
लाडनूं में लम्बे समय से अवैध निर्माणों की भरमार, नगर पालिका को करोड़ों का घाटा, कब चलेगा पीला पंजा,
यह थे हाल-
सिकुड़ चुकी शहर की सड़कें, बदल चुकी जमीनों की किस्म, अधिकारियों-कर्मचारियों की पौबारह, शिकायतकर्ता व पार्षद लाचार,
अवैध कार्यों पर अब शुरू हुए एक्शन से क्या संभव हो पाएगी राहत की सांस, नगर पालिका ने दिए पांच लोगों को दिए बिना अनुज्ञा अवैध निर्माण सम्बंधी नोटिस
लाडनूं। शहर भर में लगातार बढ रहे अवैध निर्माण कार्यों एवं अतिक्रमणों की गतिविधियों पर नियंत्रण एवं सक्षम कार्यवाही किए जाने के लिए बनाई गई टीम की रिपोर्ट के आधार पर अनेक लोगों को नोटिस जारी करके अवैध निर्माण कार्यों को रोके जाने के आदेश दिए गए हैं। अभी तक मात्र 5 लोगों को ऐसे नोटिस जारी किए गए हैं, शेष अवैध निर्माण व अतिक्रमणों की रिपोर्ट मिलने पर उन सबको भी नोटिस दिए जाएंगे। शहर में बिना भूकिस्म के परिवर्तन के बिना और नगर पालिका से नक्शा पास करवाए बिना तथा मनमाने ढंग से धड़ल्ले से अवैध निर्माण करवाए जा रहे हैं।
निर्माण ध्वस्त करके वसूलेंगे जुर्माना
अधिशासी अधिकारी सुरेन्द्र सिंह मीणा के अनुसार नगर पालिका की इजाजत-तामीर प्राप्त किए बिना और बिना वैधानिक अनुज्ञा के अवैध रूप से मनमाने तरीके से निर्माण कार्यों को अंजाम देने की प्रक्रिया जारी रखे जाने पर नगर पालिका की ओर से मो. शाकिर पुत्र अब्दुल कुरैशी, बजरंग पुत्र सुखदेव, रामलाल पुत्र चान्दमल, रमेश पंसारी एवं गुलाब दूगड को तत्काल प्रभाव से अवैध निर्माण कार्य को बंद करने के नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस के अनुसार अगर अवैध निर्माण तत्काल प्रभाव से निर्माण बंद नहीं किए गए तो उनके विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। नगर पालिका के नियमानुसार इन सभी अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जाकर हर्जा-खर्चा उनसे वसूल किया जाएगा।
अवैध निर्माणों से हो रहा है नगर पालिका को भारी नुकसान
गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों से नगर पालिका की अनदेखी, लापरवाही या मिलीभगत के चलते ऐसे अवैध निर्माण कार्यों की शहर भर में बाढ सी आ गई थी। बेतरतीब ढंग से बढते निर्माण एवं अवैध रूप से रास्ते में आगे बढ कर करवाए जा रहे अतिक्रमण निर्माण की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही थी। केवल विभिन्न वार्डों में ही नहीं बल्कि शहर मुख्य बाजारों व प्रमुख सड़कों पर भी सभी नियमों और कानून-कायदों को ताक पर रख कर धड़ल्ले से अवैध कॉम्प्लेक्स और मकान, दुकान और अन्य व्यावसायिक निर्माण कार्य अवैध रूप से करवाए जा रहे थे। भवन निर्माण कार्य सम्बंधी अनुज्ञा प्राप्त करने में नगर पालिका को भवन निर्माण सम्बध्ंाी आय के अलावा आबादी से व्यावसायिक किस्म में अथवा कृषि भूमि से आबादी भूमि में किस्म परिवर्तन आदि भूमि के रूपांतरण सम्बंधी भारी आय का भी नुकसान नगर पालिका को उठाना पड़ रहा था।
शिकायतों पर रहा पालिका प्रशासन मौन
इस सम्बंध में नगरपालिका के कतिपय पार्षदों द्वारा भी जिला कलेक्टर को पत्र भेजा गया था। नगर पालिका को शहर में बनने वाली अवैध इमारतों और अतिक्रमणों की शिकायतों के सम्बंध में प्राप्त विभिन्न शिकायतों पर भी पालिका प्रशासन मौन बना हुआ था और किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाही नहीं की जा रही थी। पार्षदों द्वारा इसे स्पष्टतः नगर पालिका के प्रशासन की सांठगांठ बताई जा रही है। अब नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र सिंह मीणा द्वारा पदभार संभाले जाने के बाद कुछ सख्त एक्शन शुरू किए गए हैं। ईओ मीणा ने इस सम्बंध में कतिपय कार्मिकों की टीम गठित की जाकर निगरानी को चुस्त-दुरूस्त बनाने और सक्षम कार्यवाही किए जाने का मार्ग प्रशस्त किया है।







