बोलेरो के अंदर जले जेठाराम के मामले में घूम गई जांच की सुई, पुलिस की हुई चूक- ग्रामीण रहे अचूक, घटनास्थल पर मिले तीन साक्ष्यों ने प्रकरण की दिशा बदली, जिसे हादसा माना जा रहा था, उसके हत्या होने की संभावना बढ़ी

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बोलेरो के अंदर जले जेठाराम के मामले में घूम गई जांच की सुई,

पुलिस की हुई चूक- ग्रामीण रहे अचूक, घटनास्थल पर मिले तीन साक्ष्यों ने प्रकरण की दिशा बदली, जिसे हादसा माना जा रहा था, उसके हत्या होने की संभावना बढ़ी

लाडनूं (kalamkala.in)। तहसील के ग्राम सींवा व रताऊ गांवों के बीच जली हुई बोलेरो और जला हुआ चालक का शव मिलने के मामले में दर्ज हत्या के मामले में पुलिस के हाथ कोई सबूत नहीं लगने से इसे हादसा माना जाकर ही जांच आगे बढ़ाई जा रही थी, जिसे परिजन स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। अब कुछ विशेष सबूत लोगों के हत्थे चढ़े हैं, जिससे पूरे मामले की दिशा बदलने के आसार हैं। यह अचरज की बात है कि घटनास्थल पर पहुंची पुलिस और एफ.एस.एल. टीम तक के हाथ कोई तथ्य या सबूत नहीं लग पाए, जबकि वे वहीं पर मौजूद थे। 15 दिन बाद जो साक्ष्य यहां मिले हैं, वे महत्वपूर्ण कड़ी बताए जा रहे हैं। बोलेरो चालक जेठाराम की अंतिम क्रिया के पश्चात होने वाली 12 दिनों की रस्म पूरी होने के बाद परिजनों ने घटनास्थल पर पहुंच कर फिर से वहां की स्थिति को देखा, तो पुलिस के मौका निरीक्षण में चूकी गई वस्तुएं उन्हें मिली। उन लोगों को घटनास्थल से कुछ दूरी पर ही जेठाराम की पहनी हुई दोनों जूतियां मिलीं, गाड़ी की डीजल टंकी का ढक्कन तथा टूटी हुई लाइट भी वहां मिलीं। परिजनों ने जूतियों की भलीभांति पहचान कर ली। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठे हो गए और पुलिस जांच के प्रति असंतोष और रोष प्रकट किया। इसकी सूचना पुलिस को दी गई और मौके पर बुलाया जाकर वहां से प्राप्त सभी वस्तुएं बताई। पुलिस ने एफ.एस.एल. टीम को वापस बुला कर घटनास्थल का अवलोकन करवाया और सभी वस्तुओं को कब्जे में लिया गया।

पुलिस की भूमिका पर ग्रामीणों ने उठाई अंगुलियां, सबूतों ने बदली जांच की दिशा

इन वस्तुओं को पुलिस द्वारा साक्ष्य के तौर पर नहीं लेकर इस घटना को सुनियोजित हत्या के बजाय हादसा मानने को लेकर चलने और ऐसे महत्वपूर्ण सबूतों की उपेक्षा करने को लेकर ग्रामीणों में फिर आक्रोश बढ़ गया। परिजनों का कहना है कि यहां जूतियां जेठाराम की ही हैं, जिसकी पुष्टि उनके बड़े भाई व पत्नी ने भी की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने 15 दिन में न तो इन सबूतों को गंभीरता से लिया और न ही जांच को आगे बढ़ाने का कोई ठोस प्रयास किया। सोमवार को ग्रामीणों ने पुलिस उप अधीक्षक जितेंद्रसिंह चारण तथा निंबी जोधा थाना अधिकारी प्रजापत से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम का खुलासा करने की मांग की थी, लेकिन वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। देर शाम तक ग्रामीण इन तीनों संदिग्ध सबूतों के साथ घटनास्थल पर डटे रहे और निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जेठाराम की गाड़ी में अपने आप आग लगी, तो जूतियां अलग जगह कैसे मिली और डीजल टंकी का ढक्कन बाहर कैसे आया। ऐसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब पुलिस अभी तक नहीं दे पाई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मामले की निष्पक्ष व गहन जांच कर सच्चाई सामने नहीं लाई गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। फिलहाल पूरा गांव न्याय की आस लगाए बैठा है और इस रहस्यमयी मौत से पर्दा उठाने को इच्छुक हैं। यहां मौके पर रामनिवास बिडियासर, सुखपाल बिडियासर, भूराराम खोजा, श्रीकृष्ण कासनियां, रामदेव बिडियासर, हनुमान खोजा आदि उपस्थित रहे।

परिजन और ग्रामीण शुरू से ही इसे हत्या मान रहे हैं

ज्ञातव्य है कि क्षेत्र की ग्राम पंचायत रताऊ निवासी जेठाराम बिड़ियासर (45) पुत्र लिछूराम जाट की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत करीब 15 दिन पूर्व हुई थी। 30 दिसंबर की शाम जेठाराम डीडवाना से सींवा होते हुए अपनी बोलेरो गाड़ी से रताऊ गांव लौट रहा था, तब शाम करीब 7.30 बजे अचानक गाड़ी आग की लपटों में घिर गई। कुछ ही मिनटों में बोलेरो पूरी तरह जल गई। इस घटना में जेठाराम के हाथ-पैर बुरी तरह झुलस गए, जबकि शरीर का मध्य हिस्सा अधिकांश रूप से जला हुआ पाया गया। सूचना पर ग्रामीण व पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचे और मृतक के अवशेषों को लाडनूं के राजकीय अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। परिजनों ने शुरुआत से ही घटना को हत्या बताते हुए शव लेने से इनकार कर दिया था। करीब 24 घंटे तक चले विरोध के बाद काफी समझाइश के उपरांत अगले दिन पोस्टमार्टम के लिए सहमति बनी। बावजूद इसके, आज तक पुलिस जांच किसी निर्णायक नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। इस मामले में जांच अधिकारी सिद्धार्थ प्रजापत ने प्रारंभिक जांच के आधार पर गाड़ी में वायर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि बोलेरो पुरानी गाड़ी थी, संभव है तकनीकी खराबी के कारण यह हादसा हुआ हो।

बहुत सवाल है, जो नए सिरे से हो रही पुलिस जांच में होंगे हल

पुलिस का यह तर्क ग्रामीणों और परिजनों के गले नहीं उतर रहा है। उनका सवाल है कि यदि शॉर्ट सर्किट से आग लगी, तो 15 मिनट में गाड़ी कैसे जल सकती है और आग इतनी तेजी से कैसे फैली? ग्रामीणों का आरोप है कि आग लगाने में किसी केमिकल का इस्तेमाल किया गया हो सकता है, जिसकी पुष्टि एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस अब फिर से जांच को आगे बढ़ाने में जुटी है। पुलिस को इस जांच को अब नए सिरे से और नये एंगिल से करनी पड़ रही है।

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Author: kalamkala

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