भाईचारा, मेलजोल, सांस्कृतिक एकरूपता के साथ आर्थिक-व्यापारिक उन्नति का परिचायक है पाबोलाव पशुमेला- कुमुद सोलंकी बीडीओ, पाबोलाव में श्रीहनुमान पशु मेले का हुआ शुभारम्भ, दूर-दराज से पहुंचे व्यापारी, बड़ी तादाद में आ रहे हैं ऊंट-ऊंटनियां

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भाईचारा, मेलजोल, सांस्कृतिक एकरूपता के साथ आर्थिक-व्यापारिक उन्नति का परिचायक है पाबोलाव पशुमेला- कुमुद सोलंकी बीडीओ,

पाबोलाव में श्रीहनुमान पशु मेले का हुआ शुभारम्भ, दूर-दराज से पहुंचे व्यापारी, बड़ी तादाद में आ रहे हैं ऊंट-ऊंटनियां

लाडनूं (kalamkala.in)। पंचायत समिति लाडनूं के तत्वावधान में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी निकटवर्ती पाबोलाव ताल मैदान में प्रसिद्ध ऐतिहासिक श्रीहनुमान पशु मेले का शुभारम्भ सोमवार को विधिवत भूमि पूजन और पूजा-अर्चना के साथ ध्वजारोहण करके किया गया। पाबोलाव में स्थित सिद्धपीठ हनुमान पीठ मंदिर में भी सबने पूजा-अर्चना की और धार्मिक ध्वज चढ़ाया।पाबोलाव हनुमान मंदिर में मेले के सफल आयोजन, सुख-शांति और खुशहाली के लिए कामना की गई औश्र पुजारी से आशीर्वाद लिया गया। शुभारम्भ कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत समिति के प्रधान हनुमानराम कासनिया ने की। कार्यक्रम में विकास अधिकारी कुमुद सोलंकी ने बताया कि पाबोलाव पशु मेला केवल व्यापार का ही केंद्र नहीं है बल्कि यह आपसी भाईचारे और संस्कृति को जीवित रखने वाला एक मंच है। यहां दूर-दूर से व्यापारी और पशुधन एकत्रित होते हैं, जिससे सामाजिक मेलजोल के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। इस अवसर पर पंचायत समिति सदस्य श्रीराम खीचड़, खींवाराम घींटाला, यज्ञपाल दायमा, सरपंच गणेशराम चबराल, मूलसिंह छपारा, बेगाराम पूनिया, हरदयाल रूलानिया, कन्हैयालाल प्रजापत, चंपालाल मेघवाल, कालू सिंह हुडास, सुधीर चोटिया सांवराद आदि उपस्थित रहे। मेला व्यवस्था में मोहनराम नेहरा, राधेश्याम सांखला, रामनिवास रेलिया, पूसाराज पूनिया आदि ने जुट कर सभी प्रबंधन कामयाब किए। कार्यक्रम का संचालन राधेश्याम सांखला ने किया।

बड़ी संख्या में आए ऊंट-ऊंटनियां, पशु- व्यापारी भी पहुंचे

मेले के पहले ही दिन 400 से अधिक ऊंट-ऊंटनियों सहित अन्य पशुधन भी पहुंच चुके हैं। लगातार तीन दिनों से हुई बरसात की वजह से पशुधन का आगमन अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन फिर भी पशुधन का आगमन बराबर जारी है। आगामी दिनों में ऊंट, बैल, भैंस, भैंसा एवं अन्य पशु भारी संख्या में मेले में पहुंचेंगे।पाबोलाव पशु मेले में राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, गुजरात, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से भी व्यापारी अपने पशुधन को लेकर पहुंचे हैं। व्यापारी यहां परम्परागत ऊंट-घोड़ों के साथ अन्य पशुधन की खरीद-फरोख्त करते हैं। इस दौरान व्यापारी वर्ग के बीच आपसी मेलजोल और क्षेत्रीय संस्कृति का आदान-प्रदान भी देखने को मिलता है।

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Author: kalamkala

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