राजस्थान में शांति एवं अहिंसा विभाग के गठन को मिली राज्यपाल से मंजूरी,
राज्य केबिनेट में शांति एवं अहिंसा निदेशालय को विभाग बनाने का लिया गया था प्रस्ताव

शांति और अहिंसा, साम्प्रदायिक एकता, सामाजिक समानता, सार्वभौमिक भाईचारा, अस्पृश्यता, सामाजिक सुधार से संबंधित कार्यों की होगी क्रियान्विति
जयपुर (देवेंद्र प्रताप सिंह/युवराज)। प्रदेशवासियों को शांति एवं अहिंसा विभाग के रूप में महात्मा गांधी जयंती पर सौगात मिली है। देश में पहली बार राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार ने शांति और अहिंसा विभाग बनाया है। यह विभाग कला एवं संस्कृति मंत्रालय के तहत काम करेगा। यह विभाग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के संदेश को निचले स्तर तक पहुंचाने और सत्य एवं अहिंसा का पाठ पढ़ाने का काम करेगा।मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा निदेशालय को विभाग बनाने की घोषणा के बाद राज्य केबिनेट में लिए गए प्रस्ताव को राज्यपाल कलराज मिश्र ने मंजूरी प्रदान कर दी है।
विभाग में रहेगा इन कार्यों का जिम्मा

विभाग के जरिए शांति और अहिंसा के विचारों का प्रचार-प्रसार, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, विभिन्न महापुरूषों, वीर शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों, शांति और सद्भाव, सामाजिक एकता से संबंधित विभिन्न प्रदर्शनियों, प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन कायक्रमों के आयोजन के लिए समग्र योजना तैयार कर वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, विभाग द्वारा महात्मा गांधी के विचारों एवं सिद्धातों पर आधारित शांति और अहिंसा, साम्प्रदायिक एकता, सामाजिक समानता, सार्वभौमिक भाईचारा, अस्पृश्यता, सामाजिक सुधार से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर उनके क्रियान्वयन के लिए उचित क दम उठाए जाएंगे। विभाग द्वारा गांधी सद्भावना सम्मान जैसे विभिन्न पुरस्कारों के लिए प्राप्त प्रस्तावों के लिए समिति का गठन भी किया जाएगा।
अधिक जरूरी बन चुका है गांधी का जीवन दर्शन
इस बारे में मुख्यमंत्री अशेाक गहलोत ने महात्मा गांधी शांति एवं अहिंसा निदेशालय को एक विभाग के रूप में स्थापित करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि वर्तमान में महात्मा गांधी के सिद्धांत, आदर्श एवं दर्शन की पहले से ज्यादा आवश्यकता है। गांधीजी के जीवन दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस विभाग की स्थापना की गई है।







