लाखों लोगों को क्षात्र धर्म के मार्ग पर चलने का शिक्षण दिया भगवान सिंह रोलसाहबसर ने, श्री क्षत्रिय युवक संघ ने अपने चतुर्थ संघ प्रमुख श्रद्धेय भगवानसिंह रोलसाहबसर की जयंती मनाई

SHARE:

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

लाखों लोगों को क्षात्र धर्म के मार्ग पर चलने का शिक्षण दिया भगवान सिंह रोलसाहबसर ने,

श्री क्षत्रिय युवक संघ ने अपने चतुर्थ संघ प्रमुख श्रद्धेय भगवानसिंह रोलसाहबसर की जयंती मनाई

लाडनूं (kalamkala.in)। श्री क्षत्रिय युवक संघ के चतुर्थ संघ प्रमुख पूज्य भगवानसिंह रोलसाहबसर की जयंती का कार्यक्रम 1 फ़रवरी रविवार को लाडनूं प्रांत के लाडनूं के बस स्टेंड स्थित बगड़ा भवन में आयोजित किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत पूज्य तनसिंह की तस्वीर पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। मंगलाचरण मोहन सिंह रताऊ द्वारा करवाया गया तथा प्रार्थना गोपाल सिंह सिंघाना ने और सहगीत दशरथ सिंह ढींगसरी ने करवाया। सभी उपस्थित समाज बंधुओं ने उऊ पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर विक्रमसिंह ढींगसरी ने पूज्य भगवान सिंह के जीवन पर प्रकाश डाला और बताया कि उनका जन्म 2 फ़रवरी 1944 को मेघसिंह एवं माता गोम कंवर के घर हुआ। बचपन अभावों में बीता, परन्तु संस्कारों से समृद्ध बने। उनके पूज्य तनसिंह के 1961 में संपर्क मे आने के बाद वे पूर्णतः संघमय हो गए। वे 1989 से 2021 तक क्षत्रिय युवक संघ के संघ प्रमुख रहे। उनके समय में श्री क्षत्रिय युवक संघ में बालिका शिविर, दंपति शिविर, आलोक आश्रम व अनेक स्थानों पर कार्यालय स्थापित हुए। सामाजिक समरसता का भाव इनकी विशिष्ट पहचान थी।आजीवन क्षात्र धर्म के अनुसार जीवन जीकर इस भौतिकतावाद के युग में हमेशा कमल की तरह जीवन बिताया। आखिरी समय तक वे समाज सेवा व राष्ट्र सेवा में लगे रहे व असली क्षत्रिय का जीवन जीकर लाखों बंधुओं को क्षात्र धर्म के मार्ग पर चलने का शिक्षण दिया। राजेन्द्र सिंह धोलिया ने पूज्य भगवान सिंह द्वारा बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता बताई व महापुरुषों का जीवन परोपकार के लिए होता है। रविन्द्र सिंह छपारा ने शिक्षा और उसके साथ संस्कारों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला व संस्कृति व संस्कार अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य पूज्य भगवान सिंह ने किया। वह हम सबको भी करना है। नरपतसिंह रताऊ ने समय की पाबंदी व अपनी जिम्मेदारी लेने की आवश्यकता बताई।कार्यक्रम के व्यवस्थापक मोहनसिंह लाडनूं, हुकम सिंह गनोड़ा, देवेन्द्र सिंह लाछड़ी, कल्याण सिंह मणूं, रमेश सिंह दुजार, मनोहर सिंह सांवराद, रविन्द्र सिंह दुजार, शेरसिंह हुडास, गोविन्द सिंह कसुम्बी, छत्रपाल सिंह, भगवान सिंह रताऊ, जगदीश सिंह सिंघाना, रविन्द्र सिंह, रूपसिंह, गिरवरसिंह आदि अनेक समाज बंधुओं एवं क्षत्राणियों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

kalamkala
Author: kalamkala

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सबसे ज्यादा पड़ गई

जैन विश्व भारती में विरल जैन दीक्षा समारोह का आयोजन, मुमुक्षु सलोनी व मुमुक्षु खुशी ने गुरुदेव से स्वीकारा संयम जीवन, मात्र दो घंटे पूर्व की घोषणा पर ग्रहण किया संन्यास, मुमुक्षु सलोनी नखत से बनी साध्वी सुकृतप्रभा

आत्मशुद्धि के लिए अहिंसा की आराधना, संयम की साधना और तप का आसेवन जरूरी- आचार्यश्री महाश्रमण, लाडनूं के विभिन्न संस्था-संगठनों ने किया ने आचार्य श्री महाश्रमण का नागरिक अभिनंदन, 2028 में रहेगा आचार्य श्री महाश्रमण का हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, मसूरी का पदभ्रमण