लाडनूं की विवादग्रस्त कुर्कसुदा भूमि को हाईकोर्ट ने किया कुर्की से मुक्त, थानाधिकारी लाडनूं ने अपना कब्जा हटा कर पूर्व भू-धारक के किया सुपुर्द, खानपुर फाटक से आगे हाईवे पर सुजानगढ़ मार्ग की 190 बीघा बेशकीमती भूमि को बताया जा रहा था आनंदपाल की बेनामी भूमि, कुर्की की कार्रवाई व्यक्तिगत खुन्नस निकालने की कवायद ठहरी

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लाडनूं की विवादग्रस्त कुर्कसुदा भूमि को हाईकोर्ट ने किया कुर्की से मुक्त, थानाधिकारी लाडनूं ने अपना कब्जा हटा कर पूर्व भू-धारक के किया सुपुर्द,

खानपुर फाटक से आगे हाईवे पर सुजानगढ़ मार्ग की 190 बीघा बेशकीमती भूमि को बताया जा रहा था आनंदपाल की बेनामी भूमि, कुर्की की कार्रवाई व्यक्तिगत खुन्नस निकालने की कवायद ठहरी

लाडनूं (kalamkala.in)। स्थानीय पुलिस ने यहां हाईवे पर खानपुर रेलवे फाटक से सुजानगढ़ जाने वाले रोड पर बेशकीमती 190 बीघा भूमि से पूर्व में लगाए गए बोर्ड हटाए हैं और इस जमीन को थानाधिकारी लाडनूं ने अपने कब्जे से मुक्त करते हुए पूर्व भूमिधारक को वापस सुपुर्द करने की कार्रवाई की है। यह जमीन कुछ साल पूर्व तथाकथित निर्मल भरतिया सुजानगढ़ और आनंदपाल सिंह सांवराद की बताई जाकर लाडनूं पुलिस व प्रशासन द्वारा आनन-फानन में कार्रवाई की जाकर धारा 145 व 146 के तहत कुर्क किया जाकर रिसीवर थानाधिकारी लाडनूं के सुपुर्द की गई थी। अब इसे राजस्थान हाईकोर्ट ने स्थगित करते हुए उस जमीन का कब्जा वापस भू-स्वामी को सौंपने के आदेश थानाधिकारी लाडनूं को दिए हैं, जिसकी पालना पुलिस द्वारा की गई है‌।

हाईकोर्ट से जारी हुए आदेशौं की हुई पालना

राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति फरजंद अली ने सुनवाई के बाद जारी अपने आदेश में बताया है कि 18 अगस्त 2023 का आदेश स्थगित रहेगा तथा एसएचओ, लाडनूं को निर्देश दिया जाता है कि वे संपत्ति का कब्जा उसी पक्ष को वापस सौंप दें, जिससे उन्होंने इसे प्राप्त किया था। इस आदेश का अनुपालन पुलिस अधीक्षक, डीडवाना-कुचामन की निगरानी में किया जाएगा तथा वे इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे, ताकि अवमानना ​​कार्यवाही शुरू न हो तथा न्यायालय के आदेश का सम्मान भी हो। हाईकोर्ट में इस याचिका ‘एस.बी. आपराधिक विविध (याचिका) संख्या 2572/2024’ को याचिकाकर्ता सराज खान कायमखानी व खुर्शीद हुसैन ने राजस्थान राज्य के विरुद्ध प्रस्तुत किया था। इन याचिकाकर्ताओं के लिए एडवोकेट देवेन्द्र महलाना औशर प्रतिवादियों के लिए जीए विक्रम सिंह राजपुरोहित व रविन्द्र ने पैरवी की। इसकी सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति फरजंद अली ने गत 6 दिसम्बर को आदेश जारी कि। इसमें उन्होंने इस मामले को विधि प्रक्रिया के दुरुपयोग बताया है और लिखा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि तत्कालीन एसएचओ को याचिकाकर्ताओं से व्यक्तिगत रंजिश थी और इसीलिए उन्होंने सीआरपीसी की धारा 145 और 146 की आवश्यकता को पूरा किए बिना एसडीएम लाडनूं के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। यह शिकायत 26 जुलाई 2016 को खारिज कर दी गई थी। जिससे व्यथित होकर एसएचओ ने एक पुनरीक्षण याचिका प्रस्तुत की, जो अभी भी अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, लाडनूं की अदालत में लंबित है। इस पुनरीक्षण याचिका के लंबित रहने के दौरान ही एसडीएम लाडनूं के समक्ष पुनः एक नई शिकायत दायर की गई। तब वे किसी तरह से मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कार्यपालक मजिस्ट्रेट को राजी करने में सफल रहे। इस प्रकार 18 अगस्त 2023 को आदेश पारित किया गया, जो कानूनी प्रावधान और कानून के प्रस्ताव की पूरी तरह से अवहेलना करते हुए पारित किया गया।

निंदा से पूर्व हाईकोर्ट ने दिया तत्कालीन थानेदार व एसडीएम को सुनवाई का मौका

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति फरजंद अली ने अपने आदेश में लिखा है कि किसी भी टिप्पणी को पारित करने और किसी अधिकारी की निंदा करने से पहले उसे सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए, इसलिए तत्कालीन एसडीएम लाडनूं, जिन्होंने 18 अगस्त 2023 को आदेश पारित किया था तथा तत्कालीन एसएचओ, लाडनूं को अगली सुनवाई की तारीख पर हाईकोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। जिसमें वे स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर सकेंगे कि उनके खिलाफ उचित कार्रवाई क्यों नहीं की जावे?

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Author: kalamkala

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