ईश्वर अन्तर्यामी है, उसी की उपासना करने योग्य है- प्रेमप्रकाश आर्य,
लाडनूं के आर्य समाज में यज्ञ व सत्संग कार्यक्रम आयोजित



लाडनूं (kalamkala.in)। आर्य समाज के यज्ञ-पुरोहित प्रेमप्रकाश आर्य ने कहा है कि ईश्वर अन्तर्यामी है और सबके दिलों की बात जानता है। हमें उसी एक ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। निराकार ईश्वर की उपासना के लिए सन्ध्या और हवन की विधि ही सर्वश्रेष्ठ है। आर्यसमाज के प्रधान डॉ. जगदीश यायावर सैनी ने कहा है कि हम सब आरती में प्रतिदिन गाते हैं, ‘तुम हो, एक अगोचर, सबके प्राणपति’ लेकिन मानने में उसे अगोचर की जगह गोचर और दृश्य-स्वरूप मान बैठते हैं, यहीं आकर गड़बड़ी होती है। हमें ईश्वर को उसके निराकार स्वरूप में ही मानना चाहिए। तारा आर्य ने एवं अन्य ने कार्यक्रम में गीत प्रस्तुत किए। लाडनूं के आर्य समाज मंदिर में आयोजित साप्ताहिक यज्ञ-सत्संग कार्यक्रम में यज्ञोपरांत प्रेमप्रकाश आर्य ने डॉ. यायावर को अपनी रचित पुस्तक ‘सत्य सनातन वैदिक धर्म प्रवेशिका’ भेंट की, जिसकी यायावर ने मुक्तकंठ सराहना कुछ और कहा कि वैदिक धर्म के प्रचार में इसका अपूर्व योगदान रहेगा। उन्होंने इसे विद्यार्थी वर्ग के लिए सर्वाधिक उपयोगी पुस्तक बताया। इस यज्ञ-सत्संग कार्यक्रम के दौरान प्रेमप्रकाश आर्य, बाबूलाल तिवाड़ी, आर्यसमाज के प्रधान डॉ. जगदीश यायावर सैनी के अलावा मंत्री महावीर आर्य स्वामी, कोषाध्यक्ष मेघाराम आर्य, हिसाब परीक्षक डॉ. राजेन्द्र सिंह आर्य, सुबोधचंद्र आर्य, यज्ञ प्रभारी तारा आर्य, प्रचार मंत्री दयानन्द साध, सुरेन्द्र प्रताप आर्य, सुमित्रा आर्य, संरक्षक ओम मुनि आर्य, पुस्तकालय अध्यक्ष अनोपचंद सांखला आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।






