प्राचीन सांस्कृतिक विरासत डीडवाना की ‘गैर’ को सहेजकर रखा जाए- जिला कलेक्टर डॉ. महेन्द्र खड़गावत, डीडवाना के माली समाज के 12 बासों से निकाली गई परम्परागत गैर का किया पूरे शहर ने स्वागत-सम्मान

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प्राचीन सांस्कृतिक विरासत डीडवाना की ‘गैर’ को सहेजकर रखा जाए- जिला कलेक्टर डॉ. महेन्द्र खड़गावत,

डीडवाना के माली समाज के 12 बासों से निकाली गई परम्परागत गैर का किया पूरे शहर ने स्वागत-सम्मान

रामस्वरूप पंवार सैनी, पत्रकार। डीडवाना (kalamkala.in)। जिला कलेक्टर डॉ. महेन्द्र खड़गावत ने पर्वों को परम्परागत ढंग से मनाए जाने और सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने की सराहना करते हुए डीडवाना के माली समाज द्वारा आयोजित परम्परागत गैर को अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर बताया। उन्होंने इस परंपरा को समाज की सांस्कृतिक शक्ति बताते हुए इसे सहेजकर रखने की अपील की और इसके लिए सभी समाज बंधुओं द्वारा सहयोग करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने यहां आढका बास में माली समाज द्वारा आयोजित होली के सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रम ‘गैर उत्सव’ में मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित किया। इस अवसर पर जिला कलेक्टर के अलावा सूर्यवंशी क्षत्रिय सैनी महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रामस्वरूप सैनी, दुर्गा राम, बजरंग सांखला, गोविन्द पंवार, तहसीलदार डीडवाना आदि मंचस्थ रहे।हर्षोल्लास के साथ डीडवाना के आढका बास स्थित माली समाज स्थान पर मनाए गए इस होली के गैर पर्व में माली समाज के सभी बासों द्वारा भाग लिया गया। होली के अवसर पर डीडवाना के माली समाज की यह सदियों पुरानी ‘गैर निकाले जाने की परंपरा’ इस बार फिर अपनी अनूठी सांस्कृतिक छटा बिखेरते हुए प्रदर्शित हुई। यह शहर की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रमाण है।

400 सालों की परम्परा में स्वांग धारियों का रहा विशेष आकर्षण

पिछले 400 सालों से यह धुलण्डी के दिन डोलची होली के साथ-साथ माली समाज के 12 बासों द्वारा निकाली गई गैर विशेष आकर्षण का केंद्र रहती आई है। शाम होते ही सभी बासों से सजी-धजी टोलियां चंग और ढोल-नगाड़ों की थाप पर बाजार की ओर से होकर निकली, इसमें सभी पारंपरिक वेशभूषा और रंग-बिरंगे स्वांगों ने पूरे माहौल को रंगीन और होली-मय बना दिया जाता है। इस गैर में शामिल लोगों ने विविध प्रकार के स्वांग रचकर आम लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। इस गैर में हजारों की संख्या में बच्चे, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए। कलाकारों ने विभिन्न सामाजिक और पौराणिक पात्रों के स्वांग रचे। गैर में भगवान राम, लक्ष्मण, लंकापति रावण, भगवाधारी साधु-संत, फकीर-मलंग और लोक कलाकारों सहित कई वेशभूषाएं देखने को मिली। इन सबके लिए माली समाज के ये कलाकार महीनों पहले से अपनी वेशभूषाएं और स्वांग तैयार करते हैं। इस सामूहिक होली उत्सव गैर कार्यक्रम में गैर-नृत्य में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थानों पर रहे बासों के समूहों के लिए इनाम घोषित किए जाकर उनको प्रोत्साहित किया गया। इस गैर पर शहरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर गैर का स्वागत किया और गुलाल बरसा कर पूरा वातावरण रंग-गुलाल से सराबोर कर दिया। माली समाज की इस गैर से जहां प्राचीन परंपरा जीवित बनी हुई है, वहीं इसके कारण पूरे प्रदेश में डीडवाना को एक विशिष्ट पहचान मिली हुई है। यह पूरे राजस्थान में अपनी तरह की अनूठी गैर है, जो केवल डीडवाना में ही देखने को मिलती है।

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Author: kalamkala

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