विद्यार्थी सत्य, अनुशासन, नैतिक मूल्यों का अनुगमन करें- आचार्य श्री महाश्रमण,
महाप्रज्ञ प्रोग्रेसिव स्कूल का आचार्य श्री महाश्रमण ने किया अवलोकन


लाडनूं (kalamkala.in)। महाप्रज्ञ प्रोग्रेसिव स्कूल में आचार्यश्री महाश्रमण ने विद्यार्थियों को सत्य, अनुशासन और नैतिक मूल्यों पर चलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि आध्यात्मिक वातावरण के साथ प्राप्त शिक्षा जीवन को सार्थक बनाती है। आचार्यश्री महाश्रमण के आगमन से विद्यालय परिवार में श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। महाश्रमण ने विद्यालय का भ्रमण किया और अपने अवलोकन के दौरान उन्होंने विद्यालय की कंप्यूटर लैब, स्मार्ट पैनल युक्त कक्षाओं, कॉन्फ्रेंस रूम, पुस्तकालय, एनसीसी कक्ष, किंडरगार्टन, कॉम्पोजिट लैब, छात्रावास और स्पोर्ट्स एरीना का निरीक्षण किया। विद्यार्थियों ने उन्हें पूर्ण आत्मविश्वास के साथ प्रत्येक विभाग का परिचय प्रस्तुत किया। ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में ‘जर्नी फ्रॉम स्कूल टू स्कूल’ विषय पर शिक्षिका आयशा आरा की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही। प्रधानाचार्या ने विद्यालय की प्रगति, शैक्षणिक उपलब्धियों, दोनों विंग्स के विकास, छात्रावास के नवीनीकरण और आधुनिक सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कमल सिंह बैद और डॉ. रत्ना बैद के विशेष सहयोग से विद्यालय का भौतिक विकास सुदृढ़ हुआ है तथा अधोसंरचना को नई दिशा मिली है।विद्यालय को सही दिशा देने में मुनिश्री कीर्ति कुमार का सतत् मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है। साथ ही जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लुंकड, मुख्य न्यासी जयंतीलाल सुराणा, मंत्री सलिल लोढ़ा सहित अन्य पदाधिकारियों के मार्गदर्शन का भी उल्लेख भी विद्यालय विकास के लिए किया गया। उन्होंने बताया कि धरमचंद लुंकड, गौरव मांडोत और प्रवीण बरड़िया के सहयोग से विद्यालय की विकास यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है। कार्यक्रम में चित्रा बैद ने विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया।विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय मोड़ मिला। प्रारंभ में स्वागत गीत और स्वागत भाषण भी प्रभावी रहे। ऑडिटोरियम में कार्यक्रम का शुभारंभ णमोकार मंत्र और अर्हम वंदना से हुआ। आचार्य श्रु महाश्रमण के आगमन पर विद्यालय के मुख्यद्वार पर एनसीसी कैडेट्स, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर समाजसेवी भागचंद बरडिया, प्रमोद बैद, जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दुगड़, राजेंद्र खटेड़ आदि प्रमुखजनों की उपस्थिति भी रही। मंगल पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।






