अब बजने वाला है पूरे देश में इलेक्टो होमियोपैथी का डंका, इंदौर सम्मेलन से भारत में आया वैकल्पिक चिकित्सा के इतिहास में ऐतिहासिक मोड, कैंसर पर सबसे प्रभावी है इलेक्ट्रो होमियोपैथी

SHARE:

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

अब बजने वाला है पूरे देश में इलेक्टो होमियोपैथी का डंका,

इंदौर सम्मेलन से भारत में आया वैकल्पिक चिकित्सा के इतिहास में ऐतिहासिक मोड, कैंसर पर सबसे प्रभावी है इलेक्ट्रो होमियोपैथी

इंदौर (kalamkala.in)। देश भर में फैले लाखों इलेक्ट्रो होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति से जुड़े चिकित्सकों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं एवं समर्थकों-मरीजों के लिए इंदौर में देवी अहिल्या कैंसर हास्पिटल और नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ इलेक्ट्रो होम्योपैथी द्वारा आयोजित ‘इलेक्ट्रो होम्योपैथी उत्सव 2025’ एक ऐतिहासिक मोड़ सिद्ध हुआ, जिसमें इलेक्ट्रो होमियोपैथी को चिकित्सा अधिकार आंदोलन के रूप में पेश किया गया और राष्ट्रीय हस्ताक्षर अभियान ने इस आंदोलन को एक नई गति प्रदान की। कैंसर और इलेक्ट्रो होमियोपैथी के प्रभाव सम्बंधी रिपोर्ट ने पूरे देश को एक नई दिशा प्रदान की है।

कैंसर में मार्फिन के बजाय इलेक्ट्रो होमियापैथिक दवाएं अधिक प्रभावी

इसमें कैंसर मरीजों के दर्द प्रबंधंन में मार्फिन निर्भरता के विकल्प के रूप में इलेक्ट्रो होमियोपैथी को मजबूत दावेदार बताया गया। इस अवसर पर कैंसर रोग से सम्बंधित एक महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आया, जिसमें 1500 कैंसर मरीजों का आधारित क्लिनिकल डेटा शामिल था। अब इसे केन्द्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस अवसर पर स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग द्वारा हाल ही में भेजे गए एक पत्र में इलेक्ट्रो होमियोपैथी से जुड़े दस्तावेज और मान्यता अनुरोध पर पुनर्विचार की बात कही गई है। इससे भी इलेक्ट्रो होमियोपैथी के पूरे क्षेत्र में उत्साह बढा है। मध्यप्रदेश रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ इलेक्ट्रो होम्योपैथी ने भारत सरकार को पीईटी-सीटी आधारित, सीईसीटी आधारित, बायो-एनर्जी इमेजिंग आधारित, कई मरीजों के उपचार और रिकवरी रिकॉर्ड प्रस्तुत किए हैं। कई मामलों में विशेषकर फेफड़े का कैंसर, लीवर कैंसर, मेटास्टेटिक स्तन कैंसर, गालब्लैडर कैंसर, टर्मिनल स्टेज मरीज में आशाजनक परिणाम सामने आए हैं। कार्यक्रम में डाॅ. अजय हार्डिया ने मार्फिन निर्भर मरीजों को इलेक्ट्रो होमियोपैथी से मिली राहत के परिणाम साझा करते हुए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की मांग की।

शुरू हुआ राष्ट्रीय चिकित्सा अधिकार आंदोलन

भारत में इलेक्ट्रो होमियोपैथी के आधार-स्तम्भ रहे डा. नन्द लाल सिन्हा की 136वीं जयंती पर हुआ यह आयोजन इलेक्ट्रो होमियोपैथी के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा अधिकार आंदोलन के रूप में दर्ज हो गया है। कार्यक्रम की मुख्य मांग के रूप में कैंसर रोगियों के दर्द-प्रबंधन में मार्फिन पर निर्भरता को कम करके प्राकृतिक, सुरक्षित के रूप में इलेक्ट्रो होम्योपैथी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में शामिल करने की मांग है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, भारत सरकार द्वारा 19 नवंबर को भेजे गए एक महत्वपूर्ण पत्र ने इस पूरे आयोजन को नई ऊर्जा प्रदान की। पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि डा. अजय हार्डिया के वर्षों से भेजे जा रहे क्लिनिकल डेटा और मान्यता-संबंधी दस्तावेज आईडीसी को पुनः विचार के लिए भेज दिए गए हैं। साथ ही अस्पताल की निरीक्षण-याचिका पर भी विचार किया जाएगा। वहीं राष्ट्रीय हस्ताक्षर अभियान शुरू करनें की शुरूआत ने इसे चिकित्सा अधिकार आंदोलन का रूप दे दिया। इसके बाद देश के सभी प्रांतों में इलेक्ट्रो होमियोपैथी का डंका निश्चित रूप से बजने वाला है।
इस कार्यक्रम में सीईओ मनीषा शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे तथा मुस्लिम सेवा संघ के राष्ट्रीय महासचिव डाॅ. हासिम अली सिद्दीकी उपस्थित रहे। देशभर के इलेक्ट्रो होम्योपैथिक चिकित्सक, शोधकर्ता, कैंसर विशेषज्ञ, नीतिनिर्माता और मेडिकल छात्र इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

kalamkala
Author: kalamkala

[the_ad id='179']

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सबसे ज्यादा पड़ गई
[the_ad id='15212']
[the_ad id='22854']
[the_ad id='22855']
[the_ad id='22856']

शहर चुनें

Follow Us Now