आचार्य महाश्रमण सत्यनिष्ठ हैं और सदैव निरपेक्ष भाषा का प्रयोग करते हैं- कुलपति प्रो. दूगड़, आचार्य महाश्रमण के 62वें जन्मदिन पर कार्यक्रम आयोजित

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आचार्य महाश्रमण सत्यनिष्ठ हैं और सदैव निरपेक्ष भाषा का प्रयोग करते हैं- कुलपति प्रो. दूगड़,

आचार्य महाश्रमण के 62वें जन्मदिन पर कार्यक्रम आयोजित

लाडनूं। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि इस संस्थान के लिए संवैधानिक रूप से अनुशास्ता का पद है। वर्तमान में अनुशास्ता के रूप में विश्वविद्यालय पर आचार्यश्री महाश्रमण का आध्यात्मिक अनुशासन है। उन्होंने यहां सेमिनार हाॅल में अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण के 62वें जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए आचार्य महाश्रमण को अतुलित ज्ञान सम्पदा के धनी, जिज्ञासुवृति के अनुसंधान प्रवृति के साथ सप्रमाण बात करने वाले, संयम सम्पन्न बताया। प्रो. दूगड़ ने कहा कि आचार्य तुलसी से उन्होंने संयम ग्रहण किया और अचार्य महाप्रज्ञ से ज्ञानसम्पदा बढाई। आचार्य महाश्रमण तीव्र स्मरण शक्ति के धनी हैं। उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने उनकी स्मृति क्षमता को अद्भुत बताया। उन्होंने कहा कि उनमें आगमों का ज्ञान भरा है और वे आगमनिष्ठ भी हैं। उनके व्याख्यान आगम पर ही आधारित होते हैं। सत्य निष्ठा के गुण का उल्लेख करते हुए कुलपति ने कहा कि कि आचार्य महाश्रमण निरपेक्ष भाषा का प्रयोग करते हैं। सापेक्ष भाषा के मिथ्यात्व दोष आ जाता है, लेकिन विचारों में अनेकांत होने से वे सत्यनिष्ठ ही बने रहते हैं। प्रो. दूगड़ ने महाश्रमण की पदयात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 10 सालों से वे सतत चल रहे हैं और मौसम की हर अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थिति के बावजूद उनके कदम नहीं डगमगोते। इस पदयात्रा से उनके अनुभव प्रगाढ हुए हैं और उनके ज्ञान की प्रगाढता में वृद्धि हुई है। उन्होंने आचार्य महाश्रमण को अल्प आहारी व श्रमनिष्ठ बताया तथा साथ ही कहा कि अपरिग्रही होने के बावजूद वे विकास और अैकनोलोजी के विरोधी नहीं हैं। विकास को देख कर वे प्रसन्न होते हैं, हालांकि वे स्वयं मोबाईल, लैपटोप आदिका उपयोग तक नहंी करते। इस अवसर पर उन्होंने आचार्यश्री महाश्रमण के दीर्घायु, यशस्वी और स्वस्थ रहने की कामना की। कार्यक्रम में प्रो. दामोदर शास्त्री, प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. रेखा तिवाड़ी, डा. युवराज सिंह खंगारोत व डा. प्रद्युम्नसिंह शेखावत ने भी सम्बोधित किया और आचार्यश्री महाश्रमण की जीवन यात्रा और वैशिष्ट्यों का विवरण प्रस्तुत करते हुए उनसे प्रेरणा लेकर अपना जीवन सार्थक बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन डा. वीरेन्द्र भाटी मंगल ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक स्टाफ के साथ मेडिकल काॅलेज आॅफ नेचुरोपैथी का मेडिकल स्टाफ भी उपस्थित रहा।

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Author: kalamkala

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