कलम कला- ध्यानाकर्षण :
पानी के लिए मची लाडनूं में भारी त्राहि-त्राहि-
दस-दस दिनों तक न पानी की सप्लाई है और न नजर आता है कहीं दूर-दूर तक कोई टैंकर, पेयजल संकट भीषण बन कर उभरा
लाडनूं (kalamkala.in)। पूरे लाडनूं शहर में पेयजल आपूर्ति नहीं किए जाने से आमजन में त्राहि-त्राहि मच गई है। एक-एक घड़े पीने के पानी के लिए लोग तरस गए हैं। जलदाय विभाग के पास पानी की कोई कमी नहीं है, नहर का पानी बंद रहे तो स्थानीय ट्यूबवैलों का पानी प्रचुर मात्रा में है, लेकिन जलदाय सम्बंधी अधिकारियों-कर्मचारियों को जनता की परवाह भी कहां है। सम्पन्न लोग पानी के टैंकर मंगवा लेते हैं। मीठे पानी का दुजार से आने वाला टैंकर 900 से 1000 रुपए प्रति टैंकर और खारे पानी का टैंकर 600 रुपए तक प्रति टैंकर ले रहे हैं। यह पानी पीना आम आदमी के बस का नहीं है। लाडनूं के हर क्षेत्र में चाहे वह राहूगेट क्षेत्र हो या मालियों का बास, हरिजन बस्ती हो या खटीक बस्ती, तेली रोड हो या स्टेशन रोड, पहली पट्टी हो या आठवीं पट्टी, शहरिया बास हो या जावा बास, माया नगरी हो या पारीकों का नया बास, बड़ा बास हो या मगरा बास, वीर तेजा कॉलोनी हो या सैनिक स्कूल के पीछे की बस्ती सबके हालात बदतर है। घरों में लगे जलदाय विभाग के नलों से दस-दस दिनों तक पानी की एक बूंद भी नहीं टपकती। दस दिनों के अंतराल से कुछ समय के लिए और कम दबाव से आने वाला पानी भी लोगों के लिए पर्याप्त नहीं रहता। दस-दस दिनों के लिए लोगों के घरों में पानी संग्रह करने की व्यवस्था भी नहीं रहती है। ऐसे में पानी को लेकर लोगों की आंखों में पानी आने लगा है।
लोगों को लगने लगा कि मंत्री के निर्देशों की जूं तक नहीं रेंगी
हाल ही में गैनाणा में रात्रि चौपाल कार्यक्रम में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री व जिला के प्रभारी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी आए और अधिकांशतः लोगों ने पेयजल की समस्या के मुद्दे उठाए। लाडनूं शहर की पेयजल समस्या को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश पारीक और भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष सुमित्रा आर्य ने शहर के हालात से अवगत करवाते हुए समय पर पानी की सप्लाई देकर राहत दिलाने की मांग उठाई थी। उन्होंने सबको आश्वस्त किया और अधिकारियों को निर्देश व चेतावनी दी कि कोताही बरतने पर उनकी छुट्टी कर दी जाएगी। लेकिन केबिनेट मंत्री की बात ‘आई-गई’ हो गई। संभव है उच्च अधिकारियों ने एक कान से सुना और दूसरे से निकाल दिया। किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। लगता है कागजों में की गई शिकायतों का निस्तारण कागजों तक ही सीमित रहेगा। धरातल पर कोई काम नहीं होना। राहत नहीं मिलने से लोगों को कुछ ऐसा ही प्रतीत होने लगा है।
जलदाय प्रशासन का कहना है- सात दिन और बनी रहेगी समस्या
नहरबंदी का अंतिम चरण चल रहा है। आवश्यकता के अनुरूप नहरी जल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। आगामी सात दिवस तक जिले में नहरबंदी के प्रभाव के कारण पेयजल आवक में कमी रहने की संभावना है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता सुनील मानवताल के अनुसार नहरबंदी को ध्यान में रखते हुए जलदाय विभाग के सभी अभियन्ताओं द्वारा पेयजल वितरण की पूर्ण रूप से अलर्ट मोड पर निगरानी की जा रही है। स्थानीय भूजल स्रोतों हैंडपंप व ट्यूबवेल को तुरंत प्रभाव से दुरुस्त किया जा रहा है। विभाग की ओर से जिले के सभी नागरिकों को समुचित जल भंडारण व्यवस्था रखने तथा उपलब्ध पेयजल को मितव्ययिता से उपयोग किए जाने की अपील की गई है।
ली जा रही है हेंडपंपों और नलकूपों की सुध, भेजे जा रहे हैं टैंकर
सुपरिटेंडेंट इंजीनियर ने बताया कि हाल के दो माह में कुल 137 हैंडपंप की मरम्मत की जा चुकी है। समस्याग्रस्त क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार 4 शहरों में लगभग 93 टैंकर ट्रिप्स द्वारा तथा 164 ग्रामों व 195 ढाणी में लगभग 407 टैंकर ट्रिप्स द्वारा पेयजल परिवहन किया जा रहा है।
यहां करें पानी की शिकायत
साथ ही पेयजल संबन्धित शिकायतों के त्वरित समाधान हेतु जिला स्तर पर कन्ट्रोल रूम कार्यरत है, जिसके दूरभाष नंबर 01580-220045 पर आमजन सम्पर्क कर सकते हैं।
इनका कहना है-
नहर बंदी के कारण पानी बिलकुल ही नहीं आ रहा है। यहां जो पुराने ट्यूबवेल थे, उनका पानी अब बहुत नीचे चला गया और बंद ही है। समस्या वाले क्षेत्रों में लोगों को टैंकरों से पानी भिजवाया जा रहा है। समस्या ध्यान में है और शीघ्र समाधान हो जाएगा।
– हेमराज सैनी, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, लाडनूं।
लोगों का कहना है
आज दस दिन हो गये, पानी नहीं आया। – द्वारका प्रसाद शर्मा, राहूगेट, लाडनूं।
हमारे वार्ड नंबर 21 में पानी की समस्या पिछले 2 महीने से 5-6 घरों मे पानी नहीं आ रहा है। सब जगह शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। पेयजल के लिए कैंपर और टैंकर डलवाए जा रहे हैं।
– सुरेश पारीक, गली नंबर 11, पारीकों का नया बास, लाडनूं।
खटीक बस्ती, मालियों का बास में पिछले नौ दिनों से पानी नहीं आ रहा है। लोग बेहद त्रस्त हैं। लाडनूं शहर में लगाए गए हेंडपंप तो पूरे ही गायब हो चुके हैं, उनकी सुध किसी ने नहीं ली।
– सुमित्रा आर्य पार्षद, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा महिला मोर्चा।
पानी की लाडनूं में विकट समस्या है। दस से बारह दिनों तक पानी नहीं आना लोगों के लिए बहुत ही परेशानीदायक है। यहां भार्गवों की बस्ती में पानी पहुंच ही नहीं पाता और विभाग कोई टैंकर भी नहीं डाले जा रहे है। इस समस्या को लेकर उन्होंने जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी को 21 पेज का ज्ञापन दिया था। मंत्री और अधिकारियों ने समस्या के निस्तारण का भरोसा दिलाया था, मगर अभी तक कुछ नहीं हो पाया।
– जगदीश पारीक, जिला उपाध्यक्ष भाजपा।
कलम कला सुझाव- पानी की समस्या से करें मुकाबला
- जल संरक्षण (Rainwater Harvesting): छतों पर बारिश का पानी इकट्ठा करने के लिए टांके और टैंकों का निर्माण करें।
- जल का पुनः उपयोग (Greywater Recycling): आरओ (RO) रिजेक्ट पानी, बर्तन धोने और कपड़े धोने के पानी का उपयोग पौधों में, पोछा लगाने और शौचालय में करें।
- बर्बादी रोकें: नलों में वाल्व या एरेटर (Aerator) लगाकर पानी के बहाव को कम करें। टपकते नलों और पाइपलाइनों की तुरंत मरम्मत करवाएं।
- ब्रश करते समय या दाढ़ी बनाते समय नल को बंद रखें।
- वाहनों को पाइप से धोने के बजाय बाल्टी और मग का उपयोग करें।
- पौधों में सुबह या शाम के समय पानी दें, ताकि वाष्पीकरण कम हो और पानी की बचत हो। [






