अपार ज्ञान में से सारभूत और उपयोगी ज्ञान ग्रहण करने की दिशा में मनुष्य प्रयासरत रहें- आचार्यश्री महाश्रमण,
लाडनूं में तेरापंथ के अधिष्ठाता ने नियमित प्रवचन में ज्ञान की आराधना पर दिया जोर


लाडनूं (kalamkala.in)। तेरापंथ धर्मसंघ के अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा है कि जीवन का परम लक्ष्य मोक्ष होना चाहिए और ज्ञान की आराधना में प्रत्येक व्यक्ति को अपने समय का सुव्यवस्थित नियोजन करना चाहिए। वे जैन विश्व भारती परिसर में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। योगक्षेम वर्ष के शुभारंभ के उपरांत प्रतिदिन सुधर्मा सभा में आचार्यश्री महश्रमण से श्रद्धालु जनता के साथ गुरुकुलवास में पहुंचे सैकड़ों साधु-साध्वियां एवं समण-समणियां भी आध्यात्मिक पाथेय ग्रहण कर रहे हैं। रविवार को अपने प्रवचन में आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा कि आगमों में मोक्ष, निर्वाण और मुक्ति की व्यापक चर्चा है। मोक्षमार्ग को ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप, इन चार अंगों से युक्त बताया गया है। ज्ञान से जीव पदार्थों को जानता है, दर्शन से श्रद्धा करता है, चारित्र से कर्ममार्ग को निरुद्ध करता है और तप से आत्मा का परिशोधन करता है।उन्होंने कहा कि ज्ञान स्वयं में परम पवित्र तत्व है, परंतु संसार में ज्ञान अपार है। ऐसे में मनुष्य को सारभूत और उपयोगी ज्ञान को ग्रहण करने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिए।
अपने समय का एक अंश नियमित अध्ययन और आत्मचिंतन के लिए नियोजित करें
आचार्यश्री महाश्रमण ने आगम साहित्य के सम्मान और संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि पुस्तकों को ज्ञान का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए उनका आदर करना चाहिए। उन्होंने प्रेरित किया कि सभी अपने समय का एक अंश नियमित रूप से अध्ययन और आत्मचिंतन के लिए नियोजित करें। प्रवचनोपरांत अनेक चारित्रात्माओं ने अपनी जिज्ञासाएं प्रस्तुत कीं, जिनका आचार्यश्री ने शांतिपूर्वक समाधान किया।







