सद्भावना, नैतिकता, नशामुक्ति, मैत्री भाव का जीवन में सबसे अधिक महत्व- आचार्य श्री महाश्रमण, लाडनूं में आचार्यश्री महाश्रमण का भावभीना स्वागत, भाग्य श्री में रहेगा प्रवास

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सद्भावना, नैतिकता, नशामुक्ति, मैत्री भाव का जीवन में सबसे अधिक महत्व- आचार्य श्री महाश्रमण,

लाडनूं में आचार्यश्री महाश्रमण का भावभीना स्वागत, भाग्य श्री में रहेगा प्रवास

लाडनूं (kalamkala.in)। तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अधिष्ठाता आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा है कि सबको जीवन में सद्भावना, नैतिकता, नशामुक्ति का महत्व देना चाहिए। जीवन में सभी के प्रति मैत्री भाव रखना चाहिए। जीवन में किसी के भी प्रति दुर्भावना नहीं रखें, बल्कि हमेशा सबके प्रति सद्भावना रखें। वे यहां वरिष्ठतम श्रावक एवं जैन विश्व भारती के संरक्षक भागचंद बरड़िया के निवास ‘भाग्य श्री’ में पदार्पण के बाद आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित कर रहे थे। हजारों की संख्या में आए लोगों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म वह होता है, जिससे चेतना शुद्ध बने और आत्मा शुद्ध बने। आचार्यश्री ने कहा कि ईमानदारी जीवन में होने से जीवन में निर्मलता रहती है। झूठ, कपट, चोरी से बच कर रहना ही ईमानदारी हैे। इस कोई धर्म माने या नहीं, लेकिन ईमानदारी, संयम और अहिंसा के गुण सबके लिए कल्याणकारी ही होते हैं। मानव मात्र के लिए यह हितकर है।

अणुव्रत है सर्वस्वीकार्य नैतिक आचरण

आचार्य श्री महाश्रमण ने बताया कि आचार्य तुलसी प्रणीत अणुव्रत का संदेश सभी के लिए था, केवल जैनों के लिए नहीं। अणुव्रत जैन-अजैन सबके लिए हैं। उन्होंने उपासनात्मक और आचरणात्मक धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि आचरण में धर्म को होना आवश्यक है। अणुव्रत आचरण का ही धर्म है। उन्होंने अणुव्रतों को सब व्यवसायों में पालन जरूरी बताया और कहा कि कुछ भी करेा और कहीं भी जाओ, जीवन में अणुव्रत अवश्य रखें। यह मानव मात्र के लिए यह है। अपने मनोबल और संकल्प मजबूत रखें। संकल्प और मनोबल हो तो आदमी को सब संभव है। गृहस्थ हो और शत-प्रतिशत ईमानदारी नहीं रख सकते तो भी कठिनाइयां सह कर भी ईमानदारी रखनी चाहिए। विश्वास रखें कि अंतिम विजय ईमानदारी की ही होगी। अहिंसा व मैत्री की भावना प्राणी मात्र में रखें। ईमानदारी को व्यापक बनाएं। हर क्षेत्र में ईमानदारी रहे। बेईमानी का पैसा अशुद्ध व पाप का पैसा है। ऐसा पैसा घर में नहीं आए, यह ध्यान रखना है। तभी आर्थिक शुचिता होती है। यह सद्गुण की बात है। राजनीति हो या प्रशासन का क्षेत्र हो, सेवा का माध्यम रखें, ईमानदारी और अहिंसा की भावना जरूरी है। ईमानदारी, अहिंसा, मैत्री भाव और संयम जीवन में बहुत महत्व की बात है। कपड़े केवल शरीर की सुरक्षा व ढकने के लिए है। शरीर का इतना महत्व नहीं है, लेकिन ज्ञानवता अधिक महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार आभूषणों के बजाय चारित्र भूषण और संन्यास, सद्गुण के आभूषण महत्वपूर्ण है।

नन्हीं बालिका ने दी शानदार प्रस्तुति

इस अवसर पर जैन विश्व भारती के मंत्री सलिल लोढ़ा, आचार्य श्री महाश्रमण योगक्षेम वर्ष प्रवास समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद, दिगम्बर जैन समाज के चांदकपूर सेठी, तेरपंथ केे राजेन्द्र खटेड़, भारत विकास परिषद के प्रांतीय कोषाघ्यक्ष पुरुषोत्तम सोनी एवं एडवोकेट्स एसोसियेशन के हरीश मेहरड़ा ने अपने विचार रखते हुए आचार्य श्री महाश्रमण का स्वागत किया। मुनि श्रीश्रेयांश कुमार स्वामी ने मधुकर मुनि रचित गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में भागचंद बरड़िया की नन्हीं दौहित्री ने शानदार प्रस्तुति दी। इसके अलावा बरड़िया परिवार की महिलाओं ने भी प्रशस्ति गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि श्री दिनेश कुमार ने किया। इस अवसर पर भागचंद बरड़िया, प्रवीण बरड़िया, प्रमोद बैद, निर्मल कोटेचा, अमरचंद लूंकड़, प्रो. बच्छराज दूगड़, राजेन्द्र खटेड़ आदि के अलावा बड़ी संख्या में महिला-पुरूष उपस्थित रहे।

स्वागत को आतुर हजारों लोगों की उमड़ी भीड़

यह विशेष अवसर रहा, जब लाडनूं के अधिकांश लोग आचार्य श्री महाश्रमण के दर्शनार्थ एवं स्वागत के लिए उमड़ पड़े। योगक्षेम वर्ष के लिए करीब एक साल के प्रवास के लिए लाडनूं पधारे आचार्य श्री महाश्रमणन ने गुरूवार को लाडनूं में मंगलप्रवेश किया। सैंकड़ों की संख्या में महिलाओं ने इस अवसर पर सज-धज कर एवं बढ-चढ कर भाग लिया। एक सी ड्रेस पहने हुए ये कतारबद्ध महिलाएं शोभायात्रा की वास्तविक शोभा रही। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ एवं समस्त शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टाफ ने इस अगवानी और शोभायात्रा में भाग लिया। जैन विश्व भारती के पदाधिकारीगण एवं विभिन्न स्कूलों के शिक्षक व विद्यार्थी भी लाडनूं के विभिन्न जाति समुदायों के लोगों के साथ शोभायात्रा में सम्मिलित हुए। आचार्य श्री महाश्रमण ने मंगलपुरा से प्रस्थान करके डीडवाना रोड स्थित फ्लाईओवर के पास बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी अगवानी की। इसी तरह से डाढाली करणी माता मंदिर परिसर में भी आचार्य श्री महाश्रमण का स्वागत किया गया। वहां से चलने के बाद श्रीरामआनन्द गौशाला, एमएन घोड़ावत होस्पिटल, जाजू स्टोर पर भी उनका स्वागत किया गया। यहां से वे राहूगेट व सुखसदन होते हुए ‘भाग्य श्री’ पहुंचे। भाग्य श्री में उनका रात्रि विश्राम प्रवास रहेगा। शुक्रवार को प्रातः उनका यहां से प्रस्थान होकर जैन विश्व भारती स्थित महाश्रमण विहार में मंगल प्रवेश होगा।

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Author: kalamkala

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