कब थमेगा लाडनूं बस स्टैंड पर आवारा पशुओं का उत्पात, आएदिन हो रहे हादसे, लोग हो रहे चोटिल
सांडों की भिड़ंत में एक महिला घायल, होटल की कुर्सियां टूटी
लाडनूं (kalamkala.in)। शहर भर में आवारा घूम रहे गौवंश सांडों के कारण आम आदमी का जीना हराम हो चुका है, लेकिन नगर पालिका और प्रशासन पूरी तरह बेपरवाह बना हुआ है। हाल ही में शनिवार दोपहर बस स्टेंड पर ये सांड आपस में ही भिड़ गए और वहां का नजारा भगदड़ जैसा बन गया। लोग आसपास की दुकानों व होटलों में दुबके, लेकिन वहां स्थित खाने के होटल रामभरोसा भोजनालय के सामने उनके तांडव से वहां रखी कुर्सियां टूट गई और वहां बैठी एक महिला घायल हो गई। इन आपस में भिड़े दो सांडों के लड़ते हुए भोजनालय के सामने कुर्सियों के पास पहुंचने और एक सांड के गिरने से वहां बैठी महिला घायल हो गई,व और भोजनालय की दो कुर्सियां टूट गईं।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह दृश्य अत्यंत डरावना था और वहां मौजूद लोग सहम गए। गनीमत रही कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, अन्यथा बड़ी जनहानि भी होनी संभावित थी।
सभी दुकानदार व्यथित हैं और नागरिक परेशान
स्थानीय दुकानदार बद्री प्रसाद शर्मा ने बताया कि यह समस्या कोई नई नहीं है। हर दिन दर्जनों आवारा पशु बस स्टैंड क्षेत्र में घूमते रहते हैं और सड़क पर यातायात में बाधा उत्पन्न करते हैं। ये पशु आपस में लड़ते रहते हैं, जिससे राहगीर व दुकानदार हमेशा भय के माहौल में रहते हैं। यह सब बस स्टेंड पर अतिक्रमण करके स्थाई रूप से बेतरतीब ढंग से जमे सब्जी के ठेलों के कारण यह सांडों की समस्या बढ़ गई है। दिन भर इन सांडों का विचरण इस क्षेत्र में बना रहता है। यह इन फल-सब्जी के ठेला धारकों द्वारा दिनभर सड़ी-गली सब्जी व फल तथा कचरा वहीं पर आस-पास में ही फेंक दिए जाने से सांडों का जमावड़ा भी स्थाई हो गया है। फिर ये सांड भी मनमर्जी गए तब लड़ने-भिड़ने लगते हैं, जिससे आएदिन लोग चोटिल भी होते हैं। इस भीड़-भड़क्के वाले स्थान पर आवारा घूम रहे सांडों पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं रहा।
केवल कागजों में ही रह गई नंदीशाला की योजना
पिछली वसुंधरा राजे सरकार के समय लाडनूं में नंदीशाला स्वीकृत की गई थी, लेकिन दस साल से अधिक हो चुका, नंदीशाला अस्तित्व में ही नहीं आई। नगर पालिका प्रशासन की ओर से कई बार नंदीशाला खोलने की बातें होती रही हैं, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। न तो पालिका और न ही स्थानीय प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान दे रहा है। प्रशासन के समक्ष जब भी शहर बड़ी समस्या का यह मुद्दा उठाया जाता है, तो कहा जाता है कि गौशालाओं को पाबंद किया जा रहा है और सारे सांड नगर पालिका द्वारा पकड़े जाकर गौशालाओं में छोड़े जाएंगे। लेकिन, आज तक शहर में आवारा विचरण कर रहे गौवंश में कोई कमी नहीं आ पाई है। सारे दावे, बातें सब खोखले ही साबित हो रहे हैं।
अब भी प्रशासन चेत कर रोक सकता है हादसे
शहर के नागरिकों की मांग है कि बस स्टैंड सहित शहर के सभी क्षेत्रों में आवारा पशुओं की आवाजाही रोकी जाए और इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाते हुए नंदीशाला की स्थापना की जाकर वहां उनके रहवास और भरण-पोषण की व्यवस्था की जाए। अब तक दर्जनों लोग इन सांडों के कारण गंभीर रूप से घायल हो चुके और सांडों की लड़ाई में घायल एक जने की तो मौत भी हो चुकी, लेकिन प्रशासन की आंखें नहीं खुल सकी। अब भी कोई व्यवस्था हो जाए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा टाला जा सकता है।







