तेरापंथ धर्मसंघ में आचार्यश्री महाश्रमण के उत्तराधिकारी बने मुख्य मुनि महावीर कुमार,
युवाचार्य घोषित करके ओढाई उत्तरीय की धवल चद्दर, हजारों लोगों ने लगाया जयघोष


लाडनूं (kalamkala.in)। तेरापंथ धर्मसंघ की परंपरा को आगे बढाते हुए धर्मसंंघ के 11वें आचार्य श्री महाश्रमण ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में मुख्य मुनिश्री महावीर कुमार को युवाचार्य घोषित कर दिया है। आचार्य श्री महाश्रमण ने नवनियुक्त युवाचार्य मुनि श्री महावीर कुमार को अपने हाथों से उत्तरीय ओढ़ाते हुए कहा कि ये आचार्यश्री भिक्षु की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास करते रहें।
भिक्षु चेतना वर्ष के समापन पर की घोषणा
आचार्यश्री महाश्रमण ने सोमवार को आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी पर तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता, संस्थापक आचार्य भिक्षु के जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के अंतर्गत जारी ‘भिक्षु चेतना वर्ष’ की सम्पन्नता के अवसर पर तेरापंथ की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने तेरापंथ के भावी उत्तराधिकारी की घोषणा की। उन्होंने यह घोषणा जैन विश्व भारती स्थित सुधर्मा सभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं की विशाल संख्या के सम्मुख की। इस घोषणा के साथ ही बुलंद जयघोष के साथ पूरा प्रवचन पण्डाल गूंज उठा।
धर्मसंंघ की परम्परा का किया निर्वाह
इस अवसर पर आचार्यश्री महाश्रमण ने पूर्वाचार्यों की नियुक्ति प्रक्रियाओं का वर्णन करते हुए कहा कि यह हमारा जैन श्वेताम्बर तेरापंथ समुदाय है। इसमें वर्तमान आचार्य का यह दायित्व है कि वर्तमान के साथ ही भविष्य की व्यवस्था पर भी ध्यान दें। उसी परंपरा का निर्वाह करते हुए कहना चाहता हूं- ‘आओ मुनि महावीर!’ इसके साथ ही आचार्यश्री महाश्रमण ने युवाचार्य महावीर कुमार को उनका नियुक्ति पत्र दिखाते हुए उस पत्र की भाषा का वाचन करते हुए कहा कि ‘मैं आचार्य महाश्रमण, मैं अपने सुशिष्य मुनि महावीरकुमार को अपने उत्तराधिकारी के रूप में युवाचार्य पद पर नियुक्त करता हूं।’ इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण ने भगवान महावीर को नमन करते हुए महामना आचार्य भिक्षु स्वामी व पूर्वाचार्यों को श्रद्धायुक्त नमन करते हुए अपनी घोषणा के दौरान कहा कि आचार्यश्री भिक्षु ने जो मर्यादा, व्यवस्था दी। अतीत में आचार्य दशक सम्पन्न हुआ। आचार्यश्री तुलसी व आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने मुझे पर ध्यान दिया मुझे दायित्व दिया, उसे मैं अब तक निभाता आ रहा हूं, आगे भी निभाता रहूंगा। आज के अवसर पर मैं अपने उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा करना चाहता हूं।
आचार्य भिक्षु ने की थी तेरापंथ धर्मसंघ की स्थापना
इस धर्मसंघ में एक आचार्य की परंपरा रही है। इस परंपरा को स्वस्थ परंपरा के रूप में आगे बढाने के लिए धर्मसंघ में आचार्य अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करता है। इस धर्मसंंघ की स्थापना करीब 250 वर्षों पूर्व आचार्य भिक्षु स्वामी ने की थी। उन्होंने अपने युवाचार्य के रूप में आचार्यश्री भारमल को चुना और वे ही तेरापंथ धर्मसंघ के द्वितीय आचार्य बने। इस प्रकार तेरापंथ धर्मसंघ में यह परंपरा चली कि आचार्य अपने भावी उत्तराधिकारी का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में अथवा युवाचार्य के रूप में घोषित कर देता है। वह घोषित युवाचार्य ही आगे चलकर तेरापंथ धर्मसंघ का नेतृत्वकर्ता बन सकता है। इस परंपरा के चलते ही वर्तमान में ग्यारहवें आचार्य आचार्यश्री महाश्रमण ने यह घोषणा की है।आचार्य तुलसी के समय में ही आचार्य महाप्रज्ञ ने मुनिश्री महाश्रमण को युवाचार्य घोषित कर दिया था। आचार्य महाश्रमण अपने बालमुनि काल में मुनि मोहित कुमार थे। वे साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा के साथ भी रहे थे। वर्तमान में साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा, साध्वीवर्या और मुख्यमुनि महावीरकुमार भी व्यवस्था पक्ष से जुड़े हुए हैं।
पीएचडी कर रखी है युवाचार्य महावीर कुमार ने
तेरापंथ धर्मसंघ के मुख्य मुनि महावीर कुमार को युवाचार्य घोषित किया गया है। वे जोधपुर लोकसभा क्षेत्र के फलसूंड निवासी सवाई चंद कोचर के पुत्र हैं। मुख्य मुनि के रूप में युवाचार्य महावीर कुमार को पर्यावरणीय चिंतन सम्बंधी शोध पर पीएचडी उपाधि प्राप्त है। उन्होंने सन् 2022 में जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय से पीएचडी डिग्री प्राप्त की थी। मुख्य मुनि महावीर कुमार द्वारा लिखित शोध प्रबंध ‘जैन आगमों में पर्यावरणीय चिन्तनः एक अध्ययन’ के लिए उन्हें यह डाक्टरेट की उपाधि मिली थी। उनके इस शोध-प्रबंध के लिए कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ व प्रो. धर्मचन्द जैन जयपुर द्वारा उनका मौखिकी परीक्षण किया गया था।







