आचार्य श्री महाश्रमण 384 दिन करेंगे लाडनूं में प्रवास, जैन विश्व भारती ही नहीं समूचे लाडनूं को सजाया जाकर किया गया अगवानी के लिए तैयार, लाडनूं में मंगल प्रवेश 5 फरवरी को,
तेरापंथ के उच्च पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता में दी तैयारियों व कार्यक्रमों की जानकारी




लाडनूं (kalamkala.in)। योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति एवं जैन विश्व भारती के तत्वावधान में आचार्य श्री महाश्रमण के 13 माह के लाडनूं प्रवास और व्यवस्थाओं को लेकर बुधवार को एक प्रेसवार्ता कर आयोजित की गई। प्रेसवार्ता में प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद, महामंत्री निर्मल कोटेचा, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लूंकड़, मंत्री सलिल लोढ़ा, जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, राजेन्द्र खटेड़ एवं अन्य विभिन्न सभा-संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने भाग लिया।
30 जनवरी को छोटी खाटू से लाडनूं के लिए होगा आचार्य श्री महाश्रमण का प्रस्थान
इस अवसर पर प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद ने प्रारंभ में स्वागत वक्तव्य के दौरान बताया कि आचार्य श्री महाश्रमण का लाडनूं में 13 माह का प्रवास-काल रहेगा। इस दौरान उनके साथ 450 साधु-साध्वियां और समण वर्ग से रहेंगे। उन्होंने बताया कि गुरुवार 29 जनवरी को छोटी खाटू में झंडा-हस्तांतरण के साथ ही सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। आचार्य श्री महाश्रमण 30 जनवरी शुक्रवार कै छोटी खाटू से रवाना होकर 5 फरवरी को लाडनूं शहर में प्रवेश करेंगे। यहां वरिष्ठ श्रावक भागचंद बरड़िया के निवास पर उनका व्याख्यान और प्रवास रहेगा। अगले दिन सुबह वहां से प्रस्थान करके आचार्य श्री महाश्रमण जैन विश्व भारती में योगक्षेम वर्ष प्रवास के लिए मंगल प्रवेश करेंगे।
7 फरवरी को किया जाएगा नागरिक अभिनंदन
जैन विश्व भारती के मंत्री सलिल लोढ़ा ने बताया कि आचार्य श्री महाश्रमण का लाडनूं में कुल प्रवास 384 दिनों का रहेगा। उन्होंने दायित्वों के हस्तांतरण के लिए लाडनूं से विराट संघ के छोटी खाटू पहुंचने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आचार्य श्री महाश्रमण योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री निर्मल कोटेचा ने योगक्षेम वर्ष के आयोजन को लाडनूं के गौरव वर्ष के रूप में संज्ञायित किया और कहा कि यह दूसरे योगक्षेम वर्ष का सौभाग्य लाडनूं को मिला है। इससे पूर्व 1989 में आचार्य तुलसी के समय लाडनूं में पहला योगक्षेम वर्ष आयोजित किया गया था। उन्होंने लाडनूं शहर में और जैन विश्व भारती में आचार्य श्री महाश्रमण के प्रवेश और प्रवास के बारे में बताया और समस्त तैयारियों के बारे में जानकारी दी। जैन विश्व भारती में भवनों के निर्माण, अस्थाई आवास कुटीरों के निर्माण और अन्य सुविधाओं आदि का वितरण प्रस्तुत किया तथा प्रशासन की ओर से भी किए जाने वाले कामों के बारे में बताया। उन्होंने 7 फरवरी को नागरिक अभिनंदन किया जाने और 8 फरवरी को जैन दीक्षा समारोह आयोजित किए जाने के कार्यक्रमों के बारे में भी पत्रकारों को अवगत करवाया।
पूरे प्रवास काल में चलेंगे विभिन्न उच्च स्तर के कार्यक्रम
महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री निर्मल कोटेचा ने प्रेस को बताया कि लाडनूं में आचार्य श्री महाश्रमण के नेतृत्व में कुल 450 साधु-साध्वियां व समण-समणियां पहुंचेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि तेरापंथ धर्मसंघ में कुल 770 साधु-साध्वियां हैं। इनमें से 250 साधु और शेष साध्वियां हैं। उन्होंने बताया कि आचार्य श्री महाश्रमण का 13 माह के लाडनूं प्रवास के बाद यहां से प्रस्थान आगामी वर्ष 2027 में 24 फरवरी को होगा। उनके प्रवास काल के दौरान यहां नियमित रूप से विभिन्न उच्च स्तर के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनका एक कैलेंडर प्रकाशित किया गया है और कार्यक्रमों का पूरा विवरण उसमें दिया गया है, ताकि सबकी जानकारी के लिए आसानी रहे। उन्होंने बताया कि तेरापंथ धर्मसंघ की 16 केन्द्रीय संस्थाएं कार्यरत हैं और उनके पदाधिकारी अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। प्रेसवार्ता कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं वरिष्ठ श्रावक आलोक खटेड़ ने किया। अंत में वरिष्ठ पत्रकार डा. शंकर आकाश ने आभार ज्ञापित किया।







