‘तुम काली कंकाली हो, हमारे लायक नहीं हो’
दो बहनें भुगत रही हैं अपने ‘काले रंग’ का खामियाजा, पतियों ने घर से निकाला, छुटेपा का बनाया दबाव
लाडनूं (kalamkala.in)। “तुम सुन्दर नहीं हो, ‘काली कंकाली’ हो, हमारे लायक नहीं हो, हमारे कहां से पाने पड़ गयी हो. जब से शादी करके इस घर में आयी हो, हम को तो ग्रहण ही लग गया है।” यह सब कथन उस एफआईआर का हिस्सा है, जो लाडनूं पुलिस ने कोर्ट के जरिए प्राप्त इस्तगासा के आधार पर दर्ज की है। लाडनूं की दो सगी बहिनों की शादी रतनगढ़ के दो सगे भाइयों के साथ हुई थी, लेकिन उन लड़कियों का रंग काला होने और साथ ही परिवार की ग़रीबी के चलते दहेज कम देना उन दोनों भाइयों और उनके परिवार को नागवार गुजरा। उन्होंने लगातार दोनों बहिनों पर टोंट कसने और प्रताड़ित करने की विविध कार्रगुजारियां करके उन्हें अंततः घर से दरबदर ही कर डाला। लाडनूं पुलिस ने इस प्रकरण को धारा- 85, 316 (2), 115 (2), बीएनएस के तहत 7 मुलजिमानों के खिलाफ दर्ज किया है। मामले की जांच थानाधिकारी महीराम बिश्नोई कर रहे हैं।
दो बहिनों ने अपने पतियों समेत 7 ससुरालियों पर किया मुकदमा
यह इस्तगासा लाडनूं के अति. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवादिनी दापी (26) पत्नी नेमीचन्द एवं पुत्री रामूराम खटीक एवं बानी पत्नी (24) बाबूलाल एवं पुत्री रामूराम खटीक दोनों निवासी गली नं. 1 रामचन्द्र पार्क रतनगढ़ जिला चूरू एवं वर्तमान निवासी शीतला चौक, खटीक बस्ती लाडनूं ने पेश किया। इसमें अभियुक्तों के रूप में नेमीचन्द (31) पुत्र सीताराम, बाबूलाल (29) पुत्र सीताराम, कमला (52) पत्नी सीताराम, सीताराम (60) पुत्र पीथाराम दायमा, कोमल (30) पुत्री सीताराम, सरोज पुत्री सीताराम एवं मंजू पुत्री सीताराम समस्त जाति खटीक निवासीगण गली नं 1 रामचन्द्र पार्क रतनगढ़ जिला चूरू को आरोपी ठहराया है। इसमें बताया गया है कि उन दोनों बहिनों दापी व बानी की शादी क्रमशः नेमीचन्द व बाबूलाल के साथ 19 नवम्बर 2021 को हुई थी। विवाह के समय उनकी माता,भाई-बन्धु व रिश्तेदारों द्वारा उपहार में जेवरात व अन्य घरेलू सामान तथा ससुराल पक्ष द्वारा उसे उपहार में जेवरात दिये थे। उन्होंने शादी के बाद सभी जेवरात, सामान बतौर स्त्रीधन अमानत स्वरूप अपने पतियों, देवर, सास व नणद को सम्भला दिया था। जो अब भी उन्हीं के कब्जे में है।
कमरे में बंद करने, खाना नहीं देने जैसे अत्याचार किए
इस परिवाद में दोनों बहिनों ने अपने ससुरालियों को बहुत ही लालची किस्म के
बताते हुए उन पर विवाह के दिन से ही अधिक दहेज लाने के लिये तंग परेशान करने के आरोप लगाए हैं। उनके द्वारा दोनों बहिनों को लोगों के सामने जलील करने और कम दहेज लाने के ताने अभद्र व घटिया भाषा में देने के आरोप भी लगाए हैं। आरोप है कि दहेज में दो मोटर साईकिलें व बाटका में 51000-51000 रुपये नहीं देने से समाज में उनकी नाक कटने की बात कही गई। दोनों बहिनों को थप्पड़ मारने दिया और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप भी हैं। शादी के कुछ महिनों बाद दापी व बानी के एक-एक पुत्री को जन्म दिया। इनमें दापी की पुत्री अब 4 वर्ष की और बानी की पुत्री भी 4 वर्ष की है। इन दोनों बहनों दापी व बानी ने सभी अभियुक्तों पर उन्हें कमरे में बंद कर देने व खाना नहीं देने के आरोप भी लगाए हैं। उनकी सास ने स्वयं के लिए सोने की चैन की उम्मीद जताई और पीहर से अपने माता व भाई से सोने की चैन लेकर आने की ताईद दी।
दहेज के लालच में काली-कलूटी बताते रहे
दोनों बहनों को एक-एक बेटी होने पर अभियुक्तों ने शादी की कसर छुछक में निकालने की हिदायत दी और अपनी मांग की पूर्ति करने को कहा। उनके पीहर वालों ने उन्हें छुछक में अच्छी बेस, जुंवारी, कम्बल आदि दिए, लेकिन अभियुक्तों ने सोने की चैन व एक मोटर साईकिल व 51000 रूपये नहीं देने पर उनको जलील व मानसिक रूप से परेशान करने लगे। उन दोनों बहनों की माता विधवा महिला है तथा आमदनी का भी कोई साधन नहीं है। लेकिन उनका दिल नहीं पसीजा। उनकी मांग जारी रही। तब लाचार विधवा माता ने रिश्तेदारों से उधार लेकर 5,000 रूपये की व्यवस्था करके ओर अभियुक्त संख्या 1 ता 7 को कस्बा लाडनूं में उन्हें दिए। पर वे तो मोटर साईकिल और मांगने लगे और गन्दी-गन्दी गालियां निकालने लगे। वे लाडनूं से 5,000 रूपये भी लेकर चले गये। उनकी तंग व परेशान करने की आदत बनी रही। वे दोनों रोज शाम को शराब पीकर आते और तंग परेशान करते। वे उन दोनों बहनों को बार-बार बोलते कि, ‘तुम सुन्दर नहीं हो, ‘काली कंकाली’ हो, हमारे लायक नहीं हो,
हमारे कहां से पाने पड़ गयी हो। जब से शादी करके इस घर में आयी हो हम को तो ग्रहण ही लग गया है। हमें तुम पसन्द नहीं हो, हम दूसरी सुन्दर लडकियों से शादी करेगें। तुम हमें छोड़कर तलाक देकर चली जाओ, वरना हमें तुम्हारा काम तमाम करना पड़ेगा।.. तुम हमारे लिए अशुभ हो। तुमने लड़कियों को जन्म देकर हमारे सारे अरमान तोड़ दिये, तुम दोनों अपशकुनी हो।’ आदि-आदि।
मारपीट कर घर से निकाला, छुटेपा के लिए दिया जोर
एक बहन बानी अपने पति बाबूलाल से 6 माह की गर्भवती है। दो माह पूर्व दोनों बहिनों के साथ उन लोगों ने भंयकर मारपीट की और बोले कि अब तुम्हारे व तुम्हारी पुत्रियों के लिए इस घर में कोई जगह नहीं है। इस मारपीट के दौरान दोनों बहनों के कपड़े उन्होंने फाड़ दिये। उनके पहने हुये सभी जेवरात व उनका कीमती सामान जोर-जबरन छीनकर उन दोनों को व उनकी दोनों पुत्रियों सहित घर से निकाल दिया। वे दोनों अपनी पुत्रियों को लेकर पीहर लाडनूं जैसे-तैसे आयी, तब से लेकर आज तक वो अपनी गरीब विधवा माता के साथ लाडनूं में निवास कर रही हैं। अभियुक्तों ने उन दोनों और उनकी पुत्रियों की कोई खैर-खबर नहीं ली और न ही कहीं इलाज करवाया है। बानी अभी गर्भवती है, उनके दवाई इलाज खर्च उनकी विधवा माता करवा रही है। अभियुक्तगण केवल अपनी दहेज की 51000 रूपयों व मोटरसाइकिल की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने उनका समस्त स्त्रीधन सामान, जेवरात व रूपये भी हड़प कर लिये हैं। अभी 15 जून को अभियुक्त नेमीचन्द, बाबूलाल, सीताराम, कमला आये और कहा कि हम इन ‘काली रंडियों’ को नही रखेंगें, जल्द ही ‘छुटेपा’ करवा दो या हमारी मांग पूरी कर दो।




