निवासी व कोलकाता प्रवासी) द्वारा सभी रेलयात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जोधपुर व बीकानेर डिवीजन के सभी उच्च रेलवे अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही करते हुए इस रूट पर नई ट्रेन बीकानेर से मेड़ता रोड वाया रतनगढ़ सुजानगढ़ लाडनूं डीडवाना छोटी खाटू डेगाना होकर व बीकानेर से जयपुर नई ट्रैन वाया रतनगढ़ सुजानगढ़ लाडनूं डीडवाना छोटी खाटू डेगाना कुचामन सिटी मकराना फुलेरा होकर चलाने के प्रस्ताव को जन भावना को ध्यान में रखकर जल्द से मंजूरी दी जाने की मांग की है। उन्होंने साथ ही बीकानेर, चूरू व नागौर के सांसदों व उत्तर पश्चिम रेलवे अधिकारियों से पुनः इस क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग पर शीघ्र कार्रवाई करके क्षेत्र की जनता को राहत प्रदान करने की मांग दोहराई है।







