जैविभा विश्वविद्यालय को आचार्य महाप्रज्ञ की विशेष खोज ‘अहिंसा प्रशिक्षण प्रणाली’ को पैटेंट मिला, जैविभा के पूर्ण अधिकार के बाद अब अन्य कोई संस्थान इसकी नकल नहीं कर सकेगा

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जैविभा विश्वविद्यालय को आचार्य महाप्रज्ञ की विशेष खोज ‘अहिंसा प्रशिक्षण प्रणाली’ को पैटेंट मिला,

जैविभा के पूर्ण अधिकार के बाद अब अन्य कोई संस्थान इसकी नकल नहीं कर सकेगा

जगदीश यायावर। लाडनूं।  विश्व भर में फैली हिंसा, युद्ध और तनाव के माहौल में जैन विश्वभारती संस्थान द्वारा आविष्कृत अहिंसक व्यवहार प्रशिक्षण प्रणाली को भारत सरकार के पैटेंट, डिजाईन एवं ट्रेड माक्र्स विभाग द्वारा पैटेंट प्रदान किया गया है। इस पैटेंट के मिलने के बाद कोई अन्य इस प्रणाली की नकल नहीं कर पाएगा। पेटेंट एक ऐसा कानूनी अधिकार है, जो किसी व्यक्ति या संस्था को किसी विशेष उत्पाद, खोज, डिजाईन, प्रक्रिया या सेवा के ऊपर एकाधिकार देता है। पेटेंट प्राप्त करने वाले व्यक्ति के अलावा यदि कोई और व्यक्ति या संस्था इनका उपयोग, बिना पेटेंट धारक की अनुमति के करता है तो ऐसा करना कानूनन अपराध माना जाता है। पेटेंट ऐसी बौद्धिक संपदा है, जो उसके मालिक को आविष्कार के सक्षम प्रकटीकरण को प्रकाशित करने के बदले में सीमित अवधि के लिए दूसरों को आविष्कार बनाने, उपयोग करने या बेचने से बाहर करने का कानूनी अधिकार देता है।
इस पैटेंट के लिए जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय, डा. लिपि जैन, डा. बलवीर सिंह, डा. रविन्द्र सिंह राठौड़ ने भारत सरकार के समक्ष आवेदन किया था। पैटेंट, डिजाईन एवं ट्रेडमार्क्स विभाग के कंट्रोलर जनरल ने इसे स्वीकार करते हुए बायो मेडिकल इंजीनियरिंग के अन्तर्गत ‘अहिंसक व्यवहार प्रशिक्षण प्रणाली’ को पैटेंट प्रदान किया है। गौरतलब है कि जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय ने अनुशास्ता आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा विकसित अहिंसा प्रशिक्षण की पूर्ण प्रणाली को पूर्वित रूप से अपनाया और उसे परिष्कृत किया, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को अहिंसा प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका। इस विश्वविद्यालय में अहिंसा एवं शांति विभाग पृथक् बना हुआ है, जिसमें स्नातकोत्तर उपाधि भी इस विषय में प्रदान की जाती है। इस विभाग के अन्तर्गत ही कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के मार्गदर्शन में अहिंसक व्यवहार सम्बंधी प्रशिक्षण की प्रणाली को पूर्ण परिष्कृत स्वरूप प्रदान किया गया। इस परिपूर्ण प्रणाली द्वारा व्यक्ति के व्यवहार में आमूलचूल परिवर्तन किया जाकर उसे अहिंसक विचारों से दूर करके पूर्ण अहिंसक बनाया जा सकता है।

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Author: kalamkala

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