आध्यात्मिक शक्ति के जागरण का पर्व है नवरात्र- साध्वीश्री कार्तिक यशा,
लाडनूं में नवाह्निक आध्यात्मिक अनुष्ठान का उपक्रम आयोजित


लाडनूं (kalamkala.in)। शक्तिपुंज आचार्यश्री महाश्रमण की शिष्या साध्वीश्री कार्तिकयशा के सान्निध्य में स्थानीय ऋषभद्वार प्रागंण मे आयोजित नवरात्र पर्व के अवसर पर अपने विशिष्ट प्रवचन में श्रीं, ह्रीं, धीं, धृति, शक्ति, शांति, नंदी, तेज, शुक्ल आदि भावनाओं से संपन्न बनने पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नवरात्रि में आध्यात्मिक अनुष्ठान, आर्षवाणी व मंगल भावना का हर दिन महत्व होता है। आकाशीय पिंडों में होने वाले परिवर्तन के कारण कुछ दिनों में कुछ पर्वो का बड़ा महत्व है। भारतीय संस्कृति में तप, त्याग, संयम, जप, अनुष्ठान के माध्यम से भी त्यौंहार मनाए जाते हैं। इनमें से एक है नवरात्र, यह पर्व साल में चार बार आता है, जिसका अलग-अलग महत्व है। चैत्र वाले चैत्र नवरात्र,पौष और आषाढ़ वाले गुप्त नवरात्र आश्विन में शरद रितु की शुरुआत के कारण शारदीय नवरात्र कहे जाते हैं। उन्होंने बताया कि तेरापंथ धर्म संघ में गणाधिपति गुरुदेव तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ ने नवाह्निक आध्यात्मिक अनुष्ठान का एक नया उपक्रम प्रारंभ किया, जो वर्तमान में भी गतिमान है। सभी धर्मों में शक्ति जागरण का महत्व है। उन्होंने बताया कि दुनिया में सबसे बड़ी शक्ति आध्यात्मिक शक्ति है। उसकी जागरण के लिए नवरात्र में प्रयत्न किया जाता है। नवरात्रि के यह दिन मंत्र, तंत्र, यंत्र सिद्ध करने व देवी आराधना के माध्यम से शक्ति जागरण के हैं। लौकिक सिद्धियों का महत्व है, पर सबसे बड़ा महत्व आध्यात्मिक शक्ति जागरण का है। आर्ष वाणी का पावन, पवित्र अनुष्ठान के द्वारा पवित्रता, तेजस्विता व गंभीरता के विकास के साथ आरोग्य बोधी व समाधि की प्रार्थना सिद्ध भगवान से की। साथ ही आत्म शुद्धि और ऊर्जा के विकास के लिए बीज मंत्रो के संयोजन के साथ दसवेंआलियं के प्रथम अध्याय का मानो आध्यात्मिक यज्ञ हुआ। इस कार्यक्रम में शामिल सभी ने कर्म निर्जरा कर, कुछ अंश में चेतना का उर्ध्वरोहण किया।कार्यक्रम में श्रावक-श्राविकाओं ने अच्छी संख्या में भाग लिया।





