लाडनूं में शीतला माता का भव्य मेला 11 मार्च को, मंदिर परिसर में भव्य जागरण 10 मार्च को, रांधा-पोवा (बास्योड़ा) पर घर-घर में विविध व्यंजन बनाने का आयोजन 10 मार्च मंगलवार को

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लाडनूं में शीतला माता का भव्य मेला 11 मार्च को, मंदिर परिसर में भव्य जागरण 10 मार्च को,

रांधा-पोवा (बास्योड़ा) पर घर-घर में विविध व्यंजन बनाने का आयोजन 10 मार्च मंगलवार को

रामसिंह रैगर, पत्रकार। लाडनूं (kalamkala.in)। श्री शीतला माता सेवा समिति लाडनूं के तत्वावधान में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी शीतला माता का भव्य मेला 11 मार्च बुधवार को शीतलाष्टमी पर रैगर बस्ती स्थित शीतला माता मंदिर चौक में आयोजित किया जाएगा। शीतला माता सेवा समिति के अध्यक्ष नोरतनमल तुनगरिया ने बताया कि शीतला माता का ‘बास्योड़ा’ (रांधा-पोवा) के अवसर पर 10 मार्च मंगलवार को शीतला-सप्तमी (शील सात्यूं) पर शहर के सभी घरों में परम्परागत ढंग से विभिन्न पकवानों-व्यंजनों को बनाया जाएगा। मंगलवार को ही रात्रि में शीतला माता मंदिर परिसर में भव्य जागरण का कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें स्थानीय व आसपास के भजन गायक कलाकार माता के भजनों की प्रस्तुति देंगे। अगले दिन 11 मार्च बुधवार को शीतला माता चौक में विशाल मेले का आयोजन किया जाएगा। बुधवार को तड़के से ही शीतला माता को ठंडे पकवानों का भोग (धोक) लगाया जाना शुरू हो जाएगा।

शीतलाष्टमी को नहीं जलेंगे घरों में चूल्हे, नहीं खाया जाएगा गर्म खाना

भागीरथ फुलवारिया ने बताया कि शीतला माता मंदिर में शीतला और पास के बोदरी माता मंदिर में प्रतिमाओं को पहले दिन बनाए गए पकवानों लापसी, राबड़ी, दही, खीचड़ी आदि का भोग लगाया जाता है व ठंडा जल चढ़ाया जाता है। शीतला माता के इस शीतलाष्टमी पर्व को लेकर जन-मान्यता व धार्मिक परम्परा रही है कि इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है और इस दिन केवल ठंडे पकवानों व व्यजनों का ही भोजन किया जाता है। गौरतलब रहे कि यह शीतला माता का मन्दिर नगर का एकमात्र मन्दिर है, जहां पर शहर के अलावा आसपास के गांवों से भी हजारों श्रद्धालु भक्त महिला-पुरुष अपने बच्चों सहित शीतला माता व बोदरी माता को धोक लगाने व अपने परिवार की खुशहाली व बच्चों के स्वास्थ्य की मंगल कामनाओं के लिए मन्दिर मे दर्शन-पूजन के लिए आते है।

लाडनूं का प्राचीन परम्परागत सांस्कृतिक मेला है शीतला माता का मेला

शीतला माता मेले की तैयारियों को लेकर समिति के कार्यकर्ता जुटे हुए हैं। इस भव्य मेले के आयोजन की सफलता के लिए सभी कार्यकर्ताओ को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी जाकर विभिन्न कामों को अंजाम दिया जा रहा है। मेले के दौरान गणगौर की मिट्टी की प्रतिमाओं, विविध खिलौनों, सजावटी सामान, घरेलु उपयोगी सामान, गुब्बारों, आइसक्रीम, कुल्फी, विभिन्न नमकीन, मिठाई और खाने-पीने की विभिन्न सामग्रियां आदि की अस्थाई दुकानें सजाई जाएगी। मेरा प्रातः करीब 3 बजे से शुरू होकर सायं 8 बजे तक चलता रहेगा। लाडनूं के प्राचीन परम्परागत व सांस्कृतिक मेलों में गणगौर व शीतला माता मेले दो ही हैं। दशहरा का मेला तो बहुत बाद में शुरू हुआ था। शीतला माता मेले को लेकर महिलाओं और बच्चों में खासा उत्साह रहता है।

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Author: kalamkala

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