शुद्धि आंदोलन से लाखों दिग्भ्रमितों को फिर से सनातन धारा में किया शामिल- डॉ. सैनी,
गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद को जयंती पर किया याद

लाडनूं (kalamkala.in)। यहां राहूगेट स्थित आर्य समाज मंदिर में रविवार को साप्ताहिक यज्ञ-सत्संग के साथ अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यज्ञ पुरोहित जगजीत सिंह आर्य ने सर्वप्रथम यज्ञ सम्पन्न करवाया। कार्यक्रम में आर्य समाज के प्रधान डॉ. जगदीश यायावर सैनी ने स्वामी श्रद्धानंद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके कर्तृत्व और बलिदान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वामी श्रद्धानन्द का नाम पहले मुंशीराम था। उनका जन्म पंजाब प्रांत के जालंधर जिले के तलवान गांव में 22 फरवरी, 1856 को हुआ था। उन्होंने महर्षि दयानन्द सरस्वती की शिक्षाओं और वैदिक ज्ञान को आगे बढ़ाया। भारत की पुरातन शिक्षा पद्धति को फिर से सिरमौर बनाने के लिए स्वामी श्रद्धानंद ने अथक प्रयासों से गुरुकुल स्थापना कुछ शुरुआत की। उन्होंने सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए शुद्धि आंदोलन चलाया और भ्रमित होकर धर्म रूपांतरित हुए लाखों लोगों कुछ घर-वापसी करवाई थी। उन्होंने अपना जीवन देश की स्वाधीनता, स्वराज्य, शिक्षा तथा वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया था। कोषाध्यक्ष मेघाराम स्वामी ने स्वामी श्रद्धानंद के प्रति भावांजलि व्यक्त करते हुए गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय सहित अनेक शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना करने और हिन्दू समाज व भारत को संगठित करने तथा 1920 के दशक में शुद्धि आन्दोलन चलाने के महान कार्य को करने के लिए स्वामी श्रद्धानंद को याद किया। हिसाब परीक्षक डॉ. राजेन्द्र सिंह आर्य, संरक्षक मुनि ओमदास, पार्षद सुमित्रा आर्य आदि ने स्वामी श्रद्धानंद के अछूतोद्धार के महान कार्य को स्मृत किया। यज्ञ प्रभारी तारा आर्य ने गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मंत्री महावीर स्वामी, दयानन्द आर्य, भंवरसिंह दुजार, अनोपचंद सांखला आदि उपस्थित रहे।







