शिक्षक सदैव सीखता है, पढ़ता है और विभिन्न कौशल में पारंगत होना चाहिए- कुलगुरु प्रो. रामसेवक दुबे, जसवंतगढ़ में सुप्रीम फाउंडेशन के शिक्षकों के लिए सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ

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शिक्षक सदैव सीखता है, पढ़ता है और विभिन्न कौशल में पारंगत होना चाहिए- कुलगुरु प्रो. रामसेवक दुबे,

जसवंतगढ़ में सुप्रीम फाउंडेशन के शिक्षकों के लिए सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ

लाडनूं (kalamkala.in)। स्थानीय सेठ श्री सूरजमल तापड़िया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में राजकीय विद्यालयों में कार्यरत सुप्रीम फाउंडेशन के शिक्षकों का सप्त दिवसीय सघन प्रशिक्षण शिविर आरंभ किया गया। प्रशिक्षण शिविर में जगत्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर के कुलगुरु प्रो. रामसेवक दुबे ने सरकारी विद्यालयों एवं विश्वविद्यालय की तर्ज पर सुप्रीम फाउंडेशन के अध्यापकों का सघन प्रशिक्षण एक सराहनीय पहल बताई और बताया कि अध्यापक निरंतर सीखता रहता है, निरंतर पढ़ता रहता है। एक अच्छे अध्यापक के लिए आवश्यक है कि वह विभिन्न प्रकार के कौशलों को जानें। सुप्रीम फाउंडेशन के मुख्य समन्वयक श्याम बाबू शर्मा ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि शिविर में सभी अध्यापकों को चार वर्गों में विभक्त कर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण की उपयोगिता इससे सिद्ध होती है कि प्रशिक्षित अध्यापक विद्यालयों में जाकर नवाचार करते हुए पाठ्यक्रम को पूरा करते हैं। परीक्षा परिणाम जब आता है तो वह उत्कृष्ट आता है, यही इस प्रशिक्षण की सार्थकता है।

तापड़िया परिवार का शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य

कार्यक्रम में सेठ श्री सूरजमल तापड़िया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय जसवंतगढ़ के प्राचार्य डॉ. हेमंत कृष्ण मिश्र ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए बताया कि शिविर में प्रदेश भर से कोने-कोने से आए अध्यापकों का प्रशिक्षण हो रहा है। इस प्रशिक्षण में अनुशासन एवं पाठ्यक्रमों का गहनता से प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिरला एजुकेशन ट्रस्ट पिलानी के उपनिदेशक केके पारीक ने बताया कि तापड़िया परिवार द्वारा शिक्षा के उन्नयन हेतु जो प्रकल्प है, वह सराहनीय है। इस प्रकार के प्रकल्प इस भौतिकवादी युग में बहुत कम देखने को मिलते हैं। तापड़िया परिवार के ऊपर निश्चित रूप से ईश्वरीय कृपा है। उसी के बल पर शिक्षा जैसे उत्कृष्ट कार्य को गति देने का काम तापड़िया परिवार कर रहा है। इस अंचल में शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का वपन भी इस परिवार के द्वारा किया जा रहा है। मैं तापड़िया परिवार को बचपन से जानता हूं‌। बचपन से ही तापड़िया परिवार शिक्षा एवं संस्कार के लिए काम करता रहा है। कार्यक्रम के अंत में कोऑर्डिनेटर दिलीप सिंह चौहान ने आभार ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. चंद्रशेखर ने किया।

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Author: kalamkala

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