आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द की जयंती मनाई और उनके आदर्शों पर चलने की आवश्यकता बताई



लाडनूं (kalamkala.in)। आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर गुरुवार को स्थानीय आर्य समाज मंदिर में विशेष यज्ञ-सत्संग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महर्षि दयानन्द के जीवन, कार्यों और सिद्धांतों व मान्यताओं पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में यज्ञ के पुरोहित आर्य समाज के संरक्षक मुनि ओमदास ने कहा कि देश में चारों तरफ फैले अज्ञात और अंधविश्वास के अंधकार को महर्षि ने ज्ञान का प्रकाश फैला कर दूर कर दिया था। उन्होंने बताया कि स्वामी दयानंद ने महिला शिक्षा व महिला उत्थान के लिए विशेष कार्य किए और महिलाओं को समाज में उचित स्थान प्रदान किया। उन्होंने जातिगत भेदभाव को मिटा कर सबको सामाजिक समानता का पाठ पढ़ाया। महर्षि ने आर्य समाज की स्थापना करके मनुष्य मात्र को निरन्तर उजाला दिखाते रहने का मार्ग प्रशस्त किया था। पुस्तकालयाध्यक्ष अनोपचंद सांखला ने महर्षि दयानन्द सरस्वती रचित पुस्तकों को पढ़ने और उनके आदर्शों को जीवन में उतारे जाने की जरूरत बताई। अध्यापक नंदसिंह ने भी दयानन्द के सिद्धांतों का अनुसरण करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में पार्षद सुमित्रा आर्य, यज्ञ प्रभारी तारा आर्य आदि महिलाओं ने दयानन्द सरस्वती और आर्य सिद्धांतों पर आधारित गीत प्रस्तुत किए। शांति पाठ के साथ कार्यक्रम सम्पन्न किया गया।







