दिव्यांगों की क्षमताओं का समर्थन कर उन्हें समाज का सक्रिय हिस्सा बनाएं- प्रो. जैन जैविभा विश्वविद्यालय में ‘अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस’ का आयोजन

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दिव्यांगों की क्षमताओं का समर्थन कर उन्हें समाज का सक्रिय हिस्सा बनाएं- प्रो. जैन

जैविभा विश्वविद्यालय में ‘अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस’ का आयोजन

लाडनूं (kalamkala.ib)। जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग में संचालित ‘दिव्यांगजनों के लिए योजनाओं का कार्यान्वयन समिति/प्रकोष्ठ’ के तत्वाधान में ‘अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रकोष्ठ के समन्वयक के डॉ. गिरधारी लाल शर्मा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस की घोषणा 1992 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 47/3 द्वारा की गई थी। यह दिन दिव्यांगता के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और दिव्यांगजन के अधिकारों, सम्मान और कल्याण का समर्थन करने के लिए समर्पित है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 1.3 बिलियन लोग या दुनिया की आबादी का लगभग 16 प्रतिशत गंभीर दिव्यांगता का अनुभव करते हैं। इस दिन का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना, उनके अधिकारों को फिर से स्थापित करना और उन्हें समाज के सभी पहलुओं में शामिल करने के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। 2025 के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित विषय ‘सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए दिव्यांगता समावेशी समाजों को बढ़ावा देना’ है। भारत ने विभिन्न नीतियों एवं अभियानों के माध्यम से दिव्यांगजनों के अधिकारों और समावेशिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इनमें से कुछ प्रमुख पहल में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सुगम्य भारत अभियान, दीनदयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना (डीडीआरएस), जिला दिव्यांगता पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी), दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (सिपडा), दिव्य कला मेला, पीएम-दक्ष आदि हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने कहा कि दिव्यांगों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम उन्हें सम्मान, समानता और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने में मदद करें। हमें उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना चाहिए, उन्हें भेदभाव से बचाना चाहिए और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे सभी अवसरों तक समान पहुंच प्रदान करनी चाहिए। हमें सहानुभूति दिखाने के बजाय उनकी क्षमताओं का समर्थन करना चाहिए, ताकि वे समाज का एक सक्रिय हिस्सा बन सकें। कार्यक्रम में छात्र पलक तथा अनोखा ने भी अपने विचार व्यक्त किये तथा संस्थान के सभी संकाय सदस्य एवं समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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Author: kalamkala

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