“खबर काम की”- लाडनूं को मिलेगा बेसहारा गौवंश से छुटकारा, खिंदास में 300 क्षमता की नंदीशाला (सांड शाला) का निर्माण पूर्ण, दानदाता अजीत सिंह चोरड़िया के सहयोग स! हुआ निर्माण, फरवरी में होगा उद्घाटन

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“खबर काम की”-

लाडनूं को मिलेगा बेसहारा गौवंश से छुटकारा,

खिंदास में 300 क्षमता की नंदीशाला (सांड शाला) का निर्माण पूर्ण, दानदाता अजीत सिंह चोरड़िया के सहयोग स! हुआ निर्माण, फरवरी में होगा उद्घाटन

लाडनूं (kalamkala.in)। बेसहारा गोवंश से पीड़ित व परेशान लाडनूं शहर को अब इस समस्या से छुटकारा मिलने वाला है। लाडनूं शहर से थोड़ी दूर राजस्व ग्राम खिन्दास में 300 सांडों (नंदी) को रखें जाने सहित अन्य सभी व्यवस्थाएं करते हुए एक ‘नंदीशाला’ का निर्माण किया गया है। यह खिंदास गोशाला लाडनूं शहर में स्थित रामआनंद गौशाला की ही एक शाखा है। इस नवनिर्मित नंदीशाला का उद्घाटन फरवरी 2026 में किया जाना है।

समस्त आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ रखे जा सकेंगे 300 सांड

इस बारे में जानकारी देते हुए रामआनंद गौशाला के ट्रस्टी विनोद पटावरी ने बताया कि इस वर्ष आचार्य महाश्रमण का लाडनूं में करीब एक वर्ष से ज्यादा का प्रवास रहेगा, इस दौरान लाखों लोगों का आवागमन लाडनूं में रहेगा। उन सबके साथ पूरे शहरवासियों को निराश्रित पशुओं की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए रामआनंद गौशाला की शाखा खिन्दास में यहां के प्रवासी व्यवसायी एवं समाजसेवी अजीत सिंह चोरड़िया एवं राजश्री चोरड़िया के आर्थिक सौजन्य से ‘नंदीशाला’ का निर्माण करवाया गया है। उन्होंने बताया कि यह नंदीशाला चार भागों में विभक्त है तथा इसमें 300 नंदी एक साथ रखे जा सकेंगे। वहीं इन नंदियों के लिए चारा भंडारण के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। चारा-संग्रह के लिए इस नंदीशाला में लोहे के विशाल टीनशेड का निर्माण भी किया गया है।

सरकार से न लिया और न लेंगे कोई भी सहयोग

दानदाता अजीत सिंह चोरड़िया बताते हैं कि इस नंदीशाला के निर्माण में किसी भी तरह का कोई भी सरकारी सहयोग नहीं लिया गया है और भविष्य में भी वे किसी प्रकार का सरकारी सहयोग इस नंदीशाला में नहीं चाहते हैं। इस प्रकार उनके द्वारा निजी स्तर पर समस्त खर्च करने व भविष्य में भी सारा खर्च वहन करने का भरोसा दे दिया है। यह बहुत ही सराहनीय है और लाडनूं वासियों के लिए किसी सौगात से कम नहीं कही जा सकती।

कार्मिकों के लिए भवन व बालाजी मंदिर भी बनेगा

गौशाला के आजीवन सदस्य डॉ. शंकर आकाश ने बताया कि इस नंदीशाला के निर्माण में गौशाला के ट्रस्टी राधेश्याम झंवर, नारायण झंवर एवं प्रवासी युवा समाजसेवी राजेश दूगड़ प्रेरणास्रोत रहे हैं। यह नंदीशाला ‘योगक्षेम वर्ष नंदीशाला’ के रूप में जानी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस नंदीशाला में कार्मिकों के लिए अलग से भवन बनेगा। इसी प्रकार नंदीशाला में ही बालाजी का एक छोटा मंदिर भी बनेगा, जिसमें यहां आने वाले लोग दर्शन कर सकेंगे।

फ़रवरी में किया जाएगा उद्घाटन

नंदीशाला के निर्माण का कार्य देख रहे समाजसेवी मूलचंद घोषल ने बताया कि नंदीशाला का उद्घाटन फरवरी माह में समारोहपूर्वक किया जाएगा, जिसकी विभिन्न स्तरों पर तैयारी की जा रही है। इस नंदीशाला के निर्माण से शहर में निराश्रित गोवंश की समस्या से लोगों को निजात मिल सकेगी।

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Author: kalamkala

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