आसक्ति वश व्यक्ति आत्मतत्व को नहीं पहचानता- तिवाड़ी, दिवंगत कवि रचित ‘भजनमाला’ पुस्तक का विमोचन

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आसक्ति वश व्यक्ति आत्मतत्व को नहीं पहचानता- तिवाड़ी,

दिवंगत कवि रचित ‘भजनमाला’ पुस्तक का विमोचन

लाडनूं। स्थानीय दाधीच भवन में पाबोलाव सिद्ध हनुमंतपीठ के पीठाधीश्वर महन्त कमलेश्वर भारती महाराज के सान्निध्य में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाकर ‘आत्रेयदास’ उपनाम से रचनाएं लिखने वाले स्व. चम्पालाल दाधीच द्वारा रचित भजनों के संकलन की पुस्तक ‘भजनमाला’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर महन्त कमलेश्वर भारती ने अक्षर-ब्रह्म की व्याख्या प्रस्तुत करते हुए चतुष्पाद आत्मा के बारे में जानकारी दी और मनुष्य मात्र को उर्ध्वगामी बनने का सन्देश दिया। वरिष्ठ साहित्यकार रामकुमार तिवाड़ी ने इन्द्रियां, मन, बुद्धि और आत्मा का विवेचन प्रस्तुत करते हुए बताया कि मनुष्य में शक्ति और आसक्ति दोनों रहती है, लेकिन आसक्ति वश व्यक्ति आत्म तत्व को नहीं पहचान पाता। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार रामकुमार तिवाड़ी के साथ दाधीच सेवा समिति के अध्यक्ष सागरमल पाटोदिया, नथमल दाधीच, मन्नालाल, त्रिलोकचन्द, रमेशकुमार, सुरेशकुमार, विश्वनाथ, रामेश्वर दाधीच, साहित्यकार सीताराम सोनी, पवन काकड़ा, पंकज दाधीच, प्रवीण दाधीच आदि प्रमुख व्यक्ति उपस्थित रहे। इस अवसर पर समाजसेवी स्व. हनुमान मल दाधीच की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई और महर्षि दधीचि व माताजी दधिमती के जयघोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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Author: kalamkala

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