देश की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखना एक चुनौती पूर्ण कार्य- विक्की नागपाल (पुलिस उप अधीक्षक),
टैगोरियंस ने विजय दिवस का आयोजन कर कारगिल वीरों को किया नमन



लाडनूं (kalamkala.in)। टैगोर सीनियर सैकेण्डरी स्कूल, निम्बी जोधा में कारगिल विजय दिवस कार्यक्रम में कारगिल शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया गया।कार्यक्रम में प्रमुख वक्ताओ के रूप में पूर्व जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल राजेंद्र सिंह जोधा एवं पुलिस उप अधीक्षक विक्की नागपाल लाडनूं की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम मे सभी वक्ताओं का माल्यार्पण, साफा बंधन एवं प्रतीक चिह्न भेंटकर स्वागत-सम्मान किया गया।
‘राष्ट्र प्रथम’ का दिया संदेश
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डीवाईएसपी विक्की नागपाल ने बताया कि स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाए रखना अपने आप में एक चुनौती है। उन्होंने साइबर अपराध और सड़क सुरक्षा पर विशेष व्याख्यान दिया। कर्नल जोधा ने कारगिल युद्ध में नागौर जिले के शहीद हुए सैनिकों के अदम्य साहस एवं पराक्रम से छात्रों को अवगत कराया तथा युद्ध काल में देश की जनता की विशेष भूमिका पर प्रकाश डालते हुए ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश देकर सभी में राष्ट्रभक्ति का संचार किया। संस्था निदेशक गुलाब सिंह शेखावत ने 3 मई से 26 जुलाई 1999 तक चले कारगिल युद्ध को विश्व का प्रथम अद्भुत, अनोखा, शौर्य एवं पराक्रम से परिपूर्ण युद्ध बताया। शेखावत ने बताया कि भारतीय सैनिकों ने लगभग 6000 फीट ऊंची दुर्गम पहाड़ी चोटियों पर काबिज शत्रु सैनिकों को नीचे से ऊपर चढ़कर धूल चटाई। कारगिल युद्ध में प्रथम शहीद कैप्टन सौरभ कालिया, कैप्टन मनोज पांडे और परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा जैसे 527 वीरों की शहादत से ऑपरेशन विजय के द्वारा फिर से हिमालय की भारतीय चोटियों पर तिरंगा लहराया।
एनसीसी कैडेट्स को दिए ‘ए’ सर्टिफिकेट
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अतिथियों द्वारा विद्यालय के एनसीसी कैडेट्स को ‘ए’ सर्टिफिकेट प्रदान किए गए एवं छात्रों में देश भक्ति की भावना को प्रेरित किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया एवं समापन पर सभी ने कारगिल शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर प्रधानाचार्य सूर्यप्रकाश सिखवाल, महेंद्र सिंह देवल, प्राचार्या नीतू शर्मा, कॉलेज के प्राचार्य बाबूलाल कण्डावरिया, एनसीसी अधिकारी रविंद्र सिंह जोधा एवं अन्य सभी स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता रतिराम थोरी ने किया।







