आचार्य तुलसी के अनगिन आयामों को शब्दों में बांधना मुश्किल- मुनिश्री जयकुमार, आचार्य तुलसी की 111वीं जयंती पर जन्मभूमि भवन व ऋषभद्वार में आचार्य तुलसी जन्मोत्सव कार्यक्रम आयोजित

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आचार्य तुलसी के अनगिन आयामों को शब्दों में बांधना मुश्किल- मुनिश्री जयकुमार,

आचार्य तुलसी की 111वीं जयंती पर जन्मभूमि भवन व ऋषभद्वार में आचार्य तुलसी जन्मोत्सव कार्यक्रम आयोजित

जगदीश यायावर। लाडनूं (kalamkala.in)। तेरापंथ धर्मसंघ के नौवें आचार्य रह चुके गणाधिपति गुरुदेव तुलसी के 111वें जन्म-दिवस के उपलक्ष में यहां क्रमशः दो स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। दूसरी पट्टी स्थित आचार्य तुलसी के जन्मस्थल भवन में उनके संसारपक्षीय खटेड़ परिवार द्वारा मुनि रणजीतकुमार एवं मुनि जयकुमार के सान्निध्य में कार्यक्रम आयोजन किया गया। इसी प्रकार पहली पट्टी स्थित ऋषभद्वार भवन में भी शासन गौरव साध्वीश्री कल्पलता एवं साध्वीश्री प्रमिलाकुमारी के सान्निध्य में अणुव्रत दिवस के रूप में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

तुलसी जन्म से ही नहीं, कर्म से भी महान थे

आचार्य तुलसी जन्मस्थली पर हुए कार्यक्रम में तपस्वी मुनिश्री जय कुमार ने कहा कि व्यक्ति में जितनी भी विशेषताएं हो सकती हैं, उन सभी विशेषताओं को हम गुरुदेव तुलसी में देखते हैं। उनके अनगिनत आयाम हैं, जिन्हें शब्दों में बांधना नामुमकिन है। मुनिश्री रणजीत कुमार ने कहा कि खटेड़ परिवार के प्रांगण में हम उनका जन्मदिवस मना रहे हैं। गुरुदेव तुलसी जन्म से भी महान थे और कर्म से भी महान थे। आचार्य तुलसी के संसारपक्षीय पौत्र प्रदीप मनोज ने इस अवसर पर गीतिका प्रस्तुत की। जैन विश्व भारती पूर्व मंत्री अरविंद गोठी एवं अणुव्रत समिति से शांतिलाल बैद ने भी अपनी अभिव्यक्ति दी। मुनि तन्मय कुमार ने गीतिका प्रस्तुत की। प्रारंभ में तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने मंगलाचरण किया। कार्यक्रम में काफी संख्या में खटेड़ परिवार व अन्य महिला-पुरुषों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन आचार्य तुलसी के संसारपक्षीय पौत्र राजेंद्र खटेड़ ने किया।

युग-परिवर्तन के लिए अपनी जिंदगी खपा दी

ऋषभद्वार में हाकम साध्वी प्रमिला कुमारी ने कहा, जिसमें परोपकारिता, सृजनशीलता, सहनशीलता होती है, वही श्रेष्ठ मानव होता है। आचार्य तुलसी के अनेक अवदान है, जिसमें अणुव्रत ऐसा अवदान है, जो पूरी मानव जाति के लिए उपयोगी है। आचार्य तुलसी की संसारपक्षीय बहिन ‘शासन गौरव’ साध्वी कल्पलता ने कहा कि द्वितीया के अद्वितीय चांद का हम जन्मदिन मना रहे हैं। आचार्य तुलसी ने युग में सार्थक बदलाव लाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी खफा दी। उन्होंने तेरापंथ को जैन धर्म का अंग बना दिया। तेरापंथी सभा के मंत्री राकेश कोचर, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष सुमित मोदी, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के अध्यक्ष शोभन कोठारी, अणुव्रत समिति के संरक्षक प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी, शांतिलाल बैद, सुरेश मोदी, पार्षद रेणु कोचर एवं सुनीता बैद ने आचार्य तुलसी की अभ्यथर्ना में अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। आचार्य तुलसी के संसारपक्षीय पौत्रगण ने गीतिका के माध्यम से श्रद्धा अभिव्यक्त की। साध्वी शशिप्रभा, तेजसप्रभा ने भाव व्यक्त किये। सेवाकेंद्र से साध्वियों ने सामूहिक गीतिका प्रस्तुत की। प्रारंभ में तेरापंथ महिला मंडल की बहनों द्वारा मंगलाचरण किया गया। कार्यक्रम का संयोजन तेरापंथ सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र खटेड़ ने किया। दोनों स्थानों के कार्यक्रमों में जैन विश्व भारती के पूर्व अध्यक्ष धर्मचंद लूंकड़ भी उपस्थित रहे।

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Author: kalamkala

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