डीडवाना में किसानों का महापड़ाव 17वें दिन भी रहा जारी, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन,
किसानों ने मनाया संविधान दिवस, नए लेबर कोड की प्रतियां जलाई और बताया किसान-मजदूर विरोधी


शकील अहमद उस्मानी, जर्नलिस्ट। डीडवाना (kalamkala.in)। कलेक्ट्रेट के सामने जारी किसान महापड़ाव ने शुक्रवार को 17वें दिन संविधान दिवस के साथ सरकार की नीतियों के खिलाफ व्यापक विरोध दर्ज कराया। किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांगें माने बिना आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कस्टोडियन भूमि के सरकारी आवंटन रद्द किए जाने और किसानों से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया। इसी दौरान किसान संघर्ष समिति ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन उपखण्ड अधिकारी डीडवाना को सौंपा। ज्ञापन में किसान आंदोलन के दौरान सरकार द्वारा किए गए लिखित समझौतों को लागू करने और किसान वर्ग को राहत देने की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही।
नए लेबर कोड का किया विरोध, जलाई प्रतियां
इन किसानों ने किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए 753 किसानों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके बलिदान को संघर्ष की प्रेरणा बताया। सभा में किसानों ने भारतीय संविधान की मूल भावना, नागरिक अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतंत्र में जनता की भूमिका पर चर्चा की। इसी क्रम में ट्रेड यूनियनों के देशव्यापी आह्वान पर नए लेबर कोड का विरोध करते हुए उसकी प्रतियां जलाई गईं, इसे किसान-मजदूर विरोधी करार दिया। महापड़ाव में उपस्थित किसानों ने संविधान की रक्षा और राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाने का संकल्प भी दोहराया। संविधान दिवस कार्यक्रम में संयोजक भागीरथ यादव, मोतीलाल शर्मा देवली, हेमाराम रुलानिया, देशवाली समाज अध्यक्ष अब्दुल सलाम गहलोत, अब्दुल रजाक फौजी, शाकिर पंवार, हनीफ गहलोत, शकील अहमद गरदेजी, सवालीन, अब्दुल रहीम पड़िहार, युनुस खींची, अब्दुल हमीद कुरैशी, रामनिवास शर्मा, मनोज स्वामी, विजेंद्र भाकर, ज़ाकिर सिसोदिया, इस्माईल आदि सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।






