कर्तव्य के साथ-साथ साहित्य और चिंतन समाज को प्रेरित करेगा- एसपी तोमर, कांस्टेबल प्रेमाराम ने अपनी दो पुस्तकें ‘सकारात्मक सोच की आग’ और ‘जीवन को पुनः खोजें’ एसपी ऋचा तोमर को भेंट

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कर्तव्य के साथ-साथ साहित्य और चिंतन समाज को प्रेरित करेगा- एसपी तोमर,

कांस्टेबल प्रेमाराम ने अपनी दो पुस्तकें ‘सकारात्मक सोच की आग’ और ‘जीवन को पुनः खोजें’ एसपी ऋचा तोमर को भेंट

डीडवाना (kalamkala.in)। कहते हैं कि पुलिस में रहने वाले व्यक्ति का जीवन नीरस हो जाता है‌ वह अपराधियों की तलाश और उनसे जूझते-जूझते खुद को कठोर और संदेह दृष्टि सम्पन्न बना लेता है। इससे उसके जीवन की सकारात्मकता समाप्त प्रायः हो जाती है। ऐसे में अगर कोई पुलिसमैन जीवन की पोजिटिविटी की बातें करे, तो कुछ सुखद आश्चर्य लगता है। ऐसा लगता है कि कहीं बंजर जमीन पर फूल उग आए हों। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कांस्टेबल प्रेमाराम ने। उनकी लिखी दो पुस्तकें सच में ऐसा ही कमाल है। मंगलवार को कांस्टेबल प्रेमाराम (नं. 579) ने जिला पुलिस अधीक्षक श्रीमती ऋचा तोमर (IPS) को अपनी दो पुस्तकें ‘सकारात्मक सोच की आग’ और ‘जीवन को पुनः खोजें’ भेंट कीं।
इस अवसर पर एसपी तोमर के उद्गार काफी महत्वपूर्ण हैं। एसपी तोमर ने इस अवसर पर कहा, ‘कांस्टेबल प्रेमाराम की ये पुस्तकें न केवल प्रेरणादायक हैं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाली भी हैं। कर्तव्य के साथ-साथ साहित्य और चिंतन में उनका योगदान सराहनीय है और यह समाज को अवश्य प्रेरित करेगा।’

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Author: kalamkala

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