सुप्रसिद्ध मांड गायिका ‘पद्मश्री बतूल बानो रोडू’ का सम्मान करने उसके पीहर केराप के लोग उमड़े, किया अभूतपूर्व स्वागत, 4 महाद्वीपों में सम्मान प्राप्त बतूल बानो उर्फ अजू बाई ने 29 देशों में फहराया भारतीय संस्कृति का परचम

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सुप्रसिद्ध मांड गायिका ‘पद्मश्री बतूल बानो रोडू’ का सम्मान करने उसके पीहर केराप के लोग उमड़े, किया अभूतपूर्व स्वागत,

4 महाद्वीपों में सम्मान प्राप्त बतूल बानो उर्फ अजू बाई ने 29 देशों में फहराया भारतीय संस्कृति का परचम

शकील अहमद उस्मानी, जर्नलिस्ट। डीडवाना (kalamkala.in)। तहसील के केराप गांव में आयोजित स्वागत समारोह से गांव के हर आंगन को गर्व की अनुभूति हुई तथा पूरा गांव खुशी और भावनाओं के ज्वार से सराबोर हो गया। इस समारोह में केराप गांव की बेटी पद्मश्री एवं नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित सुप्रसिद्ध मांड गायिका बतूल बेगम उर्फ अजू बाई का भव्य स्वागत किया गया। एक सामान्य परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त करने वाली बतूल बेगम का स्वागत करते समय कई आंखें खुशी से नम थीं और हर चेहरा गर्व से दमक रहा था। बैंड-बाजों की मधुर धुनों के बीच स्वागत रैली निकाली गई, जिससे पूरा गांव एक उत्सव में बदल दिया। इसके बाद ठाकुर जी के मंदिर के सामने आयोजित समारोह स्थल पर जब बतूल बेगम पहुंचीं, तो ग्रामवासियों ने पुष्पवर्षा, तालियों और जयघोष के साथ अपनी लाडली बेटी का अभिनंदन किया। यह दृश्य हर उस बेटी के सपनों का प्रतीक था,जो सीमित संसाधनों के बावजूद ऊंचाइयों तक पहुंचने का हौसला रखती है।

लाडनूं के रोडू गांव के फिरोज खां की पत्नी है बतूल बेगम

पद्मश्री सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि बतूल बेगम के संघर्ष, साधना और कला के प्रति समर्पण की पहचान है। चार महाद्वीपों में सम्मान प्राप्त करने वाली पहली राजस्थानी महिला बनने के साथ ही उन्होंने 29 देशों में भारत और राजस्थान की संस्कृति का परचम लहराया है। अनेक भारतीय दूतावासों में उनकी प्रस्तुतियों ने देश का मान विश्व पटल पर बढ़ाया है। बतूल बेगम के पति लाडनूं तहसील के रोड़ू गांव के मूल निवासी फिरोज खान हैं, जो राजस्थान राज्य हज कमेटी के चेयरमैन रह चुके। उनका परिवार भी इस गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बना। उनके दो पुत्र फ्रांस में इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में कार्यरत हैं, जबकि एक पुत्र सनवर बैंक ऑफ बड़ौदा, जयपुर में मैनेजर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

गांव की मिट्टी से मिला सम्मान सबसे बड़ा पुरस्कार

समारोह के अंत में बतूल बेगम ने भावुक होते हुए कहा कि पद्मश्री सम्मान के बाद अपने गांव की मिट्टी से मिला यह प्रेम उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। आयोजकों और ग्रामवासियों ने एक स्वर में कहा कि केराप की यह बेटी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनाने के लिए सभी ग्रामवासियों का तहेदिल से आभार व्यक्त किया गया।

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Author: kalamkala

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