गुरु से पूछने पर व्यक्ति पोजिटिव हो जाता है और उसका मनोबल बढ़ता है- संत पं. सांवरमल शर्मा,
मंगलपुरा में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य व विशाल आयोजन





लाडनूं (kalamkala.in)। भृगु आरोग्य आश्रम सालासर के ब्रह्मर्षि पं. सांवरमल शर्मा गुरुजी ने शिक्षा और दीक्षा का महत्व बताते हुए कहा है कि संसार में फैली अशांति का मूल कारण गुरु-शिष्य परम्परा का मिटना है। उन्होंने यहां मंगलपुरा की इंद्रा कोलोनी में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के भव्य कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए गुरु का महत्व समझाया और बताया कि गुरु बाधाओं से बचा सकता है। गुरु की शरण जरूरी है। गुरु से पूछने पर व्यक्ति पोजिटिव हो जाता है और उसका मनोबल बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि गुरु मंत्र को कभी छोड़ना नहीं चाहिए। गुरु दीक्षा के बाद प्रतिदिन नियमित रूप से 6 से 8 मिनट तक भगवान की शरण में रहना चाहिए और मंत्र जाप करना चाहिए।
मनुस्मृति जातिवाद का विरोध करती है
पं. सांवरमल शर्मा ने जातिप्रथा का विरोध किया और इसे मनुस्मृति की मूल भावना के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि जन्म से सभी शूद्र होते हैं। ‘जन्मना जायते शूद्र:’ मनुस्मृति का यह कथन पूर्ण सत्य है। बचपन से जवानी तक बाद में व्यक्ति वैश्य, क्षत्रिय, ब्राह्मण के रूप में बनता है। एक ही व्यक्ति सारे वर्ण जी सकता है। उन्होंने कहा कि सबके जीवन का लक्ष्य ब्राह्मण बनना होना चाहिए। ‘ब्रह्म जानाति ब्रह्मा।’ यानि जो ब्रह्म को जानता है, वही ब्राह्मण है। ईश्वर को जान लेने का ध्येय रख कर चलना चाहिए।
परिवारों में संस्कारों से विमुखता अत्यंत हानिकारक
पं. शर्मा ने संस्कारों के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि आज पाश्चात्य प्रभाव से हम अपनी संस्कृति और संस्कारों से विमुख होते जा रहे हैं, जो ठीक नहीं है। हमारी संस्कृति में 16 संस्कारों का वर्णन है और पहले सभी का आयोजन होता था। व्यक्ति के जन्म से पूर्व शुरू होने वाले संस्कार मृत्योपरांत ही पूर्ण होते थे। आज व्यक्ति मोबाइल से बंध गया है और संस्कार की कमी है। उन्होंने माता-पिता और सभी बड़ों का प्रातःकाल प्रणाम करने का महत्व भी समझाया। उन्होंने प्रतिदिन ईश्वर के स्मरण और मंत्रजाप की आवश्यकता प्रतिपादित की। साथ ही भोजन के द्वारा घर-परिवार के वातावरण को सुखद, स्वास्थ्यवर्धक व मनोशांतिकारक बनाने के उपाय सुझाते हुए उन्होंने कहा कि हमारे शुद्ध भोजन का सिस्टम बदल गया। पहले हमारी माताएं-बहिनें पहली रोटी कुता को और फिर गाय को खिलाते थे, लेकिन अब अपने बच्चे को या आफिस जाने वाले को पहले खिलाते हैं। यह ठीक नहीं है। उन्होंने सद्ग्रंथों के अध्ययन की जरूरत बताते हुए कहा कि हर घर में वेद होना चाहिए। घर में अन्य भी कोई न कोई धार्मिक ग्रंथ अवश्य होना चाहिए।
बढते देवों और मंदिरों की संख्या से बाधित होती है एकता
उन्होंने लगातार बढ़ते गुरुओं और देवी-देवताओं की संख्या को चिंतनीय बताया और कहा कि गांव-गांव में मंदिर बढ़ते जा रहे हैं। लोकदेवता भी बहुत अधिक हैं। इनके कारण हमारी एकता में कमी आई है। भागवत कथा के लिए भी उन्होंने कहा कि भागवत अब इतनी ज्यादा हो गई, इतनी पहले कभी नहीं थी। भागवत श्रवण करने वाले उसे ध्यानपूर्वक सुनने और हृदयंगम करने को महत्व नहीं देंगे तो कथा वाचन बेकार हो जाता है। पं. सांवरमल शर्मा ने घर-घर में गाय को पालने की जरूरत भी बताई और कहा कि आज गाय की कीमत नहीं रही, कुत्ते की कीमत है। जबकि कुत्ते को रोटी देनी चाहिए, लेकिन उसे बांध कर नहीं रखना चाहिए। कुता भैरूंजी का रूप माना गया है इसलिए उसको बांधना नहीं चाहिए। सनातन संस्कृति में सेवा लिखी है, बंधन नहीं।
इन्होंने किया गुरु पूर्णिमा महोत्सव का देवपूजन
कार्यक्रम के प्रारम्भ में देव पूजन और गुरु पूजन किया गया। पूजन में शामिल प्रमुख अतिथियों में वरिष्ठ पत्रकार जगदीश यायावर सपत्नीक, केशाराम राईका खुनखुना, रामोतार भडाना लाडनूं, बाबूलाल सांखला लाडनूं एवं डालमचंद डूंगरगढ़ सपत्नीक उपस्थित रहे।इस अवसर पर आचार्य भागवताचार्य माणकचन्द जसवंतगढ़, हरीश शास्त्री, पवन आचार्य आदि ने पूजन-अर्चन करवाया। कार्यक्रम को संगीतमय रुख प्रदान करने और माहौल को रुचिकर बनाने में भी इनके अलावा नोरतनमल भोजक, प्रकाश नाई, भाणूं भार्गव ने भूमिका निभाई। कार्यक्रम में ‘मैली चादर ओढ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊं’ गीत की सुमधुर प्रस्तुति देकर सबको सम्मोहित कर लिया गया।
गुरु पूजन व गुरु दक्षिणा कार्यक्रम तथा भृगु आरोग्य आश्रम के लिए सहयोग
इस अवसर पर पं. सांवरमल शर्मा ‘गुरुजी’ का सभी आगंतुकों ने नारियल व तिलक कर पूजन किया तथा दक्षिणा प्रदान की। साथ ही माल्यार्पण एवं शॉल ओढ़ाकर उनका सम्मान किया। प्रभुकृपा सेवा संस्थान सुजानगढ़ की ओर से भी गुरु पं. सांवरमल शर्मा का विशेष सम्मान किया गया। इसके अलावा सालासर में निर्माणाधीन भव्य भृगु आरोग्य आश्रम के लिए सहयोग के रूप में लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग प्रदान किया। इन सहयोग कर्ताओं में बाबूलाल सांखला लाडनूं, रघुवीर सिंह राठौड़ लाडनूं, चौधरी वीर तेजा संघ सीकर के दिनेश फागलवा, देव जी सीकर, नाथूराम कालेरा लाडनूं, एक्सईएन नंदलाल सांवलोदा, रामदेव गुर्जर, आगुन्ता, डालमजी सुमेरजी डूंगरगढ, भागीरथ सुतोद एवं अन्य भक्तजन शामिल रहे।
इन सबने उठाया गुरु पूर्णिमा महोत्सव का बीड़ा
मंगलपुरा की इंद्रा कॉलोनी में आयोजित इस विशाल गुरु पूर्णिमा महोत्सव के आयोजन में पूजा प्रसाद खर्च संतोष पंसारी सुजानगढ द्वारा तथा अन्य व्यवस्थाओं का खर्च परमेश्वर जी सोनी, हार्दिक सोनी व एचपी ज्वैलर्स सुजानगढ द्वारा वहन किया गया। इस आयोजन के अवसर पर रीयल हेल्प ब्यूरो के महिला प्रदेशाध्यक्ष पार्षद सुमित्रा आर्य, सांवराद सरपंच सुधीर शर्मा चोटिया, सुनारी सरपंच प्रतिनिधि नाथूराम कालेरा, केशाराम राईका खुनखुना, राम लाल सिलनवाद, दिनेश फागलवा, देवजी सीकर, मूलजी चौधरी सेवद, रामोतार भडाना लाडनूं, भी रामसुख भामू समाज सेवी गोराऊ आदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।






