लाडनूं के मालगांव में नाडी के अस्तित्व को मिटाने के प्रयासों के मामले में दो पक्ष हुए आमने-सामने, अब गेंद तहसीलदार के पाले में,
तहसीलदार ने दोनों के ज्ञापनों के मद्देनजर जांच के लिए गठित की राजस्व अधिकारियों की टीम
लाडनूं (kalamkala.in)। तहसील के ग्राम मालगांव में चल रहे गैनाणी नाडी के अस्तित्व को मिटाने को लेकर छिड़े विवाद में दोनों पक्षों द्वारा दिए गए ज्ञापनों को ध्यान में रखते हुए तहसीलदार अनिरुद्ध देव पांडेय ने एक जांच कमेटी का गठन किया है। इस बाबत जारी आदेश में बताया गया है कि यह राजस्व कमेटी (टीम) मौका निरीक्षण करने के उपरांत आगामी पांच दिवस में अपनी रिपोर्ट तहसीलदार को सौंपेगी। कार्यालय आदेश क्रमांकः- राजस्व/2025/1169, दिनांक:-09.09.2025 के अनुसार ग्रामवासी मालगांव द्वारा ग्राम मालगांव में गंदे पानी के गड्डे को समतलीकरण के सम्बन्ध में अलग-अलग प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किये गये हैं। इन प्रार्थना-पत्रों की मौका जांच के लिए राजस्व टीम का गठन किया गया है। इस राजस्व टीम में भू अभिलेख निरीक्षक निम्बी जोधां जगदीश प्रसाद स्वामी, भू अभिलेख निरीक्षक भरनावां बीरबल प्रजापत, पटवारी हलका मालगांव जयराम गैणा, पटवारी हल्का निम्बी जोधां राकेश झुरिया तथा पटवारी हल्का बल्दू रामवतार स्वामी को शामिल किया गया है।
कलेक्टर ने तीन दिनों में मांगी तहसीलदार से रिपोर्ट
इधर गौरतलब है कि जिला कलेक्टर ने भी इस मामले में ग्रामवासियों की शिकायत को ध्यान में रखते हुए तहसीलदार लाडनूं को मालगांव के नाडी-तलाई जलस्रोतों के सम्बन्ध में जांच रिपोर्ट तीन दिनों में मांगी है।जिला कलेक्टर ने तहसीलदार लाडनूं को पत्र क्रमांक : प.12 (1) (0) () पीजी/2024-25/166, दिनांक 09/09/25 में लिखा है, ग्राम मालगांव में खसरा संख्या 46 गै.मु. नाडी व 450/49 चारागाह व अन्य सामान्य काम हेतु भूमि पर बनी नाडियों को यथास्थिति में व असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध कब्जा करने वालों को पाबंद करने के संबंध में लिखा है। इसमें बताया है कि समस्त ग्रामवासी मालगांव तहसील लाडनूं द्वारा ग्राम मालगांव में खसरा संख्या 46 गै.मु. नाडी व 450/49 चारागाह व अन्य सामान्य काम हेतु भूमि पर में बनी नाडियों को यथास्थिति में रखने व असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध कब्जा करने वालों को पाबंद करने के संबंध में परिवाद प्राप्त हुआ। उस प्राप्त प्रार्थना-पत्र को संलग्न प्रेषित कर लिखा गया है कि इस प्रकरण का अक्षरशः अवलोकन कर, परिवादी को सुनते हुए नियमानुसार कार्यवाही कर स्पष्ट अनुशंषा सहित पालना रिपोर्ट तीन दिवस के अंदर भिजवाई जाए।
एक ज्ञापन में गैनाणी को मैदान में बदलने की मांगी अनुमति
यहां यह भी गौरतलब है कि गांव के अनेक व्यक्तियों ने जहां पेयजल की नाडी में मिलाए जा रहे गंदे पानी को लेकर आपत्ति जताई, वहीं गंदे पानी की प्राचीन गैनाणी की पाल को तोड़ कर वहां अवैध कब्जे की साज़िश का विरोध करते हुए लोगों ने तहसीलदार व कलेक्टर को ज्ञापन देकर विरोध जताया था। कुछ अन्य लोगों द्वारा तहसीलदार को दिए ज्ञापन में जमीन को समतल करने की अनुमति मांगी गई। इस ज्ञापन में गांव के गंदे खड्डे को समतलीकरण करने की अनुमति प्रदान करने की मांग तहसीलदार से करते हुए लिखा गया है कि हमारे गांव मालगांव के बालाजी व तेजाजी महाराज के मंदिर के समीप बना हुआ खड्डा काफी लंबे समय से कीचड़ से भरा हुआ है, खड्डे में हुई गंदगी से लगातार मच्छर उत्पन्न हो रहे हैं, जिससे ग्रामवासियों को मलेरिया व अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ता है। यह खड्डा रोड के समीप है, विद्यालय जाने वाले छात्र इसी रास्ते से होकर विद्यालय में जाते हैं, जिस कारण छात्र लगातार बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। खड्डे का पानी चारों ओर फैला हुआ है जो कि भारी बारिश के चलते सड़क तक पहुंच जाता है तथा इस खड्डे के ऊपर से 11000 केवी बिजली की लाइन गई हुई है, जिसके तार कई बार तेज आंधी-तूफान के चलते टूटकर खड्ढे में गिर जाते हैं तथा पानी में करंट पैदा कर देते हैं, जिससे जान-माल का खतरा बना रहता है। खड्डे के चारों ओर कोई सुख्क्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण गांव के छोटे बच्चों के उसमें गिरने की आशंका बनी रहती है, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना का खतरा हर समय बना रहता है। विगत दिनों तेजाजी महाराज के मंदिर में आयोजित हो रहे विशाल तेजा गायन कार्यक्रम के दौरान दो छोटे बच्चे खेलते-खेलते खड्डे में गिर गए, जिनको पड़ी मुश्किल से खड्डे से बाहर निकाला गया। यह खड्डा धार्मिक स्थल के नजदीक होने के कारण धार्मिक स्थल पर बदबू व गंदगी भरा माहौल बना रहता है। खड्डे के एक और ग्राम पंचायत भवन का निर्माण किया हुआ है। भारी बारिश और खड्डा पानी से भरे हुए होने के कारण पानी अक्सर पंचायत भवन की ओर चला जाता है, जिससे पंचायत भवन क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी बनी रहती है। इस खड्ढे का समय रहते समतलीकरण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में भारी जनहानि होने की संभावना है। इस खड्डे का समतलीकरण का कार्य ग्रामवासी अपने स्तर पर स्वयं के खर्चे से करवाने में सक्षम हैं। इस ज्ञापन पर बिसनाराम, कालूराम, रामकरण, विश्राम, हेमाराम, रामचन्द्र, ओमप्रकाश, अशोक, रामदेव, सुखाराम, रामकरण, इमरताराम, सुखाराम, मांगीलाल, लालदास, राकेश, अरुण, सुरेश, महेश, बजरंग, किशनाराम, बालाराम आदि ने हस्ताक्षर किए हैं।
‘कलम कला’ की खबर पर प्रस्तुत किया अपना पक्ष
‘कलम कला’ में 9 सितम्बर को प्रकाशित खबर ‘मालगांव में शरारती लोगों ने गंदे पानी की नाडी पर अवैध कब्जे के लिए जेसीबी चलाई- गांव के पेयजल की नाडी में गंदा पानी मिलाने से गुस्साए लोगों ने दिया तहसीलदार को ज्ञापन’ पर मालगांव के कुछ लोगों ने ‘कलम कला’ को उन्हें ‘शरारती तत्व’ बताए जाने पर ऐतराज जताया है। उन्होंने अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए तहसीलदार को दिए गए ज्ञापन की प्रति भेजी और साथ ही कुछ मैटर भी भेजा। उन्होंने बताया कि यह मामला गांव में ‘विवादित’ नहीं है। लेकिन इन्हीं लोगों ने एक मैटर भी ‘कलम कला’ को भेजा है, जिसमें इन्होंने इस जेसीबी चलाने वाले मामले के लिए ‘ग्राम मालगांव गांव के युवाओं की अनूठी पहल- गंदे पानी को बाहर निकालने की पहल’ यह कार्रवाई करना बताया है। इसमें आगे इन्होंने वर्णित किया है कि ‘समाज के कुछ असामाजिक तत्वों ने आकर उपरोक्त कार्रवाई को रोकने तथा युवाओं पर झूठे मुकदमे दर्ज करवाने की धमकी दी। इन असामाजिक तत्वों के द्वारा युवाओं को यह कहते हुए धमकाया कि हम गांव के दो टुकड़े कर देंगे, कभी भी किसी को साथ नहीं बैठने देंगे तथा जो भी युवा आगे जाकर कार्य करने की कोशिश करेगा या किसी भी प्रशासनिक अधिकारी से अनुमति लेने की भी कोशिश करेगा, उसके ऊपर झूठे मुकदमे दर्ज करवाएंगे।’ इन समतलीकरण के समर्थन में उतरे लोगों में हरिराम फौजी, जगदीश प्रसाद फौजी, इमरतराम, सुखाराम, विश्राम, प्रेमाराम, जगदीश, नरेंद्र, रामचंद्र, लालाराम, मगाराम, रामदेव, दिनेश, अशोक, सुरेश, रामकरण, श्रवणराम, महेश, अर्जुन, बजरंग, ओमप्रकाश, हनुमान , लीलाधर, सुशील, मुकेश आदि शामिल बताए गए हैं।
बहुत गहराया है यह नाडी-नाडी का विवाद
इस तरह इसमें गांव के पेयजल की नाडी की शुद्धता को बचाने व गांव के गंदे पानी की नाडी को सुरक्षित रखे जाने की कोशिश करने वाले लोगों को ‘असामाजिक तत्व’ बताया गया है। साथ ही धमकी देने व इस मैटर पर गांव के दो फाड़ होने के संकेत भी स्वयं ही दे दिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है, ‘धमकाया कि हम गांव के दो टुकड़े कर देंगे, कभी भी किसी को साथ नहीं बैठने देंगे।…झूठे मुकदमे करवाएंगे।’ इस तरह की बातें निश्चित रूप से गांव में गुटबाजी को पनपाने की प्रतीक कही जा सकती है।इस मामले में कलेक्टर ने नाडियों को यथास्थिति में रखने के स्थगन आदेश देते हुए मामले की गंभीरता को समझते हुए तीन दिनों में तहसीलदार से इसकी रिपोर्ट मांगी है।
क्या चाहते हैं सरपंच और अन्य प्रमुख लोग
गांव वालों की मांग थी कि गांव की तलाई तक खोदे गए कच्चे नाले को बंद करवाया जाए, उसके पानी में गंदा पानी नहीं मिलाया जाए। नाडी की तोड़ी गई पाल को वापस सही करवाया जाए, नाडी की राजकीय भूमि पर कब्जा नहीं होने दिया जाए आदि मांगें वाजिब भी कही जा सकती है। सरपंच सहित गांव के प्रमुख लोग इसके हिमायती हैं। इधर कुछ अन्य लोगों ने एक पत्र तहसीलदार को देकर इस जमीन को अपने पैसों से समतल बनाने की इजाजत चाही गई है। यहां यह समझ में नहीं आता कि इसके लिए ग्राम पंचायत को उन्होंने क्यों नहीं लिखा। यह काम उचित होने पर ग्राम पंचायत भी कर सकती है। ग्राम सभाएं होती हैं, उनमें भी कोई प्रस्ताव लाया जा सकता था। खैर तहसीलदार के पाले में गेंद है, अब वो कैसे क्या करते हैं, उनकी रिपोर्ट से ही पता चल पाएगा।



