न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद विवादित खेत पर कब्जा करने और हरे पेड़ काटने के आरोप, वृताधिकारी को सौंपा ज्ञापन, जान से माने की धमकी की शिकायत भी की

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न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद विवादित खेत पर कब्जा करने और हरे पेड़ काटने के आरोप,

वृताधिकारी को सौंपा ज्ञापन, जान से माने की धमकी की शिकायत भी की

लाडनूं। सामाजिक कार्यकर्ता मो. मुश्ताक खां कायमखानी ने उप पुलिस अधीक्षक राजेश ढाका को ज्ञापन देकर राजस्व न्यायालय लाडनूं एवं नागौर द्वारा जारी स्थगन आदेशों की बार-बार खुली अवहेलना करने के मामले में दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन में लिखा गया है कि उसके पूर्व सैनिक पिता स्वर्गीय पिता अलादीन खां पुत्र बक्सू खां जाति कायमखानी के हिस्से के खेत खसरा नंबर 706 रकबा 17 बीघा 14 बिस्वा के विवादित जायगा होने के बावजूद कतिपय बदमाश लोगों ने अवैध तरीके से खेत में प्रवेश करके खेत में लगी खेजड़ियां व पाला वगैरह काट कर ले गए। उन्होंने बलपूवर्क खेत में एक पानी की हौद का भी निर्माण करवा लिया और खेत में इंटरब्लॉक की सड़क बनवा ली है। जबकि इस खेत को लेकर स्थानीय उपखंड राजस्व न्यायालय व राजस्व न्यायालय नागौर द्वारा मौका-स्थल व मौका-रिकॉर्ड की यथास्थिति बनाए रखने के लिए स्थगन आदेश जारी किए हुए हैं। वर्तमान में राजस्व न्यायालय अजमेर में भी वाद विचाराधीन है। इस सबके बावजूद अप्रार्थीगण ने मिलकर एकराय से राजस्व न्यायालय के स्थगन आदेश की खुल्लम खुल्ला बार-बार अवहेलना करते हुए उनके विवादित खेत की भूमि पर अवैधानिक तौर पर हरकते की हैं।

जान-माल के नुकसान का अंदेशा

ज्ञापन में कायमखानी ने बताया है कि अवैध कब्जा करने वाले व्यक्ति हिस्ट्रीशीटर व भूमाफिया हैं तथा बहुत ही खतरनाक प्रवृत्ति के लोग हैं। इनका अपराधिक रिकॉर्ड पुलिस के पास मौजूद है। ज्ञापन में अंदेशा जताया गया है कि ये लोग उसे या उसके परिवार के लोगों को कभी भी जानलेवा हमला करके जान-माल का नुकसान पहुंचा सकते हैं और शांति और कानून व्यवस्था को वक्त भंग कर सकते हैं। इसलिए सभी दोषी व्यक्तियों की गतिविधियों पर रोक लगाई जानी आवश्यक है। ये लोग उसे जान से मारने की ऐलानिया धमकियां भी दे रहे हैं। ज्ञापन में काटे हुए पाला, खेजड़ी आदि को जब्त करने एवं सम्पूर्ण विवादित भूमि को कुर्क करवा कर सरकारी तहबील में लेने की मांग की है। ज्ञापन के साथ विभिन्न मुकदमों की प्रतियां और स्ािगन आदेश की प्रतियां भी प्रस्तुत की गई है।

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Author: kalamkala

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