लाडनूं में निराश्रित नंदी-सांडों से परेशान लोगों को कोई राहत नहीं, बहुत लोगों के चोटिल होने के बावजूद प्रशासन की आंखें बंद, खिंदास में बनी विशाल नंदीशाला का कोई उपयोग नगर पालिका के सहयोग के बिना संभव नहीं, यात्रियों को भारी परेशानी

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लाडनूं में निराश्रित नंदी-सांडों से परेशान लोगों को कोई राहत नहीं, बहुत लोगों के चोटिल होने के बावजूद प्रशासन की आंखें बंद,

खिंदास में बनी विशाल नंदीशाला का कोई उपयोग नगर पालिका के सहयोग के बिना संभव नहीं, यात्रियों को भारी परेशानी

लाडनूं (kalamkala.in)। लगभग समूचे शहरी क्षेत्र में बेसहारा गोवंश के अनियंत्रित विचरण के चलते नागरिकों की समस्याएं लगातार बढ़ती ही जा रही है। इस समस्या से लोगों को राहत दिलाने के लिए नगर पालिका, उपखंड प्रशासन और समाजसेवी संगठन कोई भी बातों और वायदों से ऊपर नहीं निकल पा रहे हैं। राज्य सरकार ने विभिन्न नगर पालिका क्षेत्रों में नंदी शालाओं का निर्माण करवाया है, लेकिन लाडनूं में अभी तक ऐसा कोई प्रयास सामने फलीभूत नहीं हुआ है।

खिंदास की नंदीशाला का भी नहीं हो पा रहा उपयोग 

स्थानीय रामानंद गौशाला में भामाशाह अजीत सिंह चोरड़िया की ओर से खिंदास स्थित रामानंद गौशाला की ब्रांच में एक विशाल नंदी शाला का निर्माण करवाया गया था, परन्तु उसमें नंदियों की भर्ती के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हुई है, धरातल पर नागरिकों के लिए समस्या पूर्ववत ही बनी हुई है, उसमें एक प्रतिशत का भी फर्क नजर नहीं आया हे। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर इसकी उपेक्षा किए जाने से समाधान अब तक ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। गौरतलब है कि इस नंदी शाला में करीब 400 नंदियों के रहने की व्यवस्था की गई है।

सात दिनों में तीन दर्जन लोग हुए सांडों से चोटिल 

शहर के पहली पट्टी दड़ा से लेकर जैन विश्व भारती तक और अन्य पट्टियों और जैन विश्व भारती के ईर्द-गिर्द के क्षेत्र, काली जी का चौक, कुम्हारों का बास, कमल चौक, मालियों का बास, सब्जी मंडी, बस स्टैंड आदि शहर के सभी प्रमुख क्षेत्रों में नंदी-सांड दिन-रात खुले घूमते हुए नजर आते हैं और लोगों को चोटिल तक करते रहते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 7 दिनों में कम से कम 20 लोग इन नंदियों की वजह से चोटिल हो गए। रात्रि में यही सांड सड़कों पर आकर आपस में लड़ते हैं और वाहनों को नुकसान पहुंचाते हैं। तब नजारा और भी चिंताजनक तब हो जाता है, जब ये नंदी अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर बेखौफ होकर अपनी जोर-आजमाइश करते हैं और भिड़ते हुए राहगीरों, वाहनों आदि पर टकराते हैं। इससे अनेक बड़े-बुजुर्ग, महिलाओं-बच्चे, बीमार आदि चोटिल हो जाते हैं।

लिखित सूचनाओं का भी प्रशासन पर कोई असर नहीं 

नागरिकों ने कई बार नगर पालिका प्रशासन एवं उपखंड प्रशासन को इस समस्या पर लगाम लगाने की गुहार की, मगर स्थिति जस की तस है। श्री रामआनंद गौशाला के मंत्री हंसराज सोनी ने नगर पालिका एवं उपखंड प्रशासन को एक पत्र भी लिखा है और सभी बेसहारा नदियों को उनकी खिंदास स्थित नंदीशाला में भेजने के लिए आग्रह किया, लेकिन अभी तक प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रैंगी।

राजकीय अतिथि आचार्य महाश्रमण के दर्शनार्थ आने वाले खासे परेशान 

प्रशासन की इस अनदेखी का शिकार स्कूल जाते बच्चे और बुजुर्ग हो रहे हैं। वहीं कई नए वाहन भी इन नंदियों ने खराब कर दिए हैं। बरहाल नागरिकों को इंतजार है कि कब इन नदियों को यथास्थान पहुंचाया जाएगा। उधर राज्य सरकार ने आचार्य महाश्रमण को राजकीय अतिथि घोषित करने के साथ प्रशासन को यह हिदायत दी की प्रवचन क्षेत्र के आसपास किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए। लेकिन, निराश्रित गोवंश की उपस्थिति बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए भी परेशानी का सबब बनी हुई है।

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Author: kalamkala

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