पुस्तक समीक्षा – शोधपरक, उपयोगी व संग्रहणीय ग्रंथ है- कुलदेवी-कुलदेवता वर्णन

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समीक्षक- डाॅ. वीरेन्द्र भाटी मंगल

पत्रकार, लेखक जगदीश यायावर ’सांखला’ द्वारा रचित पुस्तक सांखला वंश सर्वस्व (भाग-1) कुलदेवी-कुलदेवता वर्णन पुस्तक सैनी समाज के सांखला वंष से जुड़ी ऐतिहासिक कृति है। पुस्तक में सांखला वंष के इतिहास को समाहित करते हुए कुलदेवी-देवता का सुन्दर वर्णन किया गया है। पुस्तक की प्रस्तावना में लेखक जगदीश यायावर लिखते है- प्रत्येक व्यक्ति वंष विषेष में जन्म लेता है और परिवार में उसकी षिक्षा व संस्कारों द्वारा उसके मन-बुद्धि का निर्माण होता है एवं वह कुल-परम्पराओं में बंध जाता है। अपनी जाति के साथ कुल और वंष के मूल को जानने की इच्छा प्रत्येक व्यक्ति में रहती है। हर व्यक्ति अवश्य जानना चाहता है कि उसकी जाति, गौत्र, वंश आदि कैसे प्रचलित हुये, उनका इतिहास क्या है, उनके पूर्वजों, वंश के मूल पुरुष, कुलदेवता, कुलदेवी, कुल में हुए वीर पुरूष, संत-महापुरूषों आदि की जानकारी क्या है? इस पुस्तक में ऐसे की सवालों को समाहित किया गया है।
प्रस्तुत पुस्तक में माली, सैनी समाज के सांखला वंश की उत्पत्ति/संक्षिप्त इतिवृत को प्रस्तुत किया गया है, जिसमें सांखला राजवंश गोत्र व पहचान, मूल पुरूष, संक्षेप में सांखला वंश की उत्पत्ति, सांखला कुल का संक्षिप्त परिचय आदि विस्तृत रूप से को समाहित किया गया गया है। इसी प्रकार अध्याय सांखला वंश की प्रमुख पहचान, सांखला व सोढा (परमारों) का उल्लेखित इतिहास का सांगोपांग वर्णन किया गया है। इसी प्रकार माता सचियाय के धाम ओसिया (उकेशपुर) पर था सांखला परमारों का राज शीर्षक से इतिहास के पन्नों को रेखांकित किया गया है। पुस्तक के अध्याय में सांखला कहलाने की गाथा- ’शंख बजायनै सांखला कहाय’ में लेखक लिखते है ’सांखला’ शाखा के नामकरण का सम्बन्ध देवी सचियाय माता द्वारा प्रदत्त शंख को लाने और शंखनाद करने से है।
पुस्तक में समाहित विवरण शोधपरक होने के साथ साथ सरल व सुगम भाषा में होने से आम जिज्ञासु पाठक भी पुस्तक को सहजता से पढ-समझ सकता है। 53 अध्यायों में समाहित इस पुस्तक का प्रत्येक अध्याय महत्वपूर्ण है। अध्याय कुलदेवी-कुलदेवता पूरे कुल को एकसूत्र में बांधते है। कुलदेवता-कुलदेवी, देवी शक्ति की जरूरत, परमार सांखला वंष की आराध्या-इष्ट माता व कुलदेवी आदि अध्यायों में कुलदेवी, कुलदेवता का सुन्दर व प्रभावी वर्णन किया गया हैं। पुस्तक में विविध देवी-देवताओं का वर्णन किया गया है। वही पुस्तक में जैन धर्म यक्षिणियां, बौद्ध यक्षिणी का बहुआयामी स्वरूप, अप्सराओं का वशीकरण, सांखला वंश की कुलदेवी के मन्दिर, सांखला परमार क्षत्रिय वंश के कुलदेवता-कुलदेवियों का वर्णन किया गया है।
लेखक ने इतिहास की गहराई में गोते लगाते हुए श्रीकाल भैरव उज्जैन, लोकदेवता हडबूजी सांखला, श्री भोमियाजी महाराज सिहड़देवजी सांखला, जुंझार जी, शीष के दाता धारा वाले जगदेव पंवार, महामण्डलेश्वर श्रीश्री 1008 श्री कुशालगिरी जी महाराज, देवी ममता जी, सांखला वंष के ऐतिहासिक वीर पुरुष, सहित सांखला व सहगौत्र वंष के महापुरूषों का सुन्दर चरित्र चित्रण किया गया है, जो विशिष्ट है।
पुस्तक में अन्य जानकारी परक अध्यायों को शामिल करने से पुस्तक की महत्ता और बढ गई। पुस्तक में अग्नि देव (आग के देवता), शंख के महत्त्व पर विचार, पंवार राजवंश के गौरव- अचलेश्वर मंदिर आबू पर्वत, चन्द्रावती नगरी-दुनिया का सबसे समृद्ध नगर, देवताओं का शहर, अनूठा भोजेष्वर मन्दिर, लाडनूं में सांखलाओं के स्मारक-निर्माण आदि का वर्णन किया गया है।
कुल मिलाकर पुस्तक में समाहित सामग्री सांखला वंष सहित प्रत्येक व्यक्ति के लिए पठनीय है। पुस्तक में बीच-बीच में महत्त्वपूर्ण जानकारियां फोन्ट हाईलाईट करने से एवं चित्रों के समावेष से प्रभावी बन गई है। पुस्तक की भाषा सहज, सरल व बौद्वगम्य है। पुस्तक का आवरण पृष्ठ आकर्षित करने वाला है, जिस पर कुलदेवी-देवता के चित्रों को दिखाया गया है। उत्कृष्ट कागज पर सुन्दर बड़े फोन्ट की छपायी पुस्तक की पठनीय क्षमता को बढाती है। पुस्तक के मूल्य 500/- आम पाठक को अधिक लग सकते हैं, लेकिन पुस्तक की विषय वस्तु, सामग्री एवं शोधपरकता को देखते हुए कम ही प्रतीत होते हैं। पुस्तक के अंत में लेखक जगदीश यायावर व प्रकाशक श्रीमती सुमित्रा आर्य का परिचय भी प्रकाशित किया गया है। केवल सांखला वंष ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण माली समाज व अन्य समाजों के लिए भी यह पुस्तक पठनीय, संग्रहणीय है।

पुस्तक का नाम- सांखला वंश सर्वस्व (भाग-1)- कुलदेवी-कुलदेवता वर्णन
लेखक- जगदीष यायावर ’सांखला’
पृष्ठ संख्या-240
मूल्य- 500/-
प्रकाशक- कलम-कला प्रकाशन, मालियों का मौहल्ला, लाडनूं 341306 (राजस्थान)
पुस्तक प्राप्ति के लिए सम्पर्क नम्बर- 9571181221, 7878792735

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Author: kalamkala

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