कलम कला स्पेशल स्टोरी
केन्द्रीय मंत्री शेखावत के पटेल के घर आने से लोगों में कयासों का दौर शुरू
लाडनूं। जैसे-जैसे विधानसभा चुनावों के आने की आहट लग रही है, वैसे-वैसे यहां राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती जा रही है। इनमें केवल अपने-आपको प्रचारित करने तक की गतिविधियों तक ही नेता सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि राजनीतिक उठापटक भी शुरू की जा चुकी है। रविवार को भाजपा की जिला स्तरीय तिरंगा वाहन रैली के नांवा से शुरू होकर विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए लाडनूंु पहुंच कर समापन होने के कार्यक्रम के दौरान भी जनता के बीच कुछ ऐसे ही संयोग देखने को मिले, जिनसे कयास लगाए जाने शुरू हो गए हैं। रैली के इस समापन समारोह में केन्द्र की भाजपा सरकार में मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की शिरकत रही। केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने यहां आते समय यहां कांग्रेस के प्रदेश सचिव रवि पटेल के पिता एवं पंचायत समिति सदस्य व कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष रामनिवास पटेल से मिले और वापनस जाते समय उनके घर आकर उनके यहां चाय के साथ चर्चाएं की। इस अवसर पर भाजपा के जिलाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह ओड़ींट, डीडवाना के भाजपा नेता जितेन्द्र सिंह जोधा, पूर्व भाजपा अध्यक्ष हनुमानमल जांगिड़, रमेश सिंह राठौड़, रमेश भाटी, शिम्भुसिंह जैतमाल, लक्ष्मण जांगिड़, सुशील कुमार पीपलवा आदि सभी मोजूद रहे।
लोगों में सुगबुगाहट शुरू
इस अभूतपूर्व मिलन को लेकर लोगों के स्कूप है कि यह केवल अनौपचारिक भेंट ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे राजनीतिक अर्थ भी छिपे हुए हैं। दो अलग-अलग राजनीतिक दलों के लोगों का इस तरह से मिलना कुछ नए राजनीतिक अर्थ के कयास उत्पन्न करता है। आजकल माहौल बना हुआ है कि कहीं भी भाजपा का कोई बड़ा नेता किसी कांग्रेसी नेता से मुलाकात करता है, तो थोड़े ही दिनों बाद वह अनौपचारिक भेंट कोई बड़ा विस्फोट कर डालती है। अब लाडनूं में कौन सा विस्फोट होने जा रहा है, यहा तो अभी समय के गर्भ में है, लेकिन लोगों में सुगबुगाहट अवश्य शुरू हो चुकी है। एक यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि कहीं कांग्रेस के प्रदेश सचिव रवि पटेल के भाजपा ज्वायन करने की यह पृष्ठभूमि तो नहीं है? यह सभी जानते हैं कि यहां विधायक मुकेश भाकर खेमा और रवि पटेल का खेमा अलग-अलग है और उनमें परस्पर उतनी ही बनती है, जितनी अशोक गहलोत व सचिन पायलट में बनती है। दोनों कांग्रेस के दो धु्रव हैं। यह बात भी स्पष्ट है कि कांग्रेस में मुकेश भाकर के विधायक बनने के बाद आगामी विधानसभा चुनाव में उसका टिकट कटवाना रवि पटेल के लिए मुश्किल ही नहीं असंभव भी हो सकता है। ऐसे में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पटेल के समक्ष सिर्फ एक ही विकल्प बचता है और वो है कि रवि पटेल भाजपा में शामिल हो जाए और वो भी किसी बड़े नेता के समक्ष। ऐसे में केन्द्रीय मंत्री शेखावत के साथ मेलजोल, सांठगांठ उनके लिए बड़ा सहारा बन कर सामने आ सकता है। लाडनूं शहर की राजनीति जाट व राजपूत के दो ध्रुवों में विभाजित सी हो गई है। जाट नेता की पद कांग्रेस में तो खाली रहा नहीं और भाजपा में प्रभावी जाट नेता के रूप में कोई व्यक्तित्व उभर कर सामने नहीं आ पाया है। ऐसी खालसा वाली स्थिति में रवि पटेल भाजपा के जाट कार्यकर्ताओं-मतदाताओं के लिए ही नहीं बल्कि समूचे क्षेत्र के जाट वोटर्स को आकर्षित करने में सक्षम है। अनुमान लगाए जा रहे हैं कि आगामी चुनाव भाकर बनाम पटेल हो सकने की गुंजाइश है। आगे-आगे देखिए होता है क्या?







