अपनी सारी सम्पत्ति दान कर गुरुकुल कांगड़ी के साथ देश में की गुरुकुल व्यवस्था की पुनर्स्थापना- गजेंद्र परिहार,
आर्य समाज कुचेरा में मनाई स्वामी श्रद्धानंद जयंती

कुचेरा (kalamkala.in)। आर्य समाज कुचेरा में रविवार 22 फरवरी को स्वामी श्रद्धानंद जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विशेष यज्ञ का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आर्य समाज कुचेरा के प्रधान गजेंद्र परिहार ने महान हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंदजी के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे वैदिक विचारों से प्रेरित थे। देश में गुरुकुल व्यवस्था के पुनर्स्थापना का महत्ती कार्य स्वामी श्रद्धानंद ने किया था। स्वामी श्रद्धानंद ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने भारत में फिर से गुरुकुल की स्थापना के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। गुरुकुल कॉंगडी आज एक विश्वविद्यालय के रूप में संचालित हो रहा है। इसकी स्थापना की देन स्वामी श्रद्धानंदजी की ही है। स्वामी श्रद्धानंद एक अति संपन्न और वैभवशाली घराने से सम्बद्ध थे, उन्होंने अपनी सारी संपत्ति गुरुकुल की स्थापना के लिए लगा दी थी। महात्मा गांधी को ‘महात्मा’ की उपाधि स्वामी श्रद्धानंद ने ही प्रदान की थी। परिहार ने बताया कि स्वामी श्रद्धानंदजी की जयंती पर आर्यसमाज में विशेष हवन का आयोजन किया गया और उन्हें याद किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रहलाद मुनि ने हवन के महत्व को उजागर किया। लक्ष्मी आर्या ने भजन की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर आर्य समाज के पदाधिकारीगण गजेंद्र परिहार, रामेश्वर आर्य, प्रहलाद मुनि, रूप किशोर आर्य, राजेंद्र वैष्णव, बबलू आर्य, लक्ष्मी आर्या, श्याम चौहान, विवेक आदि ने यज्ञ में आहुतियां प्रदान की।






