जातिगत भेदभावों को तिलांजलि देकर ‘समरस भारत’ का निर्माण करें- मधुसूदन, लाडनूं के कमल चौक में हिंदू सम्मेलन का आयोजन कर किया एकता व समानता का आह्वान

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जातिगत भेदभावों को तिलांजलि देकर ‘समरस भारत’ का निर्माण करें- मधुसूदन,

लाडनूं के कमल चौक में हिंदू सम्मेलन का आयोजन कर किया एकता व समानता का आह्वान

 


लाडनूं (kalamkala.in)। यहां मालियों के बास में स्थित कमल चौक में हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति के तत्वावधान में हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। फतेहपुर के बालयोगी संत सूर्यनाथ के सान्निध्य में सम्पन्न इस सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघ चालक मधुसूदन थे। सम्मेलन से पूर्व बड़ी संख्या में महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। भाजपा महिला मोर्चा की वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष पार्षद सुमित्रा आर्य के नेतृत्व में यह कलश यात्रा बस स्टेंड स्थित खाखीजी की बगीची से शुरू होकर राहूगेट, दर्जियों की गली, मालियों का बास, शीतला माता मंदिर होते हुए सैनी अतिथि भवन मार्ग से कमल चौक पहुंची।

केवल फोटो खिंचवाने से गौसेवा नहीं होती

कमल चौक में आयोजित हिंदू सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए बालयोगी संत सूर्यनाथ महाराज ने कहा कि हिंदुओं को जातिगत भेदभाव मिटाना होगा। हम जिस दिन जातियों में बट गए, उसी दिन हिंदू टूट गए। उन्होंने सवाल उठाया कि भगवान शिव, विष्णु आदि की कोई जाति नहीं थी तो हम क्यों बटे हुए हैं। बालयोगी ने अपनी संस्कृति को बचाने और बच्चों को संस्कारित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि माताओं को इसका पूरा ध्यान रखना होगा। बच्चे माता-पिता, गुरुओं और बड़ों का आदर-सम्मान करें और पूजा-पाठ करें, ये संस्कार तो सबसे जरूरी है। उन्होंने बाहर के मंदिर और दर्शनीय स्थलों पर घूमने-भटकने के बजाय अपने घर के मंदिरों की सुध लेने और उनमें नियमबद्ध होकर पूजा करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने किसी गौशाला में जाकर फोटो खिंचवाने को गौसेवा मानने से इंकार करते हुए गौसेवा के नाम पर ढकोसला नहीं करके गाय के पालन पर भी जोर दिया। इस अवसर पर उन्होंने महाराणा प्रताप पर लिखा गया गीत ‘मायड़ थारो बो पूत कठै, बो महाराणा प्रताप कठै’ भी सुनाकर लोगों को प्रेरित किया।

संतों के आशीर्वाद से चलती है भारतीय संस्कृति 

आरएसएस के जिला संघचालक मधुसूदन ने अपने सम्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति संतों के आशीर्वाद है चलती है। उन्होंने इसे विश्व की सबसे अलबेली संस्कृति बताया और कहा कि जिसने भी हिन्दू संस्कृति को मान लिया, वह हिंदू हो जाता हैं। हिंदू संस्कारों व परम्पराओं के कारण हर हिन्दू में त्याग का भाव आता है, समाज, देश और ईश्वर के प्रति समर्पण के भाव पैदा होते हैं। उन्होंने भी भेदभाव मिटाने और समरस भारत बनाने पर जोर दिया तथा कहा कि हमें ऊंच-नीच, स्पृश्य-अस्पृश्य आदि समस्त भेदभाव को तिलांजलि देने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हमेशा बंद मुट्ठी ही ताकत होती है। उन्होंने कहा कि हमें हिन्दुत्व को जीना है और इसी के लिए इस हिंदू सम्मेलन में चिंतन करना है। मधुसूदन ने अपने बच्चों को घर-परिवार तक ही सीमित रखने के बजाय समाज व देश के लिए भु कुछ करने की भावना बच्चों में विकसित करने के लिए उपस्थित मातृशक्ति से अपील की और बच्चों को सुसंस्कारित करने पर जोर दिया। उन्होंने जीजा बाई और शिवाजी का उदाहरण भी दिया तथा जीवन सुधार के लिए विभिन्न ऐतिहासिक, धार्मिक और पारिवारिक किस्से सुनाते हुए प्रेरणा दी। उन्होंने घरों में सास-बहू के सम्बंधों और परस्पर व्यवहार के सुधार पर भी जोर दिया तथा कहा कि मातृशक्ति के बल पर ही घर-परिवार अविलम्बित है। इसके साथ ही मधुसूदन ने घरों में प्लास्टिक के प्रयोग को बंद करने और घर में कपड़े का थैला रखने पर बल दिया। साथ ही ओनलाइन खरीदारी और अपने पड़ौस के दुकानदार से वस्तु खरीदने का फर्क और लाभ बताए। उन्होंने संघ की शाखाओं में जाने के लिए बच्चों को प्रेरित करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति घरों में पैदा होती है। उसे खिलने, फूलने, फलने दें। संघ की शाखा में जाने से बच्चों में संस्कार, मान-सम्मान, घर-परिवार समाज में सक्रियता बढ़ती है।

बच्चों में संस्कार विकसित किए जाएं

सम्मेलन को भागचंद बालदीप ने भी सम्बोधित किया और बच्चों में संस्कार विकसित करने की आवश्यकता बताई। बालिका पार्वती सैनी यादव ने भी भगवान राम के भजन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के सूत्रधार सूर्य प्रकाश आर्य ने अपने संचालन के दौरान बताया कि यह हिन्दू सम्मेलन किसी के विरोध में नहीं, बल्कि अस्तित्व की रक्षा और राष्ट्र की उन्नति के लिए है। कार्यक्रम के अंत में विवेक यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन में बजरंग लाल यादव, सोहनलाल परिहार, हस्तीमल जांगिड़, नोरतन मल रैगर, गजानंद जांगिड़, डॉ. जगदीश यायावर, पार्षद सुमित्रा आर्य, पार्षद मंजू रैगर, भंवरलाल महावर, जसकरण गहलोत, विजय सिंह चौहान, गंगाराम रैगर, रामसिंह रैगर, पवन कुमार किला, विजय कुमार चौहान, मुरलीमनोहर टाक, सुनील कुमार चौहान, गुलाबचंद चौहान, नेमाराम भानावत, मानसिंह सांखला, सोहनलाल सांखला, अनोपचंद सांखला, तेजकरण सांखला, रामचन्द्र टाक, रामोतार टाक, जुगल किशोर गहलोत, विनोद चंद जादम, डालनाथ सिद्ध, हंसराज रैगर, विनोद चौहान आदि उपस्थित रहे।

kalamkala
Author: kalamkala

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