स्मार्ट मीटर नहीं लगाने देंगे किसान, जबरदस्ती की तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहने की चेतावनी,
लाडनूं में बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति व किसानों ने बैठक की, प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा



लाडनूं (kalamkala.in)। विद्युत वितरण निगम की ओर से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों के खिलाफ बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति और अखिल भारतीय संयुक्त किसान मोर्चा ने बैठक की, प्रदर्शन किया और ज्ञापन देकर अपना विरोध जताया।किसानों की यह बैठक यहां तहसील के सामने स्थित वीर तेजा किसान छात्रावास में यह बैठक गोपीराम बिजारणियां की अध्यक्षता में हुई। बैठक में पूर्व सरपंच मोहन राम जानूं, डा. परसराम बैंदा, आशाराम खिलेरी, रामकरण पूनियां, शक्तिदान गोरेड़ी, रुपाराम गोरा, सोहनराम राड़, रामनिवास मिर्धा, जगदीश पोटलिया, सुरजाराम भाकर, जगदेव बेड़ा, तेजपाल गोदारा, छगनाराम गर्वा, गोपालराम पूनिया, कैलाश प्रसाद शर्मा, मो. मुश्ताक खान कायमखानी आदि उपस्थित रहे।
बैठक में सभी वक्ता सरकार के खिलाफ गरजे
बैठक में सभी वक्ताओं ने स्मार्ट मीटर योजना, विद्युत निगम के निजीकरण और किसानों की अन्य समस्याओं को लेकर राज्य सरकार की नीतियों का जमकर विरोध जताया। किसान नेताओं ने स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता को हटाने की मांग उठाई और कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा बिना सहमति आम उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर थोपे जा रहे हैं, जबकि पुराने मीटर सही ढंग से कार्य कर रहे हैं। ठेका कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उपभोक्ताओं को लूटा जा रहा है। ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि स्मार्ट मीटर योजना में स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जाये, सरकार विद्युत विभाग और विद्युत वितरण निगम का निजीकरण बन्द करें, स्मार्ट मीटर योजना में स्मार्ट मीटर किसी भी सूरत में नहीं लगाने देंगे। अगर सरकार दबाव बनायेगी, तो जनता मुंहतोड़ जवाब देगी। स्मार्ट मीटर व बिजली के निजीकरण के जनता खिलाफ है। सरकार ध्यान दे, अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
खेतों में टावर लगाने और हाईटेंशन लाईनें बिछाने को लेकर भी बोले वक्ता
वक्ताओं ने हाईटेंशन लाइन एवं टावर फाउंडेशन निर्माण के बारे में बताया कि प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से किसानों पर दबाव डालकर जबरन भूमि पर टावर और हाईटेंशन लाइनें बिछाई जा रही हैं। पहले तय हुए मुआवजे की राशि भी कई किसानों को नहीं दी गई है। इसके अलावा खेती की बर्बादी एवं मुआवजा के बारे में कहा गया कि लाडनूं तहसील के चेजा पत्थर भंडार क्षेत्र की उपजाऊ भूमि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिसमें जिला प्रशासन भी सहयोगी भूमिका निभा रहा है।
वर्ष 2022-23 में हुए फसल नुकसान के मुआवजे से भी कई किसान वंचित रह गए हैं। खरीफ सीजन के लिए स्वीकृत मुआवजा राशि अब तक खातों में नहीं डाली गई है।
ज्ञापन दिए, प्रदर्शन किया
बाद में किसानों ने तहसील पहुंच कर नायब तहसीलदार हेतराम सारण और विद्युत विभाग के एक्सईएन आरसी जांगलवा को अपने ज्ञापन सौंपे। बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति एवं अखिल भारतीय संयुक्त किसान मोर्चा ने दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। ये ज्ञापन जिला कलेक्टर, मुख्यमंत्री और अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक के नाम से दिए गए। ज्ञापन देने के बाद किसानों ने तहसील परिसर में राज्य सरकार के खिलाफ खूब नारेबाजी की। ज्ञापन में स्मार्ट मीटर योजना और निजीकरण को तुरंत बंद करने की मांग की गई। साथ ही सरकार को सबक सिखाने की चेतावनी भी दी गई है। अखिल भारतीय संयुक्त किसान मोर्चा के ज्ञापनमें 2022-23 का मुआवजा दिलाने और खरीफ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की आपत्तियां हटाने समेत सात प्रमुख मांगें रखी गईं।







