केवल सैनी समाज ही नहीं पूरे राष्ट्र के लिए अनुकरणीय हैं महाराजा सैनी- सांखला, समारोहपूर्व मनाई गई महाराजा सैनी की जयंती

SHARE:

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

केवल सैनी समाज ही नहीं पूरे राष्ट्र के लिए अनुकरणीय हैं महाराजा सैनी- सांखला

समारोहपूर्व मनाई गई महाराजा सैनी की जयंती

लाडनूं। महाराजा सैनी संस्थान के तत्वावधान में यहां सैनी वंश के प्रवर्तक महाराजा सैनी की जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। पार्षद सुमित्रा आर्य के निवास पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता समाजसेवी भंवरलाल चैहान ने की। मुख्य अतिथि पूर्व सरंपच दुलीचंद सांखला थे एवं विशिष्ट अतिथि सैनी समाज के पूर्व अध्यक्ष भंवर लाल महावर थे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व सरपंच दुलीचंद सांखला ने कहा कि यह अत्यंत गौरव की बात है कि महाराजा सैनी के कुल से हमारा सैनी समाज है। उनकी जयंती की इस शुरूआत को अब रूकने नहीं देना चाहिए और पूरे लाडनूं तहसील के सभी गांवों के लोगों को सामुहिक रूप से यह जयंती महोत्सव मनाने के लिए एकजुट होना चाहिए। उन्होंने महाराजा सैनी संस्थान द्वारा की गई यह पहल सबकेे लिए अनुकरणीय बताया। गुलाबचंद चैहान ने बताया कि लाडनूं में पहली बार महाराजा सैनी की जयंती मनाई जा रही है। यह भविष्य में भी मनाई जाती रहनी चाहिए। पूनमचंद मारोठिया ने महाराजा सैनी को प्रेरणास्पद व्यक्तित्व बताया तथा कहाकि पूरे समाज को ही नहीं बल्कि समूचे राष्ट्र को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। भंवरलाल महावर ने कहा कि भगवान राम के रघुकुल से आगे की वंशावली मंे हुए महाराजा सैनी के वंश से होने से हम सभी गौरवान्वित हैं। हमें महारजा सैनी की जयंती को वृह्द रूप से मनानी चाहिए। इससे पूर्व महाराजा सैनी संस्थान के संयोजक जगदीश यायावर ने महाराजा सैनी के जीवन, शासन, वंश परम्परा, उनके कर्तृत्व के बारे में बताया और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। भंवरलाल चैहान ने महाराजा सैनी के आदर्शों को जीवन में धारण करने के लिए प्रेरित किया। अंत में पार्षद सुमित्रा आर्य ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम में सागरमल भाटी, प्रेमसुख तंवर, महावीर प्रसाद तंवर, रामलाल टाक, विकास चैहान, भोलाराम सांखला, पुखराज चैहान, शुभकरण चैहान, विनोद चैहान, सोहनलाल परिहार, रामावतार टाक, हरजी सैनिक, चम्पालाल टाक, गौरीशंकर टाक, हस्तीमल, हरिओम, भीमसिंह सैनी, शेरसिंह सैनी, लालो टाक, गीतादेवी सांखला, सुमन पंवार, मूली देवी सांखला, सावित्री देवी आर्य, शारदा परिहार, सरिता परिहार, आशादेवी, संतरा टाक, गीता देवी टाक आदि उपस्थित रही।

 

kalamkala
Author: kalamkala

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सबसे ज्यादा पड़ गई

नौ करोड़ राजस्थानियों की अस्मिता की प्रतीक राजस्थानी भाषा को अविलंब मिले संवैधानिक मान्यता- राजेश विद्रोही, उर्दू के ख्यातनाम शायर का खुला विद्रोह, अब केवल और केवल लिखेंगे राजस्थानी में, अद्भुत संकल्प-शीघ्र मिले मान्यता

शहर चुनें

Follow Us Now