लाडनूं के सौभागचंद नाहर का उदयपुर में किया गया सम्मान, डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी व सुंदर सिंह भंडारी के पुण्यतिथि समारोह में असम के राज्यपाल कटारिया, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे व केंद्रीय केबिनेट मंत्री बाबूलाल ने किया सम्मान

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लाडनूं के सौभागचंद नाहर का उदयपुर में किया गया सम्मान,

डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी व सुंदर सिंह भंडारी के पुण्यतिथि समारोह में असम के राज्यपाल कटारिया, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे व केंद्रीय केबिनेट मंत्री बाबूलाल ने किया सम्मान

जगदीश यायावर। लाडनूं (kalamkala.in)। श्री सुन्दरसिंह भण्डारी चेरिटेबल ट्रस्ट उदयपुर की ओर से डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी व सुंदरसिंह भंडारी की 19वीं पुण्यतिथि पर रविवार को उदयपुर के सुखाड़िया रंगमंच टाउन हॉल में आयोजित समारोह में लाडनूं के सौभागचंद नाहर को अन्य विशिष्ट जनों के साथ सम्मानित किया गया। उन्हें कार्यक्रम के मुख्य अतिथि असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, मुख्य वक्ता पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और विशिष्ट अतिथि कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। कार्यक्रम में सौभागचंद नाहर के अलावा प्रदेशभर के विशिष्टजनों को भी सम्मानित किया गया। सौभागचंद नाहर के अलावा उनके साथ सम्मानित होने वाले राज्य के विशिष्टजनों में वासुदेव देवनानी अजमेर, योगेन्द्र सिसोदिया उदयपुर, राजेन्द्र गहलोत जोधपुर, हेमेन्द्र कुमार श्रीमाली उदयपुर, श्रीमती संतोष गोधा उदयपुर, वैणीराम सुथार सलुम्बर, सत्यप्रकाश आचार्य बीकानेर, श्रीमती मनीषा आठले कोटा, उमाशंकर अलवर, रमा कांत शर्मा जयपुर, दीनानाथ झुंझुनूं, मधुरमोहन रंगा अजमेर, वासुदेव प्रजापति बाड़मेर, राधेश्याम शर्मा कोटा, ज्ञानदेव आहूजा अलवर एवं प्रहलाद सिंह अवाना जयपुर शामिल हैं। इस कार्यक्रम व्याख्यानमाला और विशिष्ट जन सम्मान समारोह का विषय ‘राष्ट्र निर्माण में स्व. भण्डारी जी एवं डॉ. मुखर्जी का विशिष्ट योगदान’ था, जिसपर प्रमुख प्रबुद्धजनों ने अपने विचार व्यक्त किए।
गौरतलब है कि लाडनूं के निवासी और उदयपुर प्रवासी सौभागचंद नाहर को सुदीर्घ काल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा सनातन धर्म के प्रचार में विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। नाहर का पूरा परिवार ही धर्म व संस्कृति की रक्षा एवं संघ विचारधारा का पालक-पोषक रहा है। उनके परिवार से संघ के प्रचारक भी रहे हैं। आपातकाल के दौरान सौभागचंद नाहर को अपनी लाडनूं के मेडिकल स्टोर तक को त्याग देना पड़ा था। इन्होंने लोकतंत्र के रक्षक वीर के रूप अपनी भूमिका निभाई थी।

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Author: kalamkala

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