रीढ की हड्डी (स्पाइन) के कारण दुनिया में बढ रही है अक्षमता (डिसएबिलीटी) विभिन्न संगठनों ने मनाया विश्व स्पाइन डे, रैली निकाली, रोगमुक्ति के दिए सुझाव

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रीढ की हड्डी (स्पाइन) के कारण दुनिया में बढ रही है अक्षमता (डिसएबिलीटी)

विभिन्न संगठनों ने मनाया विश्व स्पाइन डे, रैली निकाली, रोगमुक्ति के दिए सुझाव

जयपुर। दुनिया में कमरदर्द व इससे होने वाली डिसेबिलिटी की समस्या, इलाज व इसकी रोकथाम तथा रीढ की हड्डी के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और संगठनों ने वल्र्ड स्पाइन डे मनाया। स्पाइन फिजिशियन डॉ. सुरेंद्र आबूसरिया ने बताया कि एवरी स्पाइन काउंटस 2022 के वल्र्ड स्पाइन डे की थीम है। यह थीम हमारी रीढ की हड्डी के रोगों के वैश्विक समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों सरकार एवं अन्य संस्थाओं की प्रतिबद्धता की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करने के लिए 2012 से हर वर्ष 16 अक्टूबर को यह दिवस मनाया जाता है। डॉ. अबूसरिया ने बताया कि दुनिया भर में लगभग 80 फीसदी लोग कभी ना कभी अपने जीवन में रीढ की हड्डी के रोगों से ग्रसित हो जाते हैं एवं यह दर्द एवं डिसेबिलिटी (अक्षमता) का दुनिया में सबसे बड़ा कारण है।

70 प्रतिशत को कमर या गर्दन दर्द की पीड़ा, तीन पी का पालन जरूरी

ए क्यू हेल्थ केयर द्वारा वल्र्ड स्पाइन डे पर आयोजित सेमिनार में बढ़ रहे कमर एवं गर्दन के दर्द की समस्याओं पर चर्चा की गई। सेमिनार की शुरुआत डॉ. आशीष अग्रवाल ने स्पाइन की संरचना के बारे में जानकारी देकर की। उन्होंने बताया कि स्लिप डिस्क या साइटिका कैसे होता है, कैसे हमारी मांसपेशियों में असंतुलन के कारण रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होने लगती है। 70 प्रतिशत से अधिक लोग कमर या गर्दन दर्द से पीड़ित हैं और 90 प्रतिशत मरीजों को इससे बचाया जा सकता है। सेमिनार में डॉ. पूनम तनेजा, डॉ. विक्रम, मुद्रा योग की डायरेक्टर निशा सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। स्लिप डिस्क या साइटिका होने के कारण हमारी मांसपेशियों में असंतुलन के कारण रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होने लगती है और 70 फीसदी से अधिक लोग कमर या गर्दन दर्द से पीड़ित है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि तीन-पी का ध्यान रखकर हम अपनी स्पाइन को स्वस्थ रख सकते हैं। इसमें प्रिवेंशन, पॉश्चर एवं फिजियोथैरेपी का रोल बहुत महत्वपूर्ण है। पांच वर्षों से कमर, पैरों के दर्द एवं सूनेपन से पीड़ित शिक्षिका इंदु ने अपनी कमर दर्द एवं उससे रिकवरी के अनुभव को साझा किया।

उठने-बैठने के गलत तरीके से होता है रोग

सीनियर स्पाइन सर्जन डॉ. ललित शर्मा ने कहा है कि हमारी रीढ की हड्डी या स्पाइन, जो शरीर का आधार होती है, उसका स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है। आजकल ऑफिस कल्चर और उठने-बैठने के गलत पॉश्चर के कारण स्पाइन से जुड़ी समस्याएं बढ़ी है, इसीलिए शरीर को सही पॉश्चर में रखना और नियमित व्यायाम, स्वस्थ स्पाइन के लिए आवश्यक है। ‘वल्र्ड स्पाइन डे’ पर प्रताप नगर स्थित जीवन रेखा हॉस्पिटल से निकाली गई बाइक रैली को रवाना करने दौरान उन्होंने यह कहा। रैली को सीनियर आर्थोस्कोपिक सर्जन डॉ. सौरभ माथुर ने फ्लैग ऑफ किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने डॉक्टर्स से रीढ़ की हड्डी की बीमारियों और भ्रांतियों के बारे में सवाल जवाब किए।

केवल 10 से 15 प्रतिशत को पड़ती है सर्जरी की जरूरत

कंसल्टेंट स्पाइन सर्जरी डॉ.आलोक अग्रवाल ने बताया कि दुनिया में हर व्यक्ति को कमर दर्द जैसी समस्याएं होती हैं और अधिकांशतः अपने आप ठीक भी हो जाती है। सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत मरीजों को ही सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। पुलिस अधिकारी और स्टेंडअप कॉमेडियन पीके मस्त ने वहां मौजूद लोगों को खूब गुदगुदाया और ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी। डॉ. एसपी पाटीदार, डॉ. पीपी पाटीदार, डॉ. साकेत अग्रवाल, डॉ. नरेश गोयल और उज्ज्वल शर्मा उपस्थित रहे। यह बाइकर्स ने रैली निकाली जाकर लोगों को हेल्दी स्पाइन का संदेश दिया गया। बाइक रैली वापस हॉस्पिटल पर आकर सम्पन्न हुई।

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Author: kalamkala

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