अब लाडनूं में रेकी चिकित्सा पद्धति से इलाज कराना हुआ सम्भव यह बीमारियों को जड़ से खत्म कर देती है। जबकि अन्य पद्धतियों में रोग को दबाया जाता है।

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अब लाडनूं में रेकी चिकित्सा पद्धति से इलाज कराना हुआ सम्भव

यह बीमारियों को जड़ से खत्म कर देती है। जबकि अन्य पद्धतियों में रोग को दबाया जाता है।

लाडनूं । kalamkala.in  ( रेकी चिकित्सक कमल सोनी- 9460110190 ) यहां लाडनूं में रेकी चिकित्सक कमल सोनी ने बताया कि रेकी एक सर्वव्यापी शक्ति है जिससे शारीरिक एवं मानसिक विकास के साथ साथ आध्यात्मिक विकास भी होता है । आधुनिक समय में लोग कई तरह की बीमारियों से जूझ रहे हैं। इनमें मोटापा, मधुमेह और बालों की समस्या आदि प्रमुख हैं। इससे बचने के लिए लोग सभी हथकंडे अपना रहे हैं। इसके बावजूद कई लोगों को इन बीमारियों से निजात नहीं मिल पाता है। प्राचीन काल से भारत में भिन्न-भिन्न प्रकार के चिकित्सा पद्धतियों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें एक रेकी चिकित्सा है। इस पद्धति का वर्णन अथर्ववेद में है। हालांकि, प्राचीन काल में ही यह विप्लुप्त हो गई।


ऐसा कहा जाता है कि रेकी चिकित्सा के विलुप्त होने की मुख्य वजह इसका लिखित रूप में नहीं होना रहा है। हालांकि, भगवान बुद्ध ने  अपने जीवनकाल में इस पद्धति को पुनर्जीवित किया। इसका उल्लेख ‘कमल सूत्र’ नामक धार्मिक ग्रंथ में है। उस समय भगवान बुद्ध ने समस्त मानव जगत की भलाई के लिए रेकी चिकित्सा का ईजाद किया। इसके बाद यह चिकित्सा पद्धति चीन के रास्ते जापान पहुंची। जहां जापान ने इस पद्धति को अपनाकर, इस पर गहन अध्ययन किया। मिकाओ उसुई ने रेकी चिकिस्ता पर पुनः खोज की और उन्हें सफलता मिली।
इस चिकित्सा पद्धति में सूर्य को ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत माना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो यह ऊर्जा हमेशा हमारे साथ रहती है। जब व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो यह ऊर्जा उसके साथ विलुप्त हो जाती है। इस ऊर्जा को अदृश्य ऊर्जा भी कहा जाता है, जो हमारे साथ अदृश्य रूप में व्यप्त रहती हैं। जबकि जापानी भाषा में इसे ‘की’ कहा जाता है। इस चिकित्सा पद्धति का सबसे बड़ा यह फायदा है कि यह बीमारियों को जड़ से खत्म कर देती है। जबकि अन्य पद्धतियों में रोग को दबाया जाता है।

रेकी चिकित्सा के विशेषज्ञों का दावा है कि इस पद्धति से मधुमेह और मोटापा को जड़ से खत्म किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि इस पद्धति से व्यक्ति के शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो बढ़ते वजन को कम करने में मददगार होती है। जबकि इस उपचार के दौरान एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल हार्मोन शरीर में प्रवाहित होते हैं, जो तनाव और अवसाद को दूर करने में मददगार साबित होते हैं। इसके साथ ही यह कई अन्य बीमारियां जैसे एसिडिटी, पथरी,  गठिया और दमा को दूर करने में सहायक है।

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Author: kalamkala

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देश में इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को मान्यता देने के संदर्भ में दो दिवसीय विशेष निरीक्षण एवं अध्ययन, 23 सितंबर को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रो होम्योपैथी एवं 24 सितंबर को देवी अहिल्या हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का निरीक्षण

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