वर्तमान की अनेक समस्याओं के समाधान निहित है आचार्य महाप्रज्ञ के साहित्य में- प्रो. जैन,
आचार्य महाप्रज्ञ का 107वां जन्मदिन मनाया

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग में शनिवार को आचार्य महाप्रज्ञ का 107वां जन्म दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने आचार्यश्री महाप्रज्ञ का परिचय देते हुए बताया कि उनके जीवन का महत्त्वपूर्ण आयाम ज्ञान की आराधना करना और उसकी निष्पति के साथ सैंकड़ों की संख्या में साहित्य का सृजन करना रहा। उनका जीवन विविधताओं का संगम था, उनके विचारों में उच्चता, गंभीरता और मौलिकता का समन्वय था। उनकी प्रेरणा, शिक्षाप्रद विचार, प्रेक्षाध्यान, श्रेष्ठ साहित्य, व्यक्तित्व एवं कृतित्व आज भी लाखों जनों के लिए प्रेरणादायी और पथप्रदर्शक बना हुआ है। उनका साहित्य वर्तमान की अनेक समस्याओं के समाधान में महनीय योगदान प्रदान कर रहा है। प्रो. जैन ने कार्यक्रम में मौजूद सभी शिक्षकों एवं छात्राध्यापिकाओं को बताया कि सबको प्रतिदिन उनके साहित्य का स्वाध्याय करना चाहिए, जिससे जीवन की अनेक समस्याओं से निजात पाई जा सकती है। प्रो. जैन ने बताया कि जैनधर्म दर्शन के वे शीर्षस्थ विद्वान थे। उन्होंने गम्भीर और नीरस विषय को भी सरस एवं बोधगम्य बनाया। वै अनेकांत के विज्ञाता, प्रयोक्ता और प्रवक्ता थे। वे सम्प्रदाय से सम्बद्ध होने के बावजूद एक मुक्त चेतना के धनी थे। किसी से भी वे कभी बंधे हुए नहीं होकर पूर्ण स्वतंत्र चेतना के स्वरूप थे। उन्होंने वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए आध्यात्मिक मार्ग प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. अमिता जैन, डॉ. आभा सिंह, डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. विष्णु कुमार, डॉ. गिरिराज भोजक, डॉ. गिरधारी लाल शर्मा, डॉ. देवी लाल कुमावत शिक्षा विभाग की बी.एड, बी.ए.-बी.एड एवं बी.एस.सी-बी.एड की छात्राध्यपिकाएं उपस्थित रहीं।







