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किसकी कितनी मजबूत है दावेदारी- अलग-अलग है सबकी कहानी, किसकी कितनी खेंचातानी, एक नजर लाडनूं के भाजपा दावेदारों की स्थिति, मजबूती, दावेदारी के तरीके पर

किसकी कितनी मजबूत है दावेदारी-

अलग-अलग है सबकी कहानी, किसकी कितनी खेंचातानी,

एक नजर लाडनूं के भाजपा दावेदारों की स्थिति, मजबूती, दावेदारी के तरीके पर

लाडनूं। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस में कम और भाजपा में बहुत अधिक दावेदार नजर आने लगे हैं। उनका जमीन से कितना जुड़ाव है और वे किस प्रकार से चुनाव प्रचार में या स्वयं को प्रतिस्थापित करने में जुटे हुए हैं, उसका एक आकलन इस रिपोर्ट में किया जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न नेतागण क्षेत्र में अपनी पहचान कायम करने के लिए अलग-अलग हथकंडों को अख्तियार करने में जुटे हुए हैं। किसी की मृत्योपरांत उसके घर पहुंच कर परिजनों को ढाढस बंधवाने, सार्वजनिक या धार्मिक उत्सवों-समारोहों में जाकर लोगों से सम्पर्क बढाना, ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच कर गुवाड़ में बैठे लोगों से मिलना-जुलना और उन्हें अपनी राजनीतिक विशेषताएं बताना, महत्वपूर्ण व वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ताओं से उनके घर पहुंच कर उनके हालचाल पूछना और अपनी चुनावी योजना के बारे में बताकर उनसे आशीर्वाद लेना, शहर व गांव के मुख्य स्थानों पर पोस्टर-बैनर लगाकर प्रचार करने, कहीं तिरंगा झंडे वितरित करके या रैलियां निकालने आदि विभिन्न तरीकों की आजमाइश करके अथवा कोई सोशल मीडिया पर अपना प्रचार अभियान चलाकर स्वयं को महत्वपूर्ण दर्शाने और क्षेत्र में जमीनी धरातल पर अपना समर्थन बढाने और अपनी छवि बनाने के लिए प्रयत्नशील हैं।

तिरंगा और सघन जन सम्पर्क

इसी के तहत कर्नल प्रताप सिंह रोडू ने मोदी के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत स्वप्रेरणा से गांव-गांव में पहुंच कर लोगों का तिरंगा झंडे वितरित करवाए और बाद में तिरंगा यात्रा का आयोजन भी किया। महिला नैत्री बन कर उभर रही मनीषा शर्मा ने लाडनूं विधानसभा क्षेत्र के दर्जनों गांवों में दौरा करके भाजपा का प्रचार किया और अपने-आपको प्रतिस्थापित किया। काफी समय से चलाए जा रहे अपने इस सघन जन सम्पर्क अभियान के तहत मनीषा शर्मा ने हाल ही में ग्राम खानड़ी, कणवाई, थाणूं, अम्बापा, देवराठी, पायली, गणेशपुरा, मोडियावट, फोगड़ी, घिरड़ोदा मीठा, घिरड़ोदा खारा व आसपास की ढ़ाणियों का दौरा किया। वे इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान का प्रचार-प्रसार कर रही हैं, वहीं केंद्र सरकार की जनहितकारी योजनाओं की जानकारी लोगों को देकर उनका अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके साथ ही वे ग्रामीण क्षेत्र में मौजूद समस्याओं, बिजली, पानी, सड़क, जल भराव आदि की जानकारी भी ले रही हैं। राजपूत युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष दशरथ सिंह बरड़वा भी क्षेत्र से दावेदार हैं। वे भी लगातार ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में निरन्तर लोगों के सम्पर्क में भी हैं। हालांकि उनकी इच्छा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की भी है, लेकिन अधिक जोर विधानसभा सीट के लिए दे रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में गहरी पकड़

 
भाजपा के जिला उपाध्यक्ष नाथूराम कालेरा का ग्रामीण क्षेत्रों में खासा सम्पर्क है और वे अपने सम्पर्क के लोगों का समर्थन लेकर दावेदारी ठोंक रहे हैं। उनका लम्बा राजनीतिक अनुभव और ग्रामीणों में मजबूत पकड़ से उनका दमखम बहुत तगड़ा लग रहा है। वे स्वयं सुनारी ग्राम सहकारी समिति लि. के अध्यक्ष हैं, उनकी पत्नी के सुनारी ग्राम पंचायत की सरपंच होने और पुत्री के पंचायत समिति की सदस्या होने का लाभ भी उनको मिलेगा। उन्होंने अब तक लोकसभा, विधानसभा, जिला परिषद, पंचायत समिति, सरपंच आदि पंचायत राज ही नहीं सहकारी समितियों एवं नगर पालिका के चुनावों को भी प्रत्यक्ष हिस्सेदारी के साथ देखा, समझा और अनुभव में उतारा है। उनके प्रचार अभियान का एक अलग ही अंदाज है और वो पूरा का पूरा उनकी पकड़ पर निर्भर करता है। वे भाजपा के समस्त राजनीतिक कार्यक्रमों, अभियानों में क्षेत्र में अहम भागीदारी निभाते हैं। उनसे लोग सतत परीचित हैं। इसी प्रकार एडवोकेट जगदीश सिंह राठौड़ गहरी राजनीतिक सूझबूझ के धनी हैं और क्षेत्र में तगड़ी पकड़ रखते हैं। उनका लम्बा अनुभव और सम्पर्क सबसे भारी है। वर्तमान में वे राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद के सदस्य हैं। वे दिशा कमेटी के सदस्य भी हैं।

सोशल मीडिया ही नहीं मजबूत सम्पर्क भी है

पूर्व विधायक मनोहर सिंह के पुत्र करणी सिंह इस चुनाव में मजबूती से दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं। अपने पिता की विरासत और राजनीतिक अनुभवों को आधार बनाकर वे अपनी किस्मत आजमाने को आतुर हैं। उनका प्रचार प्रसार सोशल मीडिया के साथ होर्डिंगों एवं पोस्टर-बैनरों में दिखाई देता है। वे लोगों के सुख-दुःख में शरीक होना कभी नहीं भूलते। आमजन में पूर्व जागीरदार के वंशज होने और पूर्व विधायक का पुत्र होने से  बहुत सम्मान है। लगता है कि उनका विरोधी कोई नहीं है, लेकिन उनके साथ रहने वाले कुछ लोगों के व्यक्तिगत विरोधी अनायास ही उनके भी विरोध में खड़े नजर आते हैं। इसी तरह से भाजपा के संगठन के मतभेदों के कारण भी उनका विरोध अंदरखाने कतिपय कार्यकर्ता करते दिखाई देते हैं।

भाजपा के कार्यक्रमों के भरोसे

 

भारतीय जनता पार्टी के कुछ पदाधिकारी केवल पार्टी के कार्यक्रमों के भरोसे अथवा पार्टी के नेताओं से जान-पहचान को आधार बनाकर ही अपनी दावेदारी मान कर चल रहे हैं। जिलाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह ओड़ींट अपना पूरा ध्यान पार्टी के कार्यक्रमों पर दे रहे हैं। गजेन्द्र सिंह स्वयं जिलाध्यक्ष हैं और लाडनूं में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक करवा चुके। पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों व नेताओं से उनकी जान-पहचान अच्छी खासी है। जयपुर व दिल्ली के पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकातें भी इनके द्वारा की जा चुकी है। भाजपा के जितने भी कार्यक्रम या अभियान आदि होते हैं, उनके बसे लेकर पहुंचने और गांवों में कार्यकर्ताओं को साथ लेने के चलते इनको यह विश्वास है कि आमजन भी इनके पीछे बड़ी संख्या में उनके साथ जुड़े हुए हैं। आरएसएस में होने के कारण इन्हे ंयह भरोसा भी है कि आरएसएस लाॅबी उनका साथ निभाएगी और टिकट का मार्ग उनके लिए आसान रहेगा। टिकट मिलने के बाद इस बार भाजपा की लहर का लाभ वे उठा ही लेंगे। इसीके आधार र उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। इसी प्रकार नगर निकाय प्रकोष्ठ के संयोजक जगदीश प्रसाद पारीक और भाजपा की जिला उपाध्यक्ष अंजना शर्मा भी अपनी दावेदारी कर रहे हैं। वे भी पार्टी के कार्यक्रमों में शरीक होकर अपने आपको प्रस्तुत कर रहे हैं।

लोग ही करने में लगे हैं इनका प्रचार

भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख दावेदार कहे जाने वाले सीमा सड़क सुरक्षा संगठन के उप महानिदेशक आशुसिंह लाछड़ी के सम्पर्क एवं प्रचार का तरीका कुछ अलग ही है। उन्हें क्षेत्र के प्रमुख लोग जाति-धर्म से ऊपर उठ कर विभिन्न प्रमुख्य आयोजनों में आमंत्रित करते हैं, उनका सम्मान करते हैं और उन्हें पूरा सुनते हैं। ऐसे अवसर पर एकत्रित लोग उनसे खासे प्रभावित हो रहे हैं। आमजन स्वयं उन्हें चुनाव लड़ कर विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए आग्रह करते नजर आते हैं। उनके ओहदे, अब तक देश के प्रमुख व प्रख्यात सम्मान, देश के लिए की गई सेवाओं आदि का लोग गर्व से उल्लेख करते हैं। आशु सिंह भी क्षेत्र के महत्वपूर्ण लोगों के निरन्तर सम्पर्क में हैं और उनके माध्यम से अपनी बात भी आमजन के समक्ष रख रहे हैं। देखा जाए तो अधिकांश नेता अपना खुद का प्रचार कर रहे हैं, मगर आशुसिंह लाछड़ी का प्रचार लोग स्वंय करने में लगे हुए हैं।

सुदीर्घ राजनीतिक अनुभव, समर्पण व निष्ठा से हैं मैदान में

 

लम्बे राजनीतिक अनुभव और भाजपा के वफादार नेताओं के रूप में इस क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठतम कार्यकर्ताओं में भाजपा महिला मोर्चा की चार बार जिलाध्यक्ष रह चुकी और लगातार पार्षद के रूप में विजयी रहने का अनुभव लिए सुमित्रा आर्य, भाजपा के अध्यक्ष रह चुके और विधानसभा संयोजक रहे उमेश पीपावत के साथ किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष रह चुके देवाराम पटेल भी इस क्षेत्र में विधानसभा चुनावों में खासी दावेदारी रखते हैं। सुमित्रा आर्य तो लम्बे समय से दावेदार रही हैं और पार्टी द्वारा टिकट अन्य को देने का निर्णय करने पर उसका सदैव सम्मान किया है। जिले में एक महिला व ओबीसी को भाजपा टिकट देगी ही, तो उसके तहत सुमित्रा आर्य फिट होती है। उनका लम्बा राजनीतिक अनुभव, चुनावी अनुभव, पार्टी के प्रति समर्पण व निष्ठा तथा राजनैतिक समीकरणों में सबसे महत्वपूर्ण रहने का लाभ मिलेगा। वे जिला सर्तकता समिति, राज्य समाज कल्याण बोर्ड, बीस सूत्री कार्यक्रम समिति, जिला आयोजना समिति आदि में रह कर पूरे जिले के लिए विशेष काम करवा चुकी हैं। उनके द्वारा आज तक करवाए गए कामों, लोगों से सुदीर्घ सम्पर्क और पार्टी की सेवा सबसे महत्वपूर्ण है और इससे लोगों का विश्वास उनके प्रति मौजूद है। उमेश पीपावत भी भाजपा के प्रति सदैव निष्ठावान रहे हैं। उनकी पहुंच पार्टी के उच्च स्तर तक होने के साथ ही गांव-गांव में सोशल इंजीनियरिंग की तर्ज पर गहरी पैठ बनी हुई है। विभिन्न कार्यक्रमों में इनकी पहुंच इन्हें विशिष्ट बना देती है। इसी प्रकार देवाराम पटेल भी महत्वपूर्ण दावेदारों में शामिल हैं। इनका सुदीर्घ राजनीतिक अनुभव रहा है और ग्रामीण के साथ शहरी क्षेत्र में भी गहरी पकड़ रखते हैं। इनके भी आरएसएस लाॅबी से होने का लाभ मिलेगा। समस्त भाजपा के समस्त उच्च स्तर के नेताओं से इनके गहरे सम्पर्क भी हैं।

सेवा और लोकप्रियता आएगी काम

काफी समय से परिवहन विभाग के संयुक्त निदेशक डा. नानूराम चोयल इस क्षेत्र से राजनीति में कूदने की सोच रहे हैं। इनके पिता स्व. मूलाराम चौयल यहां से विधानसभा चुनाव लड़ा था और निर्दलीय चुनाव लड़ कर भी काफी वोट बटोरने में सफल रहे और पूरे चुनावी समीकरणों को बिगाड़ते हुए किसी की हार व किसी की जीत का कारण भी बने। तत्समय भाजपा की जीत उनके कारण ही संभव हो पाई थी। डा. चोयल का सम्पर्क इस क्षेत्र में गहन है और बहु तबड़े राजकीय पद पर आसीन होने के बावजूद इस क्षेत्र से सदेव जुड़े हुए रहे तथा प्रायः यहां का हर व्यक्ति उनसे भीलीभांति परीचित है। लोगों का अनुमान है कि उन्हें टिकट मिलने पर वे कांग्रेस को तगड़ी पछाड़ लगा सकते हैं। इसी प्रकार स्पेन में बिजनेस करने वाले यहां के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता रवि पटेल (ठोलिया) भी इस क्षेत्र में अपनी मजबत पकड़ और महत्व रखते हैं। समाजसेवा में निरन्तर लगे हुए रह कर उन्होंने यहां लोगों का दिल जीता है। कोरोना के समय में उन्होंने प्रवासी मजदूरों के लिए बसों व वाहनों की व्यवस्था अपनी तरफ से की और लोकडाउन में घर-घर राशन किट पहुंचा कर गरीबों को सम्बल प्रदान किया था। इस क्षेत्र में चाहे कोई धार्मिक आयोजन हो या कोई मंदिर का निर्माण, कोई सांस्कृतिक-सामाजिक आयोजन हो अथवा लोकोपकार का कोई अन्य कार्य लोग उनका नाम सबसे पहले लेते हैं और आज तक किसी को निराश नहीं होना पड़ा। विशेषता यह है कि अगर वे विदेश में बैठे हों तब भी सेवा के लिए तत्पर हो जाते हैं। ऐसे सेवाभावी व्यक्ति के लिए इस क्षेत्र में कांग्रेस व भाजपा दोनों ही दलों के समर्थकों में रूचि व समर्थन देखा जा रहा है। रवि पटेल का सम्पर्क भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेताओं समेत राज्य स्तरीय अनेक नेताओं से भी होने के कारण माना जा रहा है कि उन्हें टिकट लेने की इच्छा होने पर कोई बाधा उनके समक्ष नहीं आएगी।

बागड़ा की वापसी से लोग अचम्भित

इस क्षेत्र में भाजपा में पुनर्वापसी करने वाले पंचायत समिति सदस्य ओमप्रकाश बागड़ी कसूम्बी से हैं और धार्मिक रूचि के होने से लोगों के लोकप्रिय भी हैं। सामाजिक कार्यों एवं जन समस्याओं के प्रति सदैव सुरूचि रहने और समाधान की दिशा में सक्रिय व मजबत प्रयास करने के लिए इनका नाम सवोपरि है। इनका परिवार राजनीति से सदेव जुड़ा रहा है। इनकी पत्नी ममता बागड़ा पंचायत समिति सदस्य रही और कृषि उपज मंडी समिति डीडवाना की अध्यक्ष भी रही। इनके पिता सरपंच रहे थे और स्वयं ओमप्रकाश बागड़ा सरपंच व पंचायत समिति सदस्य रहे। वर्तमान में पंचायत समिति सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। ग्रामीण क्षेत्रों व शहरी क्षेत्र में इनकी लोगों में खासी पकड़ है। ये भाजपा के मंडल अध्यक्ष रहे, तो भाजपा कृषि उपज मंडी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष भी रहे। भाजपा की लम्बे समय तक सेवा करने के बाद जब इन्हें दरकिनार किया जाने लगा, तब इन्होंने विधानसभा चुनावों में निर्दलीय खम ठोका और अच्छे वोट भी हासिल किए। भाजपा के प्रति निष्ठा सदैव से रहने के कारण ये अब फिर से भाजपा में आ रहे हैं। हाल ही में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सहित सभी प्रमुख पदाधिकारीगण इनके कसूम्बी स्थित निवास पर आए थे। सांसद सुमेधानन्द और घनश्याम तिवाड़ी भी इनके घर आते रहेते हैं। इनके सम्पर्क आमजन के साथ भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से भी अच्छा है। भाजपा के अन्य प्रमुख नेतागण इनके कसूम्बी निवास पर प्रायः आते रहते हैं। उम्मीद लगाई जा रही है कि इसका लाभ इन्हें मिलेगा और इस बार किस्मत आजमाने के लिए लाडनूं विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का टिकट इनको दिया जाएगा। फिलहान बागड़ा की घरवापसी से भाजपा के स्थानीय दावेदार नेता एक अजीब सी स्थिति महसूस कर रहे हैं।
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Author: kalamkala

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