भगवान महावीर और महामना भिक्षु में अनेक समानताएं- महाश्रमण , आचार्य भिक्षु का 297वां जन्मदिवस ‘बोधि दिवस’ के रूप में हुआ समायोजित

SHARE:

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

भगवान महावीर और महामना भिक्षु में अनेक समानताएं- महाश्रमण

आचार्य भिक्षु का 297वां जन्मदिवस ‘बोधि दिवस’ के रूप में हुआ समायोजित

छापर (चूरू)। वर्ष 2022 का चतुर्मास करने को छापर में विराजमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण की मंगल सन्निधि, तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य कालूगणी की जन्मस्थली छापर और चतुर्मास की स्थापना से पूर्व का दिन। आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी और चतुर्दशी का संयोग। आचार्यश्री के नमस्कार महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। मुनि हेमराज ने आचार्य भिक्षु के चरित्र पर प्रकाश डाला। मुनि राजकुमार ने गीत का संगान किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आज एक संयोग है कि आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी और चतुर्दशी संयुक्त रूप में है। आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी को महामना आचार्य भिक्षु के जन्मदिन होने का अवसर मिला। महापुरुषों के साथ जुड़कर तिथियां भी मानों धन्य बन जाती हैं। जिस प्रकार कार्तिकी अमावस्या भगवान राम और भगवान महावीर के जुड़कर धन्य हो गई और दीपावली के रूप में स्थापित हो गई। हम सभी का जीवन उपचार और व्यवहार से युक्त है। उपचार और व्यवहार के कारण ही हम उन तिथियों का मना भी लेते हैं। इससे आदमी की श्रद्धाभिव्यक्ति भी हो जाती है और इस दौरान सिद्धान्तों आदि को जानने का भी अच्छा अवसर प्राप्त हो जाता है। विक्रम संवत् 1783 को आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी को कांठा क्षेत्र के कंटालिया गांव में आचार्य भिक्षु का जन्म हुआ था।

भगवान महावीर और आचार्य भिक्षु में अनेक समानताएं हैं। भगवान महावीर का जन्म शुक्ला त्रयोदशी को हुआ तो आचार्य भिक्षु का जन्म भी शुक्ला त्रयोदशी को हुआ। भगवान महावीर की माताजी ने सिंह का स्वप्न देखा तो आचार्य भिक्षु की माताजी ने भी सिंह का स्वप्न देखा। भगवान महावीर ने गृहस्थावस्था में पाणीग्रहण किया तो आचार्य भिक्षु ने भी गृहस्थावस्था में पाणीग्रहण किया। दोनों को विवाह के उपरान्त एक-एक पुत्री हुई। भगवान महावीर की दो माताएं थीं तो आचार्य भिक्षु की भी दो माताएं थीं। भगवान महावीर ने एक नए तीर्थ की स्थापना की तो आचार्य भिक्षु ने भी तेरापंथ धर्मसंघ के एक रूप में एक नए तीर्थ की स्थापना की। भगवान महावीर और आचार्य भिक्षु दोनों दो-दो भाई थे और दोनों ही इस क्रम में छोटे थे। दोनों का महाप्रयाण भी चतुर्मास के बीच में ही हुआ। इस प्रकार भगवान महावीर और आचार्य भिक्षु में अनेक समानताएं हैं।

आचार्य भिक्षु के पास शरीर और ज्ञान की अच्छी सम्पदा थी। उनके ग्रंथों को पढ़ने से लगता है उनका ज्ञान कितना निर्मल था। उनकी शील सम्पदा और व्यवहार भी कितनी अच्छी थी। उनकी बुद्धि उच्च स्तर की थी। इस कारण उनके समझाने की अपनी कला थी। महामना आचार्य भिक्षु का जन्मदिवस बोधि दिवस के रूप में स्थापित है। आज के दिन उनको बोधि की प्राप्ति हुई थी। मैं आज के दिन उनको श्रद्धा के साथ स्मरण करता हूं। आज आषाढ़ शुक्ला चतुर्दशी भी है। चतुर्मास लगने से ठीक पहले की तिथि है। इस बार हमारा चतुर्मास परम पूज्य आचार्य कालूगणी की जन्मभूमि पर छापर में हो रहा है। यहां के आसपास के क्षेत्रों को भी इसका लाभ प्राप्त हो रहा है।

आज शासनमाता साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा की चतुर्थ मासिकी पुण्यतिथि है। उन्होंने साहित्य का कितना कार्य किया। वे धर्मसंघ की महान विभूति थीं, जिनके हाथ से 500 से अधिक साध्वियों के केशलोच ही नहीं, उनकी सार-संभाल का दायित्व भी पचास वर्षों तक निभाया। दो महिने पूर्व आज के ही दिन मैंने उनके स्थान पर साध्वी विश्रुतविभा को साध्वीप्रमुखा के रूप में मनोनीत किया। वे अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इस संदर्भ में साध्वी कल्पलताजी ने अपने विचार व्यक्त किए।

आचार्यश्री ने हाजरी का वाचन करते हुए चारित्रात्माओं को विविध प्रेरणाएं प्रदान कीं। आचार्यश्री की आज्ञा से मुनि रत्नेशकुमार, मुनि अर्हमकुमार, मुनि खुशकुमार व मुनि ऋषिकुमार ने लेखपत्र का उच्चारण किया, तो आचार्यश्री ने चारों संतों को चार-चार कल्याणक बक्सीस की। आचार्यश्री ने सभी साधु-साध्वियों को चतुर्मास के दौरान अध्ययन, स्वाध्याय करने की प्रेरणा प्रदान की।

आचार्यश्री ने आठ जुलाई को मुम्बई में कालधर्म को प्राप्त साध्वी कैलाशवती की स्मृतिसभा के संदर्भ में उनके जीवनवृत्त संक्षिप्त परिचय देते हुए उनकी आत्मा के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना की तथा चतुर्विध धर्मसंघ के साथ चार लोगस्स का ध्यान किया। उनके संदर्भ में साध्वीप्रमुखा, मुख्यमुनि और मुनि दिनेशकुमार ने अपनी अभिव्यक्ति दी।

कार्यक्रम में इन्द्राज नाहटा, सुमेरमल नाहटा व नरपत मालू ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। हैदराबाद-छापर महिला मण्डल, जतनबाई नाहटा, शशि चोरड़िया, शिवांगी मेहता व प्रवीण मालू ने गीत का संगान किया।

kalamkala
Author: kalamkala

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सबसे ज्यादा पड़ गई

डीडवाना जिले के नि:शुल्क वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा के लिए लॉटरी निकली- हवाई यात्रा के लिये 143 और रेल यात्रा के लिये 1169 यात्रियों का चयन, कुल 1312 वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा के लिए निर्धारित, न्यूज के साथ देखें सभी चयनित यात्रियों की सूची, अपना नाम तलाश करें

शहर चुनें

Follow Us Now