राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर उठाए सवाल, शिक्षकों की समस्याओं को लेकर आंदोलन की चेतावनी, राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) ने सौंपा 12 सूत्रीय ज्ञापन

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर उठाए सवाल, शिक्षकों की समस्याओं को लेकर आंदोलन की चेतावनी,

राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) ने सौंपा 12 सूत्रीय ज्ञापन

लाडनूं (kalamkala.in)। राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) की उपशाखा लाडनूं के अध्यक्ष नानू राम गोदारा एवं महामंत्री सोहन राम डूकिया के नेतृत्व में शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन यहां मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को सौंप कर संगठन का मांगपत्र प्रस्तुत करते हुए सभी के निस्तारण की मांग करते हुए बताया है कि लम्बे अंतराल से शिक्षकों की मांगों को सरकार द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में असंतोष और आक्रोश है। नये सत्र में शिक्षकों की वाजिब मांगों का समाधान कर शैक्षिक ढांचे को मजबूत करने के लिए संगठन मांग करता है। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि अन्यथा संगठन बड़ा और व्यापक आन्दोलन करने के लिये बाध्य होगा। ज्ञापन की प्रति शिक्षा सचिव को भी भेजी गई है। ज्ञापन देने वालों में ब्लॉक अध्यक्ष नानूराम गोदारा, ब्लॉक मंत्री सोहनराम डूकिया, जिला सभाध्यक्ष सहदेव मंडा, संगठन मंत्री कन्हैया लाल खिलेरी, भागीरथ डूडी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष द्वारका प्रसाद स्वामी, हनुमान राम घिंटाला, रमेश पोटलियां, हीराराम चोयल, आशा चौधरी, कविता चौधरी, रामेश्वर पूनिया आदि शामिल रहे।

ये रही ज्ञापन व मांगपत्र की महत्वपूर्ण मांगे

ज्ञापन के साथ दिए गए 12 सूत्रीय मांग पत्र की प्रमुख मांगों में अध्यापकों (तृ.वे.श्रृं) के स्थानांतरण की प्रक्रिया अविलंब शुरू की जाएं। शिक्षकों के लिए पारदर्शी एवं स्थाई स्थानांतरण नीति लागू कर भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जावे, डिजायर व्यवस्था समाप्त की जाए और प्रतिबंधित जिलों की अवधारणा समाप्त की जाये। शिक्षकों के सभी संवर्गों की बकाया पदोन्नति शीघ्रातिशीघ्र की जाये। सभी नवसृजित पदों की वित्तीय स्वीकृति जारी कर पदोन्नति के पदों की गणना की जाये। प्रबोधकों की शिक्षकों के समान नियमित DPC की जावे। प्रथम नियुक्ति तिथि के आधार पर क्रमिक पदोन्नति दी जाए। कला, वाणिज्य तथा कृषि विज्ञान के शिक्षकों की पदोन्नति की समीक्षा कर उनके साथ न्याय किया जावे। पातेय वेतन (2010) के शिक्षकों की वाजिब माँग का निस्तारण किया जाये। हर स्तर पर रोस्टर रजिस्टर का संधारण कर पालना सुनिश्चित की जावे। प्रत्येक शिक्षक को सेवाकाल में न्यूनतम दो पदोन्नतियों का लाभ सुनिश्चित किया जावे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू नहीं किया जाए

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की समीक्षा की जाये और प्रदेश में इसे लागू नहीं किया जावे। समस्त हित साधकों से विमर्श कर सार्वजनिक शिक्षा को सुदृढ करने वाली शिक्षा नीति तैयार की जावे, शिक्षा के बाजारीकरण एवं निजीकरण पर रोक लगाई जाये। गैर शैक्षिक कार्यों से शिक्षकों को पूर्णतः मुक्त किया जाये। सभी प्रकार के ऑनलाइन कार्य एवं ऑनलाइन प्रशिक्षण बंद किये जाएं। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षक/ अनुदेशक के पद सृजित कर सभी पदों को भरा जावे तथा कंप्यूटर अनुदेशक के पदनाम को कम्प्यूटर शिक्षक किया जावे। राजस्थान में लागू पुरानी पेंशन योजना के साथ तनिक भी छेड़छाड़ नहीं की जाए और पीएफआरडीए के पास राज्य के कर्मचारियों की जमा 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि वापस ली जाए।

रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, नवीन पद सृजित हों

विभाग में शिक्षकों के एक लाख रिक्त पदों पर स्थाई भर्ती प्रक्रिया अविलंब शुरू की जाये। समस्त उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या के प्रतिबंध को समाप्त कर शारीरिक शिक्षक के पद सृजित किया जाए। संविदा भतीं बन्द कर नियमित वेतनमान पर नियुक्ति दी जाए। प्रारंभिक शिक्षा के समस्त विद्यालयों में लिपिक तथा सहायक कर्मचारी के पद सृजित किए जाए। पीडी मद का बजट एकमुश्त जारी किया जावे तथा आहरण वितरण का अधिकार पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (MEO) को दिया जाये, पंचायतीराज शिक्षकों के स्थायीकरण के अधिकार जिला शिक्षा अधिकारी (प्रा. शि. मुख्यालय) को दिए जायें।समस्त उ.मा. विद्यालयों में हिंदी व अंग्रेजी (अनिवार्य) व्याख्याता के पद सृजित किये जावें।

सभी आवंटित पदों की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हो

विद्यालय क्रमोन्नति के साथ ही आबंटित सभी पदों की वितीय स्वीकृति जारी की जावे। सैटअप परिवर्तन को वैकल्पिक किया जाये। सन् 2007 के बाद नियुक्त अध्यापकों (तृ.वे. श्रृ.) की वेतन विसंगति दूर की जाये तथा प्रयोगशाला सहायकों को 1997 से अध्यापक पद पर मानते हुए समरत परिलाभ दिए जावें। न्यायालय के फैसलों को लागू करते हुए नोशनल परिलाभ सहित अन्य प्रकरणों का अविलम्ब निस्तारण किया जाये। शिक्षकों को 7, 14, 21, 28 तथा 32 वर्ष पर चयनित वेतनमान दिया जाये। फिक्स वेतन के स्थान पर नियुक्ति तिथि से नियमित वेतनमान का लाभ दिया जाये। समस्त कार्मिकों को नगदी रहित (Cashless) चिकित्सा सुविधा दी जाये और RGHS के नाम पर कटौती बंद की जाए।व्याख्याता की पदोन्नति प्रधानाचार्य पद पर की जाये, नवसृजित होने वाले वरिष्ठ व्याख्याता के 50 प्रतिशत पद विभागीय सीधी भर्ती से भरे जायें।

मानदेय व छात्रवृत्ति बढ़ाई जाए

मिड डे मिल, ट्रांसपोर्ट बाउचर और छात्रवृति की राशि में वृद्धि की जावे और इन समस्त सुविधाओं का मासिक भुगतान किया जाये। मिड डे मील कर्मियों सहित समस्त संविदा कार्मिको को न्यूनतम ₹26000/- मासिक मेहनताना दिया जाये। स्पोर्ट्स किट, पुस्तकालय की पुस्तकों तथा RKSMB (शिक्षा के बढ़ते कदम) में किये गये भुगतान की जाँच करवाई जाए। बच्चों की सुरक्षा एवं शैक्षिक ढाँचे की मजबूती के लिए अच्छे भवन का निर्माण करवाया जावे तथा मरम्मत के लिए प्रस्ताव के साथ ही बजट जारी किया जाये।

kalamkala
Author: kalamkala

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